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चूना खाने के फायदे एवं घरेलु उपयोग – Chuna Khane ke fayde

Chuna Khane ke fayde

चूना खाने के फायदे एवं घरेलु उपयोग – Chuna Khane ke fayde

प्राचीनकाल में चूना का इस्तेमाल बड़ी – बड़ी इमारतें एवं पुलों का निर्माण करने में होता था । मूलत : कैल्सियम का स्रोत होने से चूना का मानवीय स्वास्थ्य से गहरा संबंध है । कैल्सियम हड्डियों को स्वस्थ – सबल बनाता है । चूने का पानी अम्लनाशक होता है ।

जोड़ों के दरद , दाद , ग्रंथियों की वृद्धि , अम्ल की अधिकता में लाभप्रद होता है । रक्तशोधक , मूत्र को साफ करता है । घाव पर लगाने से घाव ठीक करता है ।

आग से त्वचा के जलने पर खाने के चूना को चौगुने मक्खन में मिलाकर लेप लगाने से शांति मिलती है । जले स्थान को शांति देने की इसकी प्रकृति है । शरीर में जहाँ से रक्तस्राव हो , चूना लगाने से रक्त बंद हो जाता है ।

कली के चूने को औषधीय प्रयोजन हेतु काम में लिया जाता है । कली का चूना 60 ग्राम लेकर चार लीटर पानी में घोल देते हैं तथा चूना जम जाने पर पानी को नितार लेते हैं । इसी चूने के पानी में कैल्सियम रहता है

सावधानी

सिर्फ कली के चूने का ही उपयोग करें । अधिक मात्रा में चूना सेवन करने से मुँह में छाले हो जाते हैं । आँतों में घाव होकर मरोड़ एवं खूनी दस्त हो सकते हैं । धड़कन एवं बेहोशी जैसे उपद्रव में दूध में थोड़ा बादाम का तेल मिलाकर पीने से लाभ होता है ।

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चर्म रोगों में

तिल या नारियल के तेल में चूने का पानी मिलाकर लगाने से खाज , खुजली , त्वचा का जलना तथा अन्य चर्म रोगों में लाभ होता है ।

बच्चों के पेट में कृमि होने पर

100 ग्राम चूने के पानी की गुदा में पिचकारी देने से कृमि नष्ट हो जाते हैं ।

हृदय की जलन में

40 ग्राम चूने का पानी पिलाया जाए । ० उलटी , दस्त , क्षयरोग में -100 ग्राम दूध के साथ चूने का पानी 80 ग्राम मिलाकर पीने से लाभ होता है । ० मस्से होने पर – चूने , सज्जी , तूतिया और फिटकरी तथा सुहागा को पानी में पीसकर मस्सों पर नित्य लगाने से लाभ होता है ।

पीलिया होने पर-

  • दो रत्ती कली का चूना , 5 ग्राम गुड़ के साथ प्रात : खिलाने से पीलिया मिटता है ।
  • दो रत्ती कली का चूना गन्ने के रस में मिलाकर प्रतिदिन पिलाने से लाभ होता है ।
  • एक पके केले पर चूना लेप करके रात भर खुले आसमान में छत पर रख दें ; प्रात : छीलकर केला खाने से पीलिया मिटता है । यह प्रयोग 7 दिन तक करें । पीलिया के रोगी को छह माह तक तेल , मिर्च , नमक से परहेज रखना चाहिए ।

लंबाई ( कद ) बढ़ाने के लिए –

आधा ग्राम कली का चूना नित्य 150 ग्राम दही में मिलाकर खाने से लाभ होता है ।

बालकों का सूखा रोग

बालकों को सूखा रोग होने पर कली का चूना 1 रत्ती में शहद मिलाकर चटाएँ तथा दूध पिलाने से लाभ होता है । सूखा रोग से ग्रसित बालकों को दूध पिलाने के बाद नारंगी या संतरा का रस पिलाने से भी लाभ होता है ।

पागल कुत्ते के काटने पर –

आक के दूध में कली के चूने को 7 बार भिगोकर सुखाएँ तथा चने के बराबर गोलियाँ बनाकर एक – एक गोली सुबह – शाम दूध के साथ सेवन करने से पागल कुत्ते का विषैला दुष्प्रभाव मिट जाता है । उलटी हो जाए तो उलटी द्वारा विष बाहर निकल जाता है । उलटी न भी हो तो भी विष नष्ट होने लगता है । 1 वर्ष तक पानी में लाभ के प्रवाह , अग्नि की ज्वाला तथा खटाई इत्यादि से परहेज रखें ।

कमजोरी में

कमजोरी में 1 रत्ती की कली का चूना 5 ग्राम शहद में मिलाकर ऊपर से केसर और गर्भ का दूध पीना चाहिए। इसके सेवन से पाचन क्रिया बढ़ती है। दुर्बलता दूर होती है।

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गले बैठने पर –

बबूल की कलियों के रस में कली का चूना मिलाकर चने के बराबर गोली बनाकर चूसने से स्वर खुल जाता है।

अपच और एनोरेक्सिया में

एक रत्ती की कली, 3 ग्राम अदरक का रस, 4 ग्राम शहद को चाटने से अपच, भूख न लगना और जठरशोथ दूर होता है।

अफरा और पेट के कृमि

एक गिलास पानी में दो रत्ती चूने, दो रत्ती, दो रत्ती, नमक घोलें। इस पानी को 20 ग्राम पीने से , अफरातफरी और पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

अस्थमा में

1 रत्ती कली का चूना , 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से अस्थमा ( दमा ) होता है ।

हृदय रोग में —

कली का चूना आधा ग्राम , 10 ग्राम गुड़ में मिलाकर खिलाने से हृदय सशक्त होता है । रक्त – संचरण की क्रिया में सुधार आता है ।

चेहरे की कीलें –

चूने में शहद मिलाकर लगाने से चेहरे की कीलें नष्ट हो जाती हैं ।

श्वेत प्रदर –

300 ग्राम पानी में 100 ग्राम चूने के नितरे पानी को मिलाकर पिचकारी से या वैजाइनल डूस ( एक प्रकार का एनिमा ) से प्रक्षालन करने से लाभ होता है । यह प्रयोग कुछ दिनों नित्य करें ।

क्षय रोग में –

एक गिलास गाय के दूध में कली के चूने का पानी 30 ग्राम मिलाकर पीने से लाभ होता है ।

उलटी में –

जब किसी भी औषधि से लाभ न होता हो तो दूध में कली के चूने का पानी मिलाकर पिलाने से बहुत लाभ मिलता है ।

मूत्रकृच्छ्र में –

तिल के तेल में शक्कर एवं चूने का नितरा पानी मिलाकर पिलाने से चमत्कारी लाभ होता है ।

एसिडिटी में –

10 ग्राम कली के चूने को एक लीटर पानी में घोलकर रखें । जम जाने पर ऊपर से पानी नितार लें । 30-30 ग्राम चूने का पानी 100 ग्राम ठंढे दूध में मिलाकर सुबह – शाम पिलाने से । एसिडिटी मिटती है ।

दस्त में—

एसिडिटी के कारण दस्त हों तो कली के चूने के पानी में थोड़ी – सी बबूल की गोंद मिलाकर | घोलकर पिलाने से दस्त बंद हो जाते हैं ।

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आग से जलने पर –

आग से त्वचा के जलने पर कली का चूना , अलसी का तेल मिलाकर लगाने से जलन मिटती है , जल्दी लाभ होता है । यह प्रयोग । प्रतिदिन लाभ होने तक जारी रखें ।

शीतला के घाव होने पर –

चूने के पानी में रूई का फाहा भिगोकर शीतला के घावों पर रखने से जख्म गहरे नहीं पड़ते ।

बदगाँठ में –

कली का चूना और शहद कोई [ मिलाकर लेप लगाकर पट्टी बाँधने से बदगाँठ बिखर जाती है ।

पसली के दरद में –

कली के चूना में शहद 5 मिलाकर लेप करने से पसली का दरद मिटता है मकड़ी के विष में त्वचा पर मकड़ी के विष न से हुए संक्रमण में चूने को नारियल तेल में मिलाकर चिरौंजी के साथ पीसकर लेप लगाने से न लाभ होता है ।

माइग्रेन में –

आधे सिर में दरद होने पर 8-10 – नीम की ताजी पत्तियों का रस निकालकर आधा रत्ती | कली का चूना मिलाकर नाक या कान में डालने से सिरदरद में तुरंत लाभ महसूस होता है ।

मोच में –

चूने के साथ मक्खन मिलाकर मोच पर लगाने से मोच की पीड़ा शांत होती है ।

एनीमिया में –

आधा ग्राम ( चार रत्ती ) कली का चूना लेकर अनार के रस , संतरे के रस या गन्ने के रस में मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से लाभ होता है ।

घुटने के दरद , कमर के दरद , कंधे के दरद तथा रीढ़ के दरद में व हड्डी टूटने पर –

आधा ग्राम से कम मात्रा में कली का चूना दूध के साथ सेवन कर सकते हैं । दूध में चीनी के स्थान पर गुड़ मिलाएँ।

अंतिम शब्द

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Update on May 28, 2021 @ 9:47 am

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