10th class Social science History 1st chapter ( यूरोप मे राष्ट्रवाद ) Pdf Download


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अध्याय – 1 यूरोप मे राष्ट्रवाद


1.इटली एवं जर्मनी वर्तमान में किस महादेश के अंतर्गत आते है ।

उत्तर– यूरोप                               

2. फ्रांस में किस शासक वंश की पुनस्र्थापना वियना कांग्रेस द्वारा की गई ?

 उत्तर- बूबो वंश                                                                     

3. शाही मेजिनी का सम्बन्ध किस संगठन से था ?

 उत्तर- कर्बोनरी  

4. इटली एवं जर्मनी के एकीकरण के विरुद्ध निम्न में कौन था ? —–

उत्तर-ऑस्ट्रिया                                                                                  

5.काउंट काबूर को विक्टर इमैनुएल ने किस पद पर नियुक्त किया ?

उत्तर- प्रधानमंत्री                                 

6. गैरीबाल्डी पेशे से क्या था ?

 उत्तर- नाविक

7. जर्मन राईन राज्य का निर्माण किसने किया ?

 उत्तर-  ( ख ) नेपोलियन बोनापार्ट

*लघु उतरीय प्रश्न 


प्रश्न 1. राष्ट्रवाद क्या है ?

उत्तर- राष्ट्रवाद आधुनिक युग की राजनैतिक चेतना का परिणाम है । जो एक विशेष भौगोलिक , सांस्कृतिक एवं सामाजिक परिवेश में विकसित होती । यूरोप में राष्ट्रवादी चेतना को शुरूआत फ्रांस से होती है ।

प्रश्न 2. मेजिनी कौन था ?

उत्तर — मेजिनी साहित्यकार , गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था , जिसने इटली के एकीकरण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया ।

 मेजिनी इटली में राष्ट्रवादियों के गुप्तदल ‘ कार्बोनरी ‘ का सदस्य था । 1845 ई . में मेटरनिक की पराजय के बाद विजिनी ने पुन : इटली आकर इटली के एकीकरण का प्रयास किया लेकिन अपने इस प्रयास में भी वह असफल रहा और उसे पलायन करना पड़ा । मेजिनी के द्वारा 1831 ई . में यंग इटली एवं 1834 में यंग यूरोप के स्थापना का श्रेय प्राप्त है । 1848 की क्रांति के बाद पुन : वापसी एवं जनवादी आन्दोलन की शुरूआत मेजिनी द्वारा किया गया ।

प्रश्न 3. 1848 के फ्रांसीसी क्रांति के कारण क्या थे ?

उत्तर -1848 ई ० के फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारण निम्नलिखित

  • ( i ) लुई फिलिप को कमजोर एवं उदारवादी नीति ।
  • ( ii ) असफल वैदेशिक नीति ।
  • ( iii ) मध्यम वर्ग का शासन पर प्रभाव ।
  • ( iv ) राजनीतिक दलों में संगठन का अभाव ।
  • ( v ) भुखमरी एवं बेरोजगारी जैसी समस्याएँ ।
  • ( vi ) समाजवाद का प्रसार । इस क्रांति के सबसे प्रमुख कारण लुई फिलिप की नीति और जनता में उनके प्रति असंतोष था । साथ ही जनता की आवश्यकता जरूरतों को पूरा नहीं कर पाने से क्रांति का सूत्रपात हुआ ।

प्रश्न 4. इटली , जर्मनी के एकीकरण में आस्ट्रिया की भूमिका क्या थी ?

उत्तर – इटली तथा जर्मनी के एकीकरण में आस्ट्रिया सबसे बड़ी बाधा थी । एकीकरण के पीछे मूलत : राष्ट्रवाद भावना थी और आस्ट्रिया का चांसलर ‘ मेटरनिरव ‘ घोर प्रतिक्रियावादी था । उसने इटली तथा जर्मनी के एकीकरण के लिए होने वाले सभी आंदोलनों अथवा प्रयासों को दबाया ।

मेटरनिरव की दमनकारी नीति के प्रतिक्रिया स्वरूप इटली तथा जर्मनी की जनता में राष्ट्रवाद की भावना बढ़ती चली गई । आस्ट्रिया में मेटरनिरव के पतन के बाद इटली और जर्मनी के लोगों ने एकीकरण के मार्ग का प्रमुख बाधा समाप्त होते ही फिर से उत्साहपूर्वक एकीकरण का प्रयास किया और अंततः सफलता पायी ।

प्रश्न 5. गैरीबाल्डी के कार्यों की चर्चा करें ।

उत्तर- ज्यूसप गैरीबाल्डी नीस नगर में 1807 ई. में जन्म । उसके पिता व्यापारिक जहाज में एक अधिकारी थे अतः उसे भूमध्य सागर की यात्राओं का अनुभव था। इन यात्राओं से वह इटली के राष्ट्रभक्तों के सम्पर्क में आया। एक नौ सैनिक विद्रोह में भाग लेने पर उसे मृत्युदण्ड मिला किन्तु वह दक्षिणी अमेरिका भाग गया। वहां उसने छापामार युद्ध का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

            1854 में इटली लौटने पर उसने केप्रीरा टापू खरीद लिया (इसी के कारण नेपल्स व सिसली इटली में शामिल हुए) ।   गैरीबाल्डी ने लाल कुर्ती नामक देशभक्तों का संगठन बनाया। 1000 लाल कुर्ती वाले स्वयंसेवको का दल बना 5 मई 1860 को सिसली पर आक्रमण कर दिया। इंग्लैण्ड की अप्रत्याशित सहायता से उसने विजय प्राप्त कर स्वयं को अधिनायक घोषित कर दिया।

रोम पर आक्रमण करने से कावूर ने उसे रोक दिया तथा विक्टर एमेनुअल से समझौता करा कर नेपल्स और सिसली को इटली में समाहित करना स्वीकार कर लिया और अपना शेष जीवन किसान के रूप में व्यतीत किया।

प्रश्न 6. मेटरनिक युग क्या है ?

उत्तर- मेटरनिक अपने समय का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे प्रतिभाशाली राजनायक था। नेपोलियन की वाटरलू पराजय के बाद मेटरनिख यूरोप की राजनीति का सर्वेसर्वा बन गया । उसने यूरोपीय राजनीति में इतनी प्रमुख भूमिका निभाई कि 1815 से 1848 तक के यूरोपीय इतिहास का काल ‘मेटरनिख युग’ के नाम से प्रसिद्ध है .

प्रश्न 7. यूरोप में राष्ट्रवाद को फैलाने में नेपोलियन बोनापार्ट किस तरह सहायक हुआ

उत्तर-  नेपोलियन के समय इटली और जर्मनी मात्र एक भौगोलिक अभिव्यक्ति ‘ थे । नेपोलियन ने अनजाने में ( अप्रत्यक्ष रूप से ) इटली एवं जर्मनी के छोटे – छोटे विभाजित प्रांतों का एकीकरण कर दिया था ।

दोनों राज्यों को एक संगठित राजनीतिक रूप देने का प्रयास किया । दोनों देशों में राष्ट्रीयता की भावनाओं को जागृत किया । नेपोलियन ने समानता एवं भ्रातृत्व पर आधारित नवीन समाज का निर्माण इन देशों में कर दिया । इस दृष्टिकोण से हम नेपोलियन को क्रांति का वास्तविक अग्रदूत कह सकते हैं जिसने यूरोप के दो राष्ट्रों को संगठित होने के लिए प्रेरणा दी ।

प्रश्न 8. विलियम- I के बगैर जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क के लिए असंभव था कैसे ?

उत्तर – विलियम- I जानता था कि जर्मनी के एकीकरण के मार्ग में आस्ट्रिया बाधक है तथा इसे हटाये बिना जर्मनी का एकीकरण संभव नहीं है । अतः आस्ट्रिया से मुक्ति पाने के लिए उसे युद्ध में हराना जरूरी था । इसके लिए आवश्यक था कि जर्मनी सैनिक दृष्टि से मजबूत बने । विलियम ने प्रशा की सैनिक शक्ति बढ़ाने के लिए एक ठोस योजना बनायी । उदारवादियों के विरोध के बाद भी विलियम सैन्य बजट पर अधिक खर्च किया । विलियम की इस नीति के कारण बिस्मार्क ने ‘ रक्त एवं लौह ‘ की नीति का अवलम्बन किया तथा जर्मनी का एकीकरण संभव हुआ

प्रश्न 9. इटली , जर्मनी के एकीकरण में आस्ट्रिया की भूमिका क्या थी ?

उत्तर – इटली , जर्मनी का एकीकरण आस्ट्रिया की शर्त पर हुआ क्योंकि इटली एवं जर्मनी के प्रांतों पर आस्ट्रिया का आधिपत्य तथा हस्तक्षेप था , आस्ट्रिया को इटली और जर्मनी से बाहर करके ही दोनों का एकीकरण संभव था , दोनों राष्ट्रों आस्ट्रिया को बाहर निकालने के लिए विदेशी सहायता ली ।

*दीर्घ उतरीय प्रश्न


प्रश्न 1. इटली के एकीकरण में मेजिनी , काबूर और गैरीबाल्डी के योगदानों को बताएँ ?


उत्तर – मेजिनी – साहित्यकार , गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था । 1820 ई ० में राष्ट्रवादियों ने एक गुप्त दल ‘ कार्बोनरी ‘ की स्थापना की थी जिसका उद्देश्य छापामार युद्ध द्वारा राजतंत्र को समाप्त कर गणराज्य की स्थापना करना था । कार्बोनरी के असफल होने पर मेजिनी ने अनुभव किया कि इटली का एकीकरण कार्बोनरी की योजना के अनुसार नहीं हो सकता है । 1831 में उसने ‘ युवा इटली ‘ नामक संस्था की स्थापना की जिसने नवीन इटली के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी । ‘ युवा शक्ति ‘ में मेजिनी का अटूट विश्वास था । युवा इटली संस्था का मुख्य उद्देश्य था — इटली की एकता एवं स्वतंत्रता की प्राप्ति तथा स्वतंत्रता , समानता और जन – कल्याण के सिद्धांत पर आधारित राज्य की स्थापना करना ।

काउंट काबूर – काबूर एक सफल कूटनीतिज्ञ एवं राष्ट्रवादी था । वास्तव में काबूर के बिना मेजिनी का आदर्शवाद और गैरीबाल्डी की वीरता निरर्थक होती । काबूर इन दोनों के विचारों में सामंजस्य स्थापित किया ।

ज्यूसप गैरीबाल्डी – ज्यूसप गैरीबाल्डी नीस नगर में 1807 ई. में जन्म । उसके पिता व्यापारिक जहाज में एक अधिकारी थे अतः उसे भूमध्य सागर की यात्राओं का अनुभव था। इन यात्राओं से वह इटली के राष्ट्रभक्तों के सम्पर्क में आया। एक नौ सैनिक विद्रोह में भाग लेने पर उसे मृत्युदण्ड मिला किन्तु वह दक्षिणी अमेरिका भाग गया। वहां उसने छापामार युद्ध का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

            1854 में इटली लौटने पर उसने केप्रीरा टापू खरीद लिया (इसी के कारण नेपल्स व सिसली इटली में शामिल हुए) । गैरीबाल्डी ने लाल कुर्ती नामक देशभक्तों का संगठन बनाया। 1000 लाल कुर्ती वाले स्वयंसेवको का दल बना 5 मई 1860 को सिसली पर आक्रमण कर दिया। इंग्लैण्ड की अप्रत्याशित सहायता से उसने विजय प्राप्त कर स्वयं को अधिनायक घोषित कर दिया।

रोम पर आक्रमण करने से कावूर ने उसे रोक दिया तथा विक्टर एमेनुअल से समझौता करा कर नेपल्स और सिसली को इटली में समाहित करना स्वीकार कर लिया और अपना शेष जीवन किसान के रूप में व्यतीत किया।


प्रश्न 2. जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का वर्णन करें ।


उत्तर – जर्मनी के एकीकरण में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका बिस्मार्क की रही उसने सुधार एवं कूटनीति के अंतर्गत जर्मनी के क्षेत्रों का प्रशाकरण अथवा प्रशा का एकीकरण करने का प्रयास किया । वह प्रशा का चांसलर था । वह मुख्य रूप से युद्ध के माध्यम से एकीकरण में विश्वास रखता था । इसके लिए उसने रक्त और लौह की नीति का पालन किया । इस नीति से तात्पर्य था कि सैन्य उपायों द्वारा ही जर्मनी का एकीकरण करना । उसने जर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा लागू कर दी । जर्मनी के एकीकरण के लिए बिस्मार्क के तीन उद्देश्य थे

  1. पहला उद्देश्य प्रशा को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाकर उसके नेतृत्व में जर्मनी के एकीकरण को पूरा करना ।
  2. दूसरा उद्देश्य आस्ट्रिया को परास्त कर उसे जर्मन परिसंघ बाहर निकालना था ।
  3. तीसरा उद्देश्य जर्मनी को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाना था ।

जर्मनी के एकीकरण मे बिस्मार्क द्वरा किये गये कार्य

  1. सर्वप्रथम उसने फ्रांस एवं आस्ट्रिया से संधि कर डेनमार्क पर अंकुश लगाया
  2. बिस्मार्क ने आस्ट्रिया के साथ मिलकर 1864 में श्लेसविंग और हाल्सटाइन राज्यों के मुद्दे लेकर डेनमार्क पर आक्रमण कर दिया ।
  3. जीत के बाद श्लेसविंग प्रशा के तथा हाल्सटाइन आस्ट्रिया के अधीन हो गया । डेनमार्क को पराजित करने के बाद उसका मुख्य शत्रु आस्ट्रिया था ।
  4. बिस्मार्क ने यहाँ भी कूटनीति के अंतर्गत फ्रांस से संधि कर 1866 में सेडोवा के युद्ध में आस्ट्रिया को पराजित किया और पोप के अधिकार वाले सारे क्षेत्र को जर्मनी में मिला लिया ।
  5. अंततः , 1870 में सेडान के युद्ध में फ्रांस को पराजित कर फ्रैंकफर्ट की संधि की गई और फ्रांस की अधीनता वाले सारे राज्यों को जर्मनी में मिलाकर जर्मनी का एकीकरण पूरा हुआ ।

प्रश्न 3. जुलाई 1830 की क्रांति का विवरण दें ।


उत्तर –  फ्रांस के शासक चार्ल्स- X एक निरंकुश एवं प्रतिक्रियावादी शासक था । इसके काल में इसका प्रधानमंत्री पोलिग्नेक ने लुई 18 वें द्वारा स्थापित समान नागरिक संहिता के स्थान पर शक्तिशाली अभिजात्य वर्ग की स्थापना की तथा इस वर्ग को विशेषाधिकार प्रदान किया । उसके इस कदम से उदारवादियों एवं प्रतिनिधि सदन ने पोलिग्नेक का विरोध किया । चार्ल्स- X ने 25 जुलाई , 1830 ई ० को चार अध्यादेशों द्वारा उदारवादियों को दबाने का प्रयास किया । इस अध्यादेश के खिलाफ पेरिस में क्रांति की लहर दौड़ गई तथा फ्रांस में गृहयुद्ध आरम्भ हो गया । इसे ही जुलाई , 1830 की क्रांति कहते हैं । परिणामस्वरूप , चार्ल्स- X फ्रांस की गद्दी को छोड़कर इंगलैण्ड पलायन कर गया तथा इसी के साथ फ्रांस में बूबों वंश के शासन का अंत हो गया । जुलाई , 1830 की क्रांति के परिणामस्वरूप फ्रांस में बूर्वो वंश के स्थान पर आलेयेस वंश गद्दी पर आया । आर्लेयेस वंश के शासक लुई फिलिप ने उदारवादियों , पत्रकारों तथा पेरिस की जनता के समर्थन से सत्ता प्राप्त की थी , अतः उसकी नीतियाँ उदारवादियों के समर्थन में संवैधानिक गणतंत्र की स्थापना करना थीं । .


प्रश्न 4. यूनानी स्वतंत्रता आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण दें ।


यूनान में राष्ट्रीयता का उदय यूनान का अपना गौरवमय अतीत रहा है जिसके कारण उसे पाश्चात्य राष्ट्रों का मुख्य स्रोत माना जाता था ।

                         यूनानी सभ्यता की साहित्यिक प्रगति , विचार , दर्शन , कला , चिकित्सा , विज्ञान आदि क्षेत्रों में उपलब्धियाँ पाश्चात्य देशों के लिए प्रेरणास्रोत थीं । पुनर्जागरण काल से ही पाश्चात्य देशों ने यूनान से प्रेरणा लेकर काफी विकास किया था , परन्तु इसके बावजूद यूनान अभी भी तुर्की साम्राज्य के अधीन था ।

                     फ्रांसीसी क्रांति से प्रभावित होकर यूनानियों में राष्ट्रवाद की भावना का विकास हुआ । धर्म , जाति और संस्कृति के आधार पर यूनानियों की पहचान एक थी , फलतः यूनान में तुर्की शासन से अपने को अलग करने के लिए कई आंदोलन चलाये जाने लगे । इसके लिए वहाँ हितेरिया फिलाइक ( Hetairia Philike ) नामक संस्था की स्थापना ओडेसा नामक स्थान पर की गई ।

                        यूनान की स्वतंत्रता का सम्मान समस्त यूरोप के नागरिक करते थे । इंगलैण्ड का महान कवि लॉर्ड बायरन यूनानियों की स्वतंत्रता के लिए यूनान में ही शहीद हो गया । इस घटना से संपूर्ण यूरोप की सहानुभूति यूनान के प्रति बढ़ चुकी थी । रूस जैसा साम्राज्यवादी राष्ट्र भी यूनान की स्वतंत्रता का समर्थक था । रूस तथा यूनान के लोग ग्रीक अर्थोडॉक्स चर्च को मानने वाले थे

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