भारत की रहस्यमयी मंदिर – Bharat Ki Rahasyamayi Mandir

भारत की रहस्यमयी मंदिर – Bharat Ki Rahasyamayi Mandir

हमारे देश में मंदिरों का निर्माण प्राचीन काल से ही शुरू हुआ था और इनका निर्माण वास्तुकला और खगोल विज्ञान को ध्यान में रखकर किया गया था।

आज भी इन प्राचीन मंदिरों की खूबसूरती, मजबूती और बनावट लोगों को हैरान कर देती है। लोग इन मंदिरों की ओर आकर्षित होते हैं और इन स्थानों पर जाते हैं और शांति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की कई धाराओं को महसूस करते हैं। अक्सर मंदिरों के पास जलाशय होते हैं, जो उनके महत्व को और बढ़ा देते हैं।

मंदिर का अर्थ है ऐसा स्थान जहाँ देवप्रतिमा का निवास हो, उसमें प्राणप्रतिष्ठा हो, विधिवत पूजा की जाए – उसमें पूजा करें। ऐसे में मंदिर जीवित और जाग्रत हो जाते हैं और लोगों की मनोकामनाएं पूरी करने में भी सहायक होते हैं।

जो लोग इन मंदिरों और मूर्तियों के विज्ञान के बारे में नहीं जानते हैं, उन्हें लग सकता है कि ये सिर्फ भौतिक संरचनाएं हैं, लेकिन हमारे पूर्वजों ने इन्हें एक सकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र के रूप में बनाया था, जहां गुणवत्ता कुछ पल बैठ सकती थी। जीवन जीने के लिए ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।

भारतीय संस्कृति में मूर्ति निर्माण के पीछे एक पूरा विज्ञान है। मूर्ति में एक निश्चित प्रकार की आकृति एक निश्चित प्रकार के पदार्थ या तत्वों से बनी होती है। अलग-अलग मूर्तियों या मूर्तियों को अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है और उन्हें जगाने के लिए कुछ जगहों पर चक्र स्थापित किए जाते हैं।

इसी तरह, भारत में मंदिरों के निर्माण के पीछे एक गहरा विज्ञान है। यदि मंदिरों के मूल पहलुओं, जैसे मूर्तियों के आकार और आकार, मूर्तियों द्वारा धारण की मुद्रा, परिक्रमा, गर्भगृह और मूर्तियों को बनाने के लिए किए गए मंत्रोच्चार आदि का उचित समन्वय किया जाए, तो यह एक शक्तिशाली ऊर्जावान प्रणाली बनाता जाता है ।

प्राचीन काल में मंदिरों का निर्माण कुछ विशेष तरीके से किया जाता था, ताकि वे ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा को अधिक से अधिक धारण कर सकें और जनता इस ऊर्जा से लाभान्वित हो सके। भारत में एक से बढ़कर एक प्रसिद्ध मंदिर हैं और उन मंदिरों की महिमा भी बड़ी है। हर मंदिर के निर्माण के पीछे एक कहानी है, जो इसकी उत्पत्ति का रहस्य बताती है। इन मंदिरों में दो विशेष मंदिर हैं –

Read more  SEO Friendly Post Kaise Likhe - Seo friendly पोस्ट कैसे लिखे ?

सूर्य मंदिर – india mystery temple in hindi

कोणार्क का सूर्य मंदिर ओडिशा का एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। यहां विश्वस्तरीय खगोलविद सूर्य ग्रहण के अवसर पर सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा देखने आते हैं। मंदिर ओडिशा के पूर्वी जिले में चंद्रभागा नदी के तट पर कोणार्क में स्थित है।

पुराणों के अनुसार, भगवान कृष्ण के पुत्र सांब को उनके श्राप के कारण कुष्ठ रोग हो गया था। सांब ने मित्रवन में चंद्रभागा नदी के समुद्र संगम पर कोणार्क में बारह वर्षों तक तपस्या की और सूर्यदेव को प्रसन्न किया। सूर्यदेव, जो सभी रोगों का नाश करने वाले थे, ने भी उनके रोग का अंत कर दिया। बाद में सांब ने सूर्यदेवता के सम्मान में कोणार्क मंदिर बनवाया।

सूर्यकुंड मंदिर

एक पौराणिक कथा सूर्यकुंड मंदिर की भी है। मंदिर अमलपुर गांव, यमुनानगर, हरियाणा में है। इस मंदिर पर भी सूर्य ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इसलिए सूर्य ग्रहण के दिन दूर-दूर से अनेक साधु-संत माथे पर दर्शन करने आते हैं।

मंदिर के पुजारी के अनुसार – सूर्य ग्रहण के समय मंदिर प्रांगण में आने वाले किसी भी प्राणी पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है; क्योंकि मंदिर के प्रांगण में सूर्यकुंड इस तरह से बनाया गया है कि जब सूर्य की किरणें उसमें पड़ती हैं। तो वे कुंड में ही समा जाती हैं ।

इस मंदिर का इतिहास त्रेतायुग से संबंधित है । ऐसी मान्यता है कि सूर्यवंश के राजा मांधाता ने सौभरि ऋषि को आचार्य बनाकर राजसूय यज्ञ किया था ।

मांधाता के ऋषि ने यज्ञभूमि को खुदवाकर उसमें पानी भरवा दिया और इस कुंड का नाम सूर्यकुंड रख दिया ।

मंदिर की ऐसी मान्यता है कि यहाँ के सूर्यकुंड में स्नान करने से सभी रोग दूर हो जाते हैं । इसी तरह भारत में अनेक रहस्यमय मंदिर हैं , जिनका रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया है ,

कामाख्या मंदिर

यह असम के गुवाहाटी में स्थित , देवी के 51 शक्तिपीठों में से सबसे अधिक प्रसिद्ध है , लेकिन इस मंदिर में देवी की मूर्ति नहीं है । पौराणिक * आख्यानों के अनुसार इस स्थल पर देवी सती की योनि गिरी थी , जो कि समय के साथ साधनास्थल का केंद्र बनी है । इस स्थल पर लोगों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं , इसलिए इस मंदिर को कामाख्या मंदिर कहा जाता है । यह मंदिर तीन हिस्सों में बना हुआ है ,

Read more  भगवान गौतम बुद्ध का जीवन परिचय - Gautam Budhha Biography In Hindi

इसका पहला हिस्सा : सबसे बड़ा है , जहाँ हर व्यक्ति को जाने की अनुमति नहीं है , दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं , जहाँ एक पत्थर से हर समय पानी निकलता है और ऐसा कहते हैं कि वर्ष में एक बार इस पत्थर से रक्त की धारा निकलती है , ऐसा क्यों : और कैसे होता है ? – यह आज तक किसी को ज्ञात नहीं है ।

करणीमाता का मंदिर

इस मंदिर को चूहों वाली माता का मंदिर भी कहा जाता है , जो राजस्थान के बीकानेर में 30 किलोमीटर दूर देशनोक शहर में स्थित है ।

करणीमाता इस मंदिर की अधिष्ठात्री देवी हैं , जिनकी छत्रछाया में इन चूहों का साम्राज्य स्थापित है । इन चूहों में अधिकांश काले चूहे होते हैं , लेकिन कुछ सफेद और दुर्लभ चूहे भी होते हैं । ऐसी मान्यता है कि जिसे यहाँ सफेद चूहा दिख जाता है , उसकी कामना अवश्य पूरी होती है ।

आश्चर्यजनक बात यह है कि ये चूहे बिना किसी को नुकसान पहुँचाए मंदिर के परिसर में भागते , दौड़ते और खेलते रहते हैं । ये लोगों के शरीर पर कूद – फाँद भी करते हैं , लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुँचाते । यहाँ पर चूहे इतनी संख्या में हैं कि लोग यहाँ पर अपने पाँव उठाकर नहीं चल सकते , बल्कि पाँव घसीटकर चलते हैं , लेकिन मंदिर के बाहर ये चूहे कभी नजर नहीं आते ।

ज्वालामुखी मंदिर

यह मंदिर हिमाचल प्रदेश की कालीधार पहाड़ियों में स्थित है । यह मंदिर भी भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है । ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती की जीभ गिरी थी ।

माता सती की जीभ के प्रतीक के रूप में यहाँ धरती के गर्भ से ज्वालाएँ निकलती हैं , जो नौ रंगों की हैं । इन नौ रंगों की ज्वालाओं को देवी के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है ।

Read more  गूगल पर अपना बिज़नेस कैसे डाले - Google my Business क्या है

किसी को भी . यह ज्ञात नहीं है कि ये ज्वालाएँ कहाँ से प्रकट हो रही हैं और इन ज्वालाओं में रंग – परिवर्तन कहाँ से हो रहा है । आज भी लोगों को यह पता नहीं चल पाया है कि ये ज्वालाएँ लगातार प्रज्वलित क्यों हैं और कब तक जलती रहेंगी ?

कालभैरव का मंदिर

यह मंदिर मध्यप्रदेश के शहर उज्जैन से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । परंपरा के अनुसार यहाँ पर श्रद्धालु भगवान कालभैरव को प्रसाद के रूप में केवल मद्य ही चढ़ाते हैं ।

बालाजी मंदिर

मध्यप्रदेश के ही मेंहदीपुर जिले में स्थित यह मंदिर हनुमान जी के दस प्रमुख सिद्धपीठों में से एक माना जाता है । मान्यता है कि इस स्थान पर हनुमान जी जाग्रत अवस्था में विराजते हैं । इस मंदिर के परिसर के भीतर आते ही भूत – प्रेत बाधा से संबंधित लोगों को तत्काल राहत मिलती है ।

शनि मंदिर

महाराष्ट्र के शिगणापुर में स्थित शनि मंदिर । यह मंदिर संगमरमर के एक चबूतरे पर स्थित है और इसके चारों ओर मंदिर के समान कोई निर्माणकार्य नहीं है , बल्कि यह चारों ओर से खुला हुआ है और संगमरमर के चबूतरे पर शनिदेव के प्रतीक रूप में पत्थर की एक शिला है ।

इस स्थल की खास बात यह है कि यहाँ स्थित घरों में कभी चोरी नहीं होती है , इसलिए लोग अपने घरों में दरवाजे और ताले नहीं लगाते हैं ।

लोगों की मान्यता है कि यहाँ पर जो व्यक्ति चोरी करता है , उसे शनिदेव दंडित करते हैं । इस तरह भारत में अनेक रहस्यमय मंदिर हैं , जो आज भी लोगों की श्रद्धा का केंद्र बने हुए हैं और अपने प्रभाव से लोगों के विश्वास व आस्था को संबल देते हैं ।

अंतिम शब्द

इस लेख में आपको भारत की रहस्यमयी मंदिर – Bharat Ki Rahasyamayi Mandir इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारिया मिली हमें यकीन है की आप सभी पाठको को यह काफी पसंद होगा

इसी तरह की जानकारी पाने के लिए आप हमसे Facebook के माध्यम से जुड़ सकते है

इन्हे भी पढ़े

Knowledgewap is a informative blog, whose purpose is to make every informative information available here. Hope you like the given information. " Have a good day "

Leave a Comment