Bihar Board Class 10th Godhuli bhag 2 chapter 4 Solutions Hindi नाखून क्यों बढ़ते हैं

Bihar Board Class 10th Godhuli bhag 2 chapter 4 Solutions Hindi नाखून क्यों बढ़ते हैं

Godhuli Bhag 2 Nakhun Kyu Badhte hai Objective

1. आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जनम ……  ई ० में हुआ

( A ) 1906 ( B ) 1907 ( C ) 1908 ( D ) 1909

2. ‘ नाखून क्यों बढ़ते हैं ‘ पाठ की विधा है

( A ) निबंध ( B ) ललित निबंध ( C ) कहानी ( D ) भाषण

3. ‘ अशोक के फूल ‘ के लेखक हैं

( A ) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ( B ) मैक्समूलर

( C ) टैगोर ( D ) अमरकांत

4. आचार्य हजारी द्विवेदी की कृति है

( A ) कल्पलता ( B ) हिंदी साहित्य का आदिकाल

( C ) हिंदी साहित्य की भूमिका ( D ) उपर्युक्त सभी

5. ‘ विश्वभारती ‘ पत्रिका का संपादन किया

( A ) यतीन्द्र मिश्र ( B ) अमरकांत

( C ) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ( D ) यतीनन्द्र मिश्र

6. आत्मकथा नामक प्रसिद्ध ग्रंथ लिखा

( A ) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ( B ) टैगोर

( C ) डा ० संजय पंकज ने ( D ) रामविलास शर्मा ने

7. लेखक से किसने पूछा कि – ‘ नाखून क्यों बढ़ते है ? ‘

( A ) लेखक की छोटी लड़की ने ( B ) लेखक के मित्र ने

( C ) लेखक के पड़ोसी ने ( D ) लेखक के शिष्य ने

8. हड्डी के हाथियारों में सबसे मजबूत और सबसे ऐतिहासिक था देवताओं के राजा का वज़ जो की हड्डियों से बना था

( A ) विश्वामित्र ( B ) दधीचि मुनि ( C ) वाल्मीकि ( D ) वात्सयायन

9. नखधर मनुष्य अब …… पर भरोसा करके आगे की ओर चल पड़ा है

( A ) एटम बम ( B ) तोप ( C ) तीर धनुष ( D ) बंदूक

10. ‘ अस्व बढ़ाने की प्रवृत्ति मनुष्यता की विरोधिनी है । उक्त वाक्य किस पाठ से उद्भुत है ?

( A ) भारत से हम क्या सीखें ( B ) शिक्षा और संस्कृति

( C ) श्रम विभाजन और जाति प्रथा ( D ) नाखून क्यों बढ़ते है

11. नाखून का इतिहास मिलता है

( A ) रामचरितमानस में ( B ) महाभारत में ( C ) कामसूत्र में ( D ) गीता में

12. लखनऊ विश्वविद्यालय से डी 0 लिट 0 की उपाधि दी गई

( A ) अनामिका को ( B ) हजारी प्रसाद द्विवेदी को

( C ) भीमराव अंबेडकर को ( D ) गुणाकर मुले को

13. ‘ सब पुराने अच्छे नहीं होते ,सब नए खराब नहीं होते यह किसने कहा ?

( A ) कालिदास ने ( B ) सूरदास ने

( C ) रामइकबाल सिंह राकेश ने ( D ) दिनकर ने

14. ‘ नाखुन क्यों बढ़ते हैं पाठ के लेखक है

( A ) अशोक वाजपेयी ( B ) महात्मा गाँधी ( C ) हजारी प्रसाद द्ववेदी

( D ) इनमें से कोई नहीं

15. हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित कृति नहीं है

( A ) मेघ दुधुभि ( B ) पुनर्ववा ( C ) कबीर ( D ) नाथ संप्रदाय

16. हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार निर्लज्ज अपराबी है

( A ) छोटालेबाज नेता ( B ) बेईमान वकील ( C ) नाखून ( D ) डकैत

17. मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती

( A ) शेरनी  ( B ) बाघिन ( C ) सांपिन ( D ) बंदरिया

18. सहजात वृत्तियाँ कहते हैं

( A ) अस्त्र संचय को ( B ) मोह को ( C ) अनजान स्मृतियों को

( D ) इनमें से कोई नहीं

Bihar Board Godhuli Bhag 2 Subjective Question Answer

परीक्षार्थियों के लिए निर्देश : -पाठ्य पुस्तकों से आठ लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएँगे जिनमें से पाँच प्रश्नों का उत्तर लिखना अनिवार्य होगा । प्रत्येक प्रश्न दो अंकों का होगा । शब्द सीमा 30-40 रहेगी ।

प्रश्न 1. नानुन क्यों बढ़ते हैं ? यह प्रश्न लेखक के आगे कैसे उपस्थित हुआ ?

उत्तर – नाखुन क्यों बढ़ते हैं ? यह प्रश्न लेखक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी से उनकी छोटी बेटी ने पूछा ।

प्रश्न 2. बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को क्या याद दिलाती है ?

उत्तर – बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को याद दिलाती है कि मनुष्य लाख वर्ष पूर्व नख – दन्तावली था । उसमें पशुता थी । नखों द्वारा ही विरोधियों पर वार करता था आदि ।

प्रश्न 3. लेखक द्वारा नाखूनों को अस्त्र के रूप में देखना कहाँ तक संगत है ?

उत्तर – लेखक के अनुसार जब लाख वर्ष पूर्व जंगल में रहता था तो नाखून ही मानव के अस्त्र थे । अपने पैने नुकीले नख से अन्य जीवों को मार कर मनुष्य अपना पेट भरता था । उसी से वह अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ता था अत : नाखूनों को अस्त्र के रूप में देखना न्यायसंगत है ।

प्रश्न 4. मनुष्य बार – चार चाखून को क्यों काटता है ?

उत्तर – नाखून मनुष्य का सबसे पुराना हथियार है । आज मनुष्य उस पाशवी वृत्ति को छोड़ चुका है । मनवीय गुण आ जाने के कारण पशुता को छोड़ना ही उचित है इसलिए मनुष्य पशुता के इस प्रतीक को बार – बार काटता है । हालांकि सहजातवृत्ति के कारण वह बहेगा , किन्तु काटा भी जाएगा ।

प्रश्न 5. सुकूमार विनोदों के लिए नाखून को उपयोग में लाना मनुष्य ने कैसे शुरू किया ? लेखक ने इस संबंध में क्या बताया है ?

उत्तर – आज से लगभग दो हजार वर्ष पूर्व विलासी मनुष्यों ने नाखूनों को सजा – संचारकर , उसे विविध प्रकार से काट – छाँटकर सुन्दर और आकर्षक बनाते थे । नाखून उनके सुकुमार विनोदों के काम में आता था । नाखून बढ़ाने की प्रवृत्ति अधोगामिनी है । फिर भी हम भारतवासियों ने उसे उचित माना ।

प्रश्न 6. नख बढ़ाना और काटना कैसे मनुष्य की सहजात वृत्तियां है । इसका क्या अभिप्राय है ?

उत्तर – मानव शरीर में कुछ सहजात प्रवृत्तियाँ होती है । उदाहरणत : नाखून बढ़ना , केश बढ़ना , पलके झपकाना आदि उसी प्रकार नाखून और केश काटना भी उसकी सहजात वृत्तियाँ ही हैं । निष्कर्ष यह कि नाखून का बढ़ना पशुता की निशानी है और इसे काटना मानवता का लक्षण

प्रश्न 7. लेखक क्यों पूछता है कि मनुष्य किस ओर बढ़ रहा है ? मनुध्यता की ओर या पशुता की ओर ?

उत्तर – लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी कहते हैं कि माना मेरी छोटी बेटी निबाँध बालिका ने मनुष्य जाति से पूछ रही है कि मनुष्य किस ओर बढ़ रहा है , पशुता की ओर या मनुष्यता की ओर ? मनुष्य का अस्त्र शस्त्र बढ़ना क्या पशुता की ओर नहीं ले जा रहा है ? क्या मनुष्य अस्त्र काटने की ओर बढ़ रहा है ? जवाब मिलेगा नहीं ।

प्रश्न 8. देश की आजादी के लिए प्रयुक्त किन शब्दों की अर्थ मीमांसा लेखक करता है और लेखक के निष्कर्ष क्या है ?

उत्तर – लेखक आजादी के लिए ‘ इण्डिपेण्डेन्स ‘ शब्द की मीमांसा करते हुए कहता है कि इस शब्द का अर्थ अन्अधीनता है । अतः अधीनता का अभाव यह लेकिन हमनें उसे सहज भाव में ‘ स्वाधीनता ‘ नाम दे दिया यह हमारी विशेषता है कि हमने ‘ अन् ‘ को ‘ स्व ‘ में बदल डाला ।

प्रश्न 9. लेखक ने किस प्रसंग में कहा है कि बंदरिया मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती । लेखक का अभिप्राय स्पष्ट करें ।

उत्तर – लेखक इस ललित निबंध में कहता है कि सब पुराने अच्छे नहीं होते और सब नए खराब नहीं होते हमें पुराने का मोह त्यागना होगा और नए का भी वरण करना होगा । अपने मरे हुए बच्चे को सीने से लगाकर रहने वाली बन्दरिया मनुष्य का आदर्श नहीं हो सकती । लेखक कहता है कि हमें दोनों को परखकर जो सही लगे । उसका चुनाव करना चाहिए ।

प्रश्न 10. ‘ स्वाधीनता ‘ शब्द की सार्थकता लेखक क्या बताता है?

उत्तर – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ” स्वाधीनता ” शब्द की सार्थकता बतलाते हुए कहते हैं कि ‘ अनधीनता ‘ की भारत के लोग ‘ स्वाधीनता ‘ के रूप में अर्थ ग्रहण करते हैं । यह हमारे दीर्घकालीन संस्कारों का परिणाम है । इसलिए हम ‘ स्व ‘ के बंधन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं ।

प्रश्न 11. मनुष्य की पूंछ की तरह उसके नाखून भी एक दिन झड़ जाएँगे । -प्राणिशास्त्रियों के इस अनुमान से लेखक के मन में क्या आशा जगती है ?

उत्तर – प्राणिशास्त्रियों का अनुमान है कि मनुष्य की पूँछ की तरह उसके नाखून भी एक दिन झड़ जाएंगे । इससे लेखक के मन में आशा जगती है कि समय के साथ जिस प्रकार पूँछ झड़ गयी उसी प्रकार पशुता का प्रतीक चिह्न नाखून भी झड़ जाएंगे और उसकी पाशवीवृद्धि का शमन हो जाएगा ।

परीक्षार्थियों के लिए निर्देश : -परीक्षा में दो दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएँगे जिनमें से किसी एक प्रश्न का उत्तर 50-60 शब्दों में लिखना होगा । यह प्रश्न 5 नंबर का होगा ।

प्रश्न 1. निबंध में लेखक ने किस बूढ़े का जिक्र किया है ? लेखक की दृष्टि में बूढ़े के कथन में क्या सार्थकता है ?

उत्तर – निबंध में लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी ने बूढ़े नेता के रूप में महात्मा गांधी का जिक्र किया है । जब एक ओर बड़े – बड़े नेता कह रहे थे कि वस्तुओं की कमी है मशीन बैठाओ , उत्पादन बढ़ाओ और धन की वृद्धि करो और बाह्य उपकरणों की ताकत बढ़ाओ , तो वह वृद्ध नेता कह रहा था कि बाहरनहीं भीतर की ओर देखो । हिंसा को मन से दूर रखो , मिथ्या का हटाओ , क्रोध और द्वेष को दूर करो , लोक के लिए कष्ट सही , आराम की बात मत सोचो , प्रेम की बात सोचो । प्रेम ही बड़ी चीज हैं , क्योंकि वह हमारे भीतर है । वस्तुतः उस बूद का कथन ही सार्थक है क्योंकि इन बंधनों से मुक्त होने का तात्पर्य है – मनुष्य को अपने स्वभाव से मुक्त होना । हमारी जो वर्तमान में धारणा है कि बाध्य उपकरणों से सफलता प्राप्त हो जाती है तो यह गलत है । यदि हम अपने आप में परिवर्तन कर लें तो हमारी विजय अवश्य होगी । हम अवश्य सफल होंगे ।

प्रश्न 2. ‘ सफलता ‘ और ‘ चरितार्थता ‘ शब्दों में लेखक अर्व की भिन्नता किस प्रकार प्रतिपादित करता है ?

उत्तर – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने इस ललित निबंध में सफलता और चरितार्थता को प्रतिवादित करते हुए लिखते हैं कि ‘ सफलता ‘ मारक अस्त्रों के संचयन से बाह्य उपकरणों के प्राचुर्य से प्राप्त की जाती है । यह आडंबर मात्र । लेकिन , मनुष्य की चरितार्थता – प्रेम में , मैत्री में , त्याग में तथा अपने को सबके मंगल के लिए नि : शेष भाव से दे देने में है । नाखूनों का बढ़ना मनुष्य की सहजातवृत्ति का परिणाम है जो जीवन में सफलता ले आना चाहती है । उसको काट देना उस ” स्व ” निर्धारित आत्मबंधन का परिणाम है जो मनुष्य को ” चरितार्यवा ” की ओर ले जाना चाहती है । इस प्रकार लेखक ने सफलता और चरितार्थता को दो अलग – अलग ध्रुव के रूप में इंगित किया है ।

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