श्रम विभाजन और जाति प्रथा – Bihar Board Class 10th Hindi Solutions Chapter 1

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श्रम विभाजन और जाति प्रथा – Bihar Board Solutions Class 10th Hindi Chapter 1

Bihar Board Class 10th Hindi Objective Chapter 1 श्रम विभाजन और जाति प्रथा

” निबंध ‘ है

  1. श्रमविभाजन और जाति प्रथा
  2. नागरी लिपि
  3. परंपरा का मूल्यांकन
  4. उपर्युक्त सभी

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के विख्यात भाषण का संशोधित रूप है – ‘ श्रमविभाजन और जाति प्रथा ‘

( A ) ‘ द कास्ट इन इंडियाः देयर मैकेनिज्म

( B ) जेनेसिस एण्ड डेवलपमेंट

( C ) एनीहिलेशन ऑफ कास्ट

( D ) बुद्ध एण्ड हिज धम्मा

‘ एनीहिलेशन ऑफ कास्ट ‘ का हिंदी रूपांतरण किया

( A ) ललई सिंह यादव ने

( B ) रामविलास शर्मा ने

( C ) अज्ञेय ‘ ने

( D ) ‘ प्रेमचन्द ‘ ने

बाबा साहेब अंबेडकर का जन्म…… ई ० में हुआ

( A ) 14 अप्रैल 1881

( B ) 14 अप्रैल 1885

( C ) 14 अप्रैल 1886

( D ) 14 अप्रैल 1891

बाबा साहेब अंबेडकर का जन्म किस राज्य में हुआ ?

( A ) बिहार

( B ) मध्य प्रदेश

( C ) महाराष्ट्र

( D ) उत्तर प्रदेश

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के प्रेरक थे

( A ) बुद्ध

( B ) कबीर

( C ) ज्योतिबा फुले

( D ) उपर्युक्त सभी

‘ बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ‘ का निधन हुआ

( A ) दिसंबर 1956 ई ० में

( B ) दिसंबर 1957 ई . में

( C ) दिसंबर 1958 ई ० में

( D ) दिसंबर 1959 ई ० में

‘ द राइज एण्ड फॉल ऑफ द हिन्दू वीमेन ‘ के लेखक हैं

( A ) रामविलास शर्मा

( B ) राम इकबाल सिंह राकेश

( C ) गुणाकर मुले

( D ) बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर

‘ श्रम विभाजन और जाति प्रथा ‘ पाठ के केन्द्र में है

( A ) बाल विवाह

( B ) दहेज प्रथा

( C ) जाति प्रथा

( D ) विधवा विवाह

” लोकतंत्र मूलतः सामूहिक जीवन चर्चा की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान – प्रदान का नाम है । ” यह पंक्ति … पाठ से उद्धृत है

( A ) शिक्षा और संस्कृति

( B ) परंपरा का मूल्यांकन

( C ) नागरी लिपि

( D ) श्रम विभाजन और जाति प्रथा

” हम व्यक्तियों की क्षमता इस सीमा तक विकसित करें जिससे वह अपनी पेशा का चुनाव स्वयं कर सके । ” उक्त पंक्ति के लेखक है

( A ) बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर

( B ) गुणाकार मुले

( C ) हजारी प्रसाद द्विवेदी

( D ) प्रेमचन्द

भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण है

( A ) जाति प्रथा

( B ) अशिक्षा

( C ) धर्म

( D ) A एवम B

…. की दृष्टि से भी जाति प्रथा गंभीर दोषों से युक्त है

( A ) क्षेत्रवाद

( B ) परंपरा

( C ) श्रम विभाजन

( D ) उपर्युक्त सभी भी थे

‘ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ‘ एक …….भी थे ।

( A ) गायक

( B ) अभिनेता

( C ) संगीतकार

( D ) वकील

 ‘ पेशा बदलने की स्वतंत्रता न हो तो इसके लिए भूखों मरने के अलावा क्या चारा रह जाता है? ” उक्त पंक्ति किस पाठ से ली गई

( A ) श्रम विभाजन और जाति प्रथा

( B ) बहादुर

( C ) शिक्षा और संस्कृति

( D ) आविन्यों

परीक्षार्थियों के लिए निर्देश : -पाठ्य पुस्तकों से आठ लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएँगे जिनमें से पाँच प्रश्नों का उत्तर लिखना अनिवार्य होगा । प्रत्येक प्रश्न दो अंकों का होगा । शब्द सीमा 30-40 रहेगी ।

प्रश्न 1. लेखक किस विडंबना की बात करते हैं ? विडंबना का स्वरूप क्या है ?

उत्तर-लेखक आधुनिक भारतीय समाज की नींव को दीमक की तरह चाट रही जातिप्रथा की बात करते हैं जो हमारे राष्ट्र की उन्नति की सबसे बड़ी बाधा और विडंबना है । हमारे राष्ट्र की विडंबना का सबसे बड़ा स्वरूप है जाति – प्रथा ।

प्रश्न 2. जातिवाद के पोषक उसके पक्ष में क्या तर्क देते हैं ?

उत्तर-जातिवाद के पोषकों का उसके पक्ष में तर्क है कि आधुनिक सभ्य समाज कार्य कुशलता के लिए श्रम विभाजन आवश्यक मानता है । इसमें कोई बुराई नहीं है कि जाति – प्रथा श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है।

प्रश्न 3. जातिवाद के पक्ष में दिए गए तर्कों पर लेखक की प्रमुख आपत्तियाँ क्या है ?

उत्तर-जातिवाद के पक्ष में दिए गए तर्कों के विरुद्ध लेखक डॉ ० भीमराव अंबेडकर आपत्ति दर्ज करते हुए लिखते हैं कि- ” यह श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन ही नहीं करती बल्कि विभाजित वर्गों को एक दूसरे की अपेक्षा ऊँच – नीच भी करार देती है , जो कि विश्व के किसी भी समाज में नहीं पाया जाता है ।

प्रश्न 4. जाति भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती ?

उत्तर-भारतीय समाज में जाति – प्रथा किसी कोढ़ से कम नहीं । जाति आधरित श्रम विभाजन श्रमिकों की रुचि अथवा कार्य कुशलता के आधार पर नहीं होता बल्कि जन्मपूर्व ही श्रम विभाजन कर दिया जाता है जो अकुशलता विवशता और अरुचिपूर्ण होने के कारण गरीबी और अकर्मण्यता को बढ़ावा देता है ।

प्रश्न 5. जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है ?

उत्तर-भारतीय समाज में जाति आधारित श्रम – विभाजन है , जो भारत में बेरोजगारी का बड़ा कारण है । श्रमिक की रुचि – अरुचि का इस व्यवस्था में कोई महत्त्व नहीं रह जाता । श्रमिक में किसी कार्य के प्रति अरुचि हो तो वह उस कार्य को पूर्ण मनोयोग से नहीं कर सकता । इस स्थिति में वह बेरोजगार हो जाएगा और समाज में बेरोजगारी दिन – प्रतिदिन बढ़ती चली जाएगी ।

प्रश्न 6. लेखक आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या किसे मानता है और क्यों?

उत्तर-लेखक आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या यह मानता है कि- “ बहुत से लोग ‘ निर्धारित ‘ कार्य को ‘ अरुचि ‘ के साथ केवल विवशतावश करते हैं । क्योंकि ऐसी स्थिति स्वभावतः मनुष्य को दुर्भावना से ग्रस्त रहकर टालु काम करने और कम काम करने के लिए प्रेरित करती है । “फलतः यह गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या है ।

प्रश्न 7. लेखक ने पाठ में किन प्रमुख पहलुओं से जाति – प्रथा को एक हानिकारक प्रथा के रूप में दिखलाया है ?

उत्तर -लेखक विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए जाति – प्रथा को एक हानिकारक प्रथा के रूप में चित्रित किया है । उदाहरणतः जाति प्रथा समाज को विभिन्न स्तरों पर विभाजित करती है , बेरोजगारी बढ़ाती है , ऊँच – नीच के भाव पैदा होते हैं , व्यक्तिगत क्षमता प्रभावित होती है , साथ ही आचरण के प्रतिकूल पेशे से आजीवन यह बांध देती है ।

प्रश्न 8. सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए लेखक ने किन विशेषताओं को आवश्यक माना है ?

उत्तर -डॉ ० भीमराव अंबेडकर के अनुसार सच्चे लोकतंत्र के लिए जातिविहीन , समतामूलक समाज की स्थापना पर बल देना चाहिए । शिक्षा का प्रसार , सबमें भाईचारा आदि की भावना सच्चे लोकतंत्र के लिए आवश्यक शर्त है क्योंकि लोकतंत्र सिर्फ शासन पद्धति नहीं है , बल्कि सामूहिक जीवनचर्या की एक पद्धति है । अतः आवश्यक है कि सबमें एक – दूसरे के प्रति सम्मान हो ।

परीक्षार्थियों के लिए निर्देश : -परीक्षा में दो दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएँगे जिनमें से किसी एक प्रश्न का उत्तर 50-60 शब्दों में लिखना होगा । यह प्रश्न 5 नंबर का होगा ।

प्रश्न 1. जाति प्रथा पर लेखक के विचारों की तुलना महात्मा गांधी ज्योतिबा फूले और डा ० राममनोहर लोहिया के विचारों से करें ।

उत्तर -जाति – प्रथा पर लेखक डा ० भीमराव अंबेडकर के विचार उल्लेखनीय है । लेखक ने जाति – प्रथा को देश की प्रगति के मार्ग का सबसे बड़ा रोड़ा बतलाया है । जातिवाद ने ही लोगों को विभिन्न स्तरों पर बाँट रखा है । इससे प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से देश कमजोर हो रहा है क्योंकि भारतीय समाज मे जाति – प्रथा के आधार पर ही श्रम विभाजन होता है जो लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल है । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी जाति प्रथा के विरुद्ध आंदोलन चलाया । अछूतोद्धार का संकल्प लिया और आजीवन उसे दूर करने का प्रयास किया । ज्योतिबा फुले और डा ० राम मनोहर लोहिया ने भी जातिवाद की विभीषिका से समाज को अवगत कराया कि किस प्रकार इससे देश कमजोर व समाज बंटता है । सभी के विचारों की तुलना करने पर यही निष्कर्ष निकलता है कि जातिवाद किसी भी समाज व राष्ट्र के लिए मीठा जहर है ।

प्रश्न 2. डा ० भीमराव अंबेडकर के अनुसार सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए क्या आवश्यक है ?

उत्तर -सच्चे लोकतंत्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए डा ० भीमराव अंबेडकर लिखते हैं कि- ” लोकतंत्र सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान – प्रदान का नाम है । इसमें यह आवश्यक है कि अपने साथियों के प्रति श्रद्धा व सम्मान का भाव हो । “एक दूसरे के प्रति सम्मान व आदर के भाव से ही समाज व राष्ट्र में समरसता आती है जिससे लोकतंत्र मजबूत बनता है । कोई भी राष्ट्र तब तक मजबूत और समृद्ध नहीं बन सकता जब तक वहाँ के नागरिकों में मेल – मिलाप और भाईचारे का भाव न हो । यह सब तभी संभव है जब जातिवाद को जड़ से समाप्त किया जाएगा।

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