बिहार का प्राचीन इतिहास – Bihar History In Hindi

Bihar History In Hindi प्रागैतिहासिक कालीन बिहार बिहार के दक्षिणी भाग में आदिमानव के निवास के साक्ष्य मिले हैं ।

Bihar History In Hindi बिहार का प्राचीन इतिहास

👉सबसे पुराने अवशेष आरंभिक पूर्व प्रस्तर युग के हैं जो अनुमानतः 1,00,000 ई ० पू ० काल के हैं । इनमें पत्थर की कुल्हाड़ियों के फल , चाकू और खुरपी के रूप में प्रयोग किये जाने वाले पत्थर के टुकड़े हैं ।

👉 ऐसे अवशेष मुंगेर और नालन्दा जिलों में उत्खनन में प्राप्त हुए हैं । मध्य पाषाण युग के अवशेष मुंगेर में मिले हैं । यहीं से परवर्ती पाषाण युग के अवशेष भी मिले हैं जो पत्थर के छोटे टुकड़ों से बने हैं ।

👉मध्य पाषाण युग ( 9000 से 4000 ई ० पू ० ) के अवशेष सिंहभूम , रांची , पलामू , धनबाद और संथाल परगना , जो अब झारखंड में हैं , से प्राप्त हुए हैं । ये छोटे आकार के पत्थर के बने सामान हैं जिनमें तेज धार और नोक है ।

👉नव पाषाण युग के अवशेष उत्तर बिहार में चिरांद ( सारण जिला ) और चेचर ( वैशाली जिला ) से प्राप्त हुए हैं । इनका काल सामान्यतः 2500 ई ० पू ० से 1500 ई ० पू ० के मध्य निर्धारित किया गया है । इनमें न केवल पत्थर के अत्यन्त सूक्ष्म औजार प्राप्त हुए हैं , बल्कि हड्डी के बने सामान भी मिले हैं ।

👉ताम्र पाषाण युग में पश्चिम भारत में सिंध और पंजाब में हड़प्पा संस्कृति का विकास हुआ । बिहार में इस युग के परवर्ती चरण के जो अवशेष चिरांद ( सारण ) , चेचर ( वैशाली ) , सोनपुर ( गया ) , मनेर ( पटना ) से प्राप्त हुए हैं उनसे आदिमानव के जीवन के साक्ष्य और उसमें आनेवाले क्रमिक परिवर्तनों के संकेत मिलते हैं |

👉उत्खनन में प्राप्त मृभांड और मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े भी तत्कालीन भौतिक संस्कृति पर प्रकाश डालने में सहायक सिद्ध हुए हैं । ऐतिहासिक काल में बिहार उत्तर वैदिक काल ( 1000-600 ई ० पू ० ) में आर्यों का प्रसार पूर्वी भारत में आरंभ हुआ ।

👉लोहे का उपयोग भारत में 1000 से 800 ई ० पू ० के मध्य आरंभ हुआ । लगभग इसी समय आर्यों का बिहार में विस्तार भी आरंभ हुआ । 800 ई ० पू ० के आस पास रची गयी ‘ शतपथ ब्राह्मण ‘ में गांगेय घाटी के क्षेत्र ( बिहार का क्षेत्र भी इसमें शामिल था ) में आर्यों द्वारा जंगलों को जलाकर और काटकर साफ करने की चर्चा मिलती है । छठी शताब्दी ई ० पू ० में उत्तर भारत में विशाल , संगठित राज्यों का अभ्युदय हुआ ।

👉जिन सोलह महाजनपदों और लगभग दस गणराज्यों की चर्चा इस काल में बौद्ध ग्रंथों में मिलती है , उनमें से तीन महाजनपद – अंग , मगध और लिच्छवि गणराज्य बिहार के क्षेत्र में स्थित थे । इनके संबंध में विस्तृत जानकारी अंगुत्तर निकाय में मिलती है ।

👉 प्रो ० आर ० डेविस की पुस्तक ‘ बुद्धिस्ट इंडिया ‘ के अनुसार 16 महाजनपद थे —1 . काशी , 2 . कौशल , 3. अंग , 4. मगध , 5. वज्जि , 6. मल्ल , 7. चेदि , 8. वत्स , 9. कुरु , 10. पांचाल , 11 . मत्स्य , 12. सुरसेन , 13. अस्सक ( अश्मक ) , 14. अवन्ति , 15. गांधार और 16. कंबोज ।

👉महाजनपदों में से तीन – दग्जि लिच्छवी गणराज्य ) . मगध और अंग विहार के क्षेत्र में थे ।

👉आधुनिक उत्तर विकार को प्राचीन काल में वन्जि नाम से भी जाना जाता था । परिज महाजनपद आठ राज्यों का एक संघ या , जिसमें परिज के अतिरिक्त वैशाली के लिच्छवी , मिथिला के विदेह तथा कुङग्राम के ज्ञातृक विशेष रूप से विख्यात थे । पैशाली उत्तरी बिहार के वर्तमान वैशाली जिले में स्थित आधुनिक वसाह

👉मिथिला की पहचान नेपाल की सीमा में स्थित हनकपुर धाम नामक नगर से की जाती है । यहाँ पहले राजतंत्र या परंतु बाद में गणतंत्र स्थापित हो गया । अन्य चार राज्यों में संभवतः उपप , भोग , इश्याकु तथा औरय थे । जैन साहित्य में ज्ञातृ को के साथ इनका उल्लेख हुआ है । साथ ही इनें एक ही संस्थागार का सदस्य कहा गया है ।

👉बुद्ध के काल में यह आठ जनों ( अकुल ) का एक शक्तिशाली संघ या । बजि संघ में 8 जातियां थीं जिनमें विदेड , लिच्छवि , मातृक और यजि प्रसिद्ध थी । इनमें उप , भोग , कौरव और इश्याकु भी थे । लिच्छवी शप्रिय थे । संभवतः वे आर्यों से अलग किसी अन्य जाति से संबंध रखते थे । मिथिला के विदेह वरिज संघ में सदस्य थे । किसी समय विदेह में पैशाली भी शामिल था । –

👉वैशाली के कुंडग्राम की ज्ञातृक जाति के लोग भी संघ के सदस्य थे । 24 वें तीर्थंकर महावीर जैन शातक ही थे । हात्विग्राम के उन जाति भी संघ के सदस्य थे ।

👉भोगनगर की जाति भोग , अयोध्या या विदेश से आकर इक्याकु जाति तथा हस्तिनापुर से आपी कौरव जाति के लोग संघ के सदस्य बने थे ।

👉 परिज संघ के प्रधान एवं लिच्छवी सरदार चेतक या चेटक की बेटी का विचार मातृक कुल में हुआ था , जहां महावीर पैदा हुए ।

👉 चेटक की पुत्री देल्हना का विवाह मगध नरेश विविसार के साथ हुआ ।

👉वैशाली में प्रसिद्ध नर्तकी ‘ आम्रपाली ‘ थी , जो ‘ वैशाली की नगरप । प ‘ के पद पर आसीन हुई यी । आम्रपाली का कथित संबंध तत्कालीन मगध नरेश अजातशत्रु के साथ था ।

👉अपने प्रवास के दौरान भगवान बुद्ध ने आम्रपाली के निवास पर भोजन किया था । आम्रपाली ने बौद्ध संघ को एक उधान समर्पित किया था ।

👉मगध सम्राट अजातशत्रु ने वरित संघ में फूट इतबाई और उस पर आक्रमण करके परिज संघ को पराजित कर दिया तथा मगध साम्राज्य की सीमा का विस्तार किया ।

👉वैशाली नगर के संस्थापक विशाल के पैशात या वैशालिका राजवंश का प्रारंभ मनु के पुत्र नमनेदिष्ट से होता है ।

👉इस ( वैशाली ) राजवंश का उल्लेख मूलतः विष्णुपुराण , गरुडपुराण , वायुपुराण एवं भागवत पुराण के अलावा कुछ अन्य खोतों में भी मिलता है । इस राजवंश में कुल 33 शासक हुए जिनमें मनु – पुत्र नमनेदिष्ट प्रथम राजा थे ।

👉वैशाली नगर की स्थापना करने वाले विशाल इस राजवंश के 24 वें राजा थे , जबकि सुमति या प्रमति इस राजवंश के आखिरी राजा हुए ।

👉महात्मा गौतम बुद्ध के समय में उत्तर भारत की राजनीति में चार शक्तिशाली राजतंत्रों ( कोशल , वत्स , अयन्ति एवं मगध ) का वर्चस्व था , जिनमें एक मगध था ।

👉मगध का सर्वप्रथम उल्लेख अथर्ववेद में मिलता है । मगध महाजनपद में वर्तमान पटना और गया जिले शामिल थे ।

👉मगध महाजनपद की सीमा उत्तर में गंगा से दक्षिण में विन्ध्य पर्वत तक तथा पूर्व में चंपा से पश्चिम में सोन नदी तक विस्तृत थी ।

👉नगर के चारों ओर पत्थर की सुदृढ़ प्राचीर बनवायी गयी थी । मगध की प्राचीन राजधानी राजगृह या गिरिव्रज थी । यह 5 पहाड़ियों के बीच में स्थित कालांतर में मगध की राजधानी पाटलिपुत्र में स्थापित हुई ।

👉 मगध राज्य ने समकालीन शक्तिशाली राजतंत्रों ने कोशल , वत्स व अवंति को अपने राज्य में मिला लिया और मगध का शासन –

👉क्षेत्र पूरे देश में विस्तृत हो गया । मगध साम्राज्य के गौरव का वास्तविक संस्थापक बिम्बिसार या । वह महात्मा बुद्ध का मित्र एवं संरक्षक था ।

👉बिंबिसार एक महान विजेता था । उसने अपने पड़ोसी राज्य अंग पर आक्र मण कर उसे जीता तथा अपने साम्राज्य में मिला लिया ।

👉बिम्बिसार वृद्धावस्था में अपने पुत्र अजातशत्रु द्वारा मारा गया । अजातशत्रु घोर साम्राज्यवादी या । उसने वज्जि संघ को परास्त कर उसका राज्य मगध में मिला लिया । इसके पश्चात् उसने मल्लों के संघ को भी विजित किया । अभिज्ञान चिंतामणि के अनुसार कीकट और मगध समानार्थी हैं ।

👉मगध तथा अंग एक – दूसरे के पड़ोसी महाजनपद थे तथा दोनों को पृथक करती हुई चंपा नदी बहती थी । अंग का प्रथम उल्लेख अथर्ववेद में मिलता है । –

👉अंग महाजनपद उत्तरी बिहार के भागलपुर तथा मुंगेर जिले वाले क्षेत्र में स्थित था । इस राज्य की स्थापना अंग नामक राजकुमार ने की थी । इसकी राजधानी चंपा वर्तमान भागलपुर के निकट स्थित थी ।

👉 महाभारत तथा पुराणों में चंपा के प्राचीन नाम मालिनी का उल्लेख मिलता है । दीघनिकाय के अनुसार इस नगर के निर्माण की योजना विख्यात वास्तुकार महागोपिंद ने प्रस्तुत की थी ।

👉प्राचीन काल में चंपानगरी अपने वैभव और व्यापार के लिए विख्यात थी ।

👉 नसांग ने इस स्थान ( चंपा ) को ‘ चेनन्पो ‘ कहा है । तितुक्षी अंग का पहला आर्य राजा था । यहां कुल 25 राजा हुए ।

👉अंग के तीन अंतिम राजाओं में प्रथम दधिवाहन ये जिनकी पुत्री चंदना महावीर के जैन धर्म को स्वीकार करने वाली प्रथम महिला थी । वत्स राजा ने चंपा पर आक्रमण किया ।

👉अंग के दूसरे राजा द्रधवर्मन ने अपनी पुत्री का विवाह उदयन के साथ किया । अंग का पड़ोसी राज्य मगध था । जिस तरह काशी तथा कोशल में सत्ता के लिए संघर्ष चल रहा था उसी प्रकार अंग तथा मगध के बीच भी दीर्घकालीन संपर्ष चला ।

👉अंग के शासक ब्रह्मदत्त ने मगध के राजा भट्टिय को पहले पराजित कर मगध राज्य के कुछ भाग को जीत लिया । लेकिन बाद में अंग का राज्य मगध में मिला लिया गया ।

👉ब्रह्मदत्त इस वंश का अंतिम शासक या जिसे हराकर बिम्बिसार ने अंग पर अधिकार कर लिया ।

👉अंग के प्रमुख शहर चंपा . अस्सरपुर , आषण एवं भठिय थे । महापरिनिर्वाण सूत्र में चंपा के अलावा अन्य पांच महानगरियों के नाम – राजगृह , श्रावस्ती , साकेत , कौशाम्बी और बनारस दिये गये हैं ।

👉 बुद्धकाल में गंगा घाटी में लगभग 10 गणराज्य थे । इनमें अलकप्प के बुली , वैशाली के लिच्छवी और मिथिला के विदेह बिहार के अंतर्गत आते हैं ।

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