दीपावली पर निबंध | Deepawali Par Nibandh | Deepawali Essay In Hindi


दीपावली पर निबंध | Deepawali Par Nibandh | 400 word


दीपावली का शाब्दिक अर्थ होता है- दीपों की पंक्ति । इस त्योहार में लोग दीपों को पंक्तिबद्ध रूप में अपने घर में अन्दर एवं बाहर सजाते हैं ।

इस तरह , यह प्रकाश का त्योहार है । यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाय जाता है । इस दिन लोग गणेश – लक्ष्मी का पूजन करते हैं , जिन्हें पौराणिक कथा के अनुसार धन , समृद्धि , विघ्नहरण ए ऐश्वर्य का भगवान माना जाता है ।

दीपावली से एक दिन पहले का दिन ‘ धन त्रयोदशी ‘ या ‘ धनतेरस ‘ अतिशुभ माना जात है ।

इस दिन लोग सोना – चाँदी एवं बर्तन खरीदते हैं । धनतेरस मनाने के पीछे का पौराणिक कारण इस प्रकार है – कहा जात है कि समुद्र मन्थन के पश्चात् लक्ष्मी की उत्पत्ति इसी दिन हुई थी इसलिए इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है ।

समु मन्थन से ही धनवन्तरि , जिन्हें औषध विज्ञान का प्रणेता माना जाता है , की उत्पत्ति कार्तिक मास की त्रयोदशी को हुई थी इसलिए इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है । श्रीरामचन्द्र जी जब रावण का वध एवं चौदह वर्ष का वनवास व्यतीत करके अयोध्या वापस लौटे , तो अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में अपने घर एवं नगर को घी के दीपों से जगमगा दिया था ।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने गीतावली ‘ में इसका रमणीय वर्णन किया है पश्चिम बंगाल में लोग दीपावली को काली पूजा के रूप में मनाते हैं । वहाँ बड़े – बड़े एवं भव्य पण्डालों के भीतर माँ काली की प्रतिमा प्रतिस्थापित की जाती है ।

काली पूजा के बाद वहाँ लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है । दीपावली का अपना धार्मिक , सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व है , किन्तु आज इस त्योहार में कई प्रकार की बुराइयाँ भी समाहित हो गई हैं । इस त्योहार के नाम पर लोग अपनी हैसियत का प्रदर्शन करते हुए हजारों रुपये यूँ ही पटाखों में उड़ा देते हैं । अत्यधिक पटाखे जलाना जिस डाल पर बैठे , उसी डाल को काटने जैसा है ।

जिस शुद्ध हवा में हम साँस लेते हैं , उसी को पटाखों से हम अशुद्ध करते हैं , यह कितनी अज्ञानता है ! जुआ खेलन इस त्योहार की सबसे बड़ी बुराई है , यदि जुआ नहीं खेला जाए तथा पटाखे न जलाए जाएँ , तो यह त्योहार अन्धकार प प्रकाश की विजय के अपने सन्देश को सार्थक करता नज़र आएगा ।

आज इन बुराइयों को दूर कर इस त्योहार के उद्देश्य को सार्थक करने की आवश्यकता है ।


दीपावली पर निबंध | Deepawali Par Nibandh Short


दीपावली पर निबंध : यदि होली रंगों का पर्व है तो दीपावली ‘ दीपों ‘ का । इस पर्व को लक्ष्मीपूजा भी कहते हैं । दीपावली का दीप अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है । कहा गया है दीपावली ‘ असतो मा सद्गमय , तमसो मा ज्योतिर्गमय ‘ का संदेश देता है । कार्तिक मास की अमावस्या को यह त्योहार मनाया जाता है । इस त्योहार के सम्बन्ध में किंवदन्तियां प्रचलित हैं । कहा जाता है कि इस दिन भगवान पुरुषोत्तम राम ने लंकापति रावण का संहार करके अयोध्या आए थे ।

इसी के उपलक्ष्य में अयोध्यावासियों ने इस दिन को अविस्मरणीय बनाने के लिए दीप जलाकर उत्सव मनाया था । इसके बाद से ही दीपावली की परम्परा शुरू हो गई । दूसरी किंवदन्ती यह प्रचलित है कि भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर जैसे आततायी का वध इसी दिन किया था । इसीसे वहाँ के निवासियों ने उस दिन की खुशी में दीप जलाकर उत्सव मनाया था ।

दीपावली पर्व के साथ जैनों , सिक्खों तथा अयोध्यावासियों का गहरा रिश्ता है । भगवान महावीर , बुद्ध , नानक , स्वामी रामतीर्थ ने संसार से नाता इसी दिन तोड़ा था । अमृतसर और लखनऊ की दीपावली जग जाहिर है । यदि ज्योति के निर्झर को देखना है तो दीपावली के दिन इसे देखा जा सकता है । इसी दिन भ्रमण करते हुए लक्ष्मी जिस भी स्थान को स्वच्छ , सुन्दर व आकर्षक देखती हैं तो वहीं निवास करने लगती हैं । व्यापारी इस दिन बड़ी धूमधाम से अर्थ एवं अराधाना की देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं । साथ ही बुद्धि प्राप्त करने के लिए गणेश की भी पूजा करते हैं ।

इस दिन जमकर आतिशबाजी और मिठाइयों का आदान – प्रदान उपहार स्वरूप किया जाता है । यह त्योहार भाई – चारे , एकता और प्रेम का संदेश देता है ।

आओ दीप जलाएं इतना , धरा का अंधेरा मिट जाए जितना ।

इस तरह दीपावली हमारे कर्मठता और जागरूकता का संदेश लेकर आती है । यह पर्व भीतर और बाहर के अंधकार को समूल नाश कर देती है ।

दीपावली पर निबंध | Deepawali Par Nibandh | Deepawali Essay In Hindi

Deepawali Essay In Hindi long


विचार बिंदु : 1.भूमिका 2.दीपावली कब और क्यों मनाते हैं। 3.दीपावली कब और कैसे मनाया जाता है 4.पर्व मनाने के पीछे की कथाएँ एवं मान्यताएँ 4.इससे लाभ 5.पटाखों से हानि 6.उपसंहार

भूमिका

दीपावली पर निबंध : हमारे देश में प्रतिवर्ष अनेक त्योहार मनाए जाते हैं । इन त्योहारों में ईद , दीपावली , रक्षाबंधन , ओणम , विजयादशमी प्रमुख है । इन त्योहारों को भारत को अनेक जातियाँ बड़ी धूम – धाम से मनाती हैं । इन त्योहारों में दीपावली प्रमुख है । यह त्योहार हिन्दुओं का प्रसिद्ध त्योहार है ।

दीपावली कब और क्यों मनाते हैं

दीपावली का पर्व कार्तिक माह में अमावस्या के दिन मनाया जाता है । शरद ऋतु में आरंभ होने के कारण मौसम अत्यंत सुहावना होता है । वातावरण में चारों ओर उल्लास और आनन्द दिखाई देता है । दीपावली का उत्सव मनाए जाने के कई कारण हैं । कुछ लोगों का कहना है कि इसी दिन श्रीराम रावण का संहार कर तथा लंका को जीतकर अयोध्या लौटे थे ।

अयोध्यावासियों ने श्रीराम के लौटने पर सम्पूर्ण अयोध्या नगरी को दीपमालाओं से प्रकाशित करके अपनी प्रसन्नता को व्यक्त किया । तभी से प्रतिवर्ष यह त्योहार मनाया जाता है । जैन धर्म के अनुयायी भी दीपावली को एक पवित्र उत्सव मानते हैं । उनके मतानुसार भगवान महावीर ने इसी तिथि को निर्वाण प्राप्त किया था और देवलोक वासियों ने उनके स्वागत में दीप जलाए थे । इसी दिन श्रीकृष्ण ने इन्द्र के कोप में जल से डूबते हुए ब्रज को बचाया ।

दीपावली कब और कैसे मनाया जाता है

यह पर्व प्रति वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को देश के कोने – कोने में बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाता है । लोग अपने घरों , दूकानों की सफेदी कराते हैं , रंग – रोगन कराते हैं तथा चित्र आदि से सजाते हैं । दीपावली के दिन घरों में सुन्दर – सुन्दर पकवान बनाये जाते हैं । लोग अपने घरों , दीवारों तथा द्वारों पर दीप जलाते हैं , परन्तु अब दीपों का स्थान बिजली के बल्बों ने ले लिया है ।

नगर में चारों ओर ऊँची – ऊँची अट्टालिकाओं पर जलती दीप मालाएँ ऐसे सुशोभित होती हैं जैसे स्वर्गलोक की देवांगनाएँ पृथ्वी का अभिनंदन करने के लिए मंगल – कलश के साथ उतर आई हों । लोग इसी दिन रात को लक्ष्मी पूजन भी करते हैं । वे पटाखे छोड़ते हैं , फुलझड़ियाँ जलाते तथा अनेक प्रकार की आतिशबाजी का आनन्द लेते हैं ।

पर्व मनाने के पीछे की कथाएँ एवं मान्यताएँ

दीपावली मनाने के सम्बन्ध में अनेक कथाएँ एवं मान्यताएँ प्रचलित हैं । कहते हैं इस दिन भगवान् श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या वापस आये थे । वहाँ की जनता ने इस खुशी में दीपक जलाए । आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती और जैन ध म के प्रवर्तक महावीर स्वामी को आज के दिन ही मोक्ष प्राप्त हुआ था । सिक्खों के छठे गुरु गोविन्द सिंह ने भी इसी दिन जेल से छुटकारा पाया था । कुछ लोगों का कहना है कि इस दिन श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस को मारा था ।

इससे लाभ

उपर्युक्त प्रचलित धार्मिक कारणों के अतिरिक्त दीपावली उत्सव का एक अन्य महत्त्व यह है कि वर्षा के कारण गंदे हुए मकानों की सफाई आदि के लिए भी यह मौसम उपयुक्त है । खरीफ की फसल भी इन्हीं दिनों घर में आती है । यह नया अन्न , वैभव का प्रतीक होता है । इसलिए धान से ही लक्ष्मी – पूजन किया – जाता है । इससे हानि इस अवसर पर बहुत लोग जूआ में बहुत रुपये हार जाते हैं । आतिशबाजी से कुछ लोग घायल हो जाते हैं ।

पटाखों से हानि

दीपावली के दिन लोग आतिशबाजी करते हैं । इससे पर्यावरण में वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ जाता है । कई बार थोड़ी – सी असावधानी के कारण बहुत बड़ी दुर्घटना हो जाती है । इसलिए आतिशबाजी का प्रयोग यदि न किया जाए तो अच्छा है ।

उपसंहार – दीपावली हमें याद दिलाती है कि बुराई पर अच्छाई की विजय होती है


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