What Is God Particle In Hindi – गॉड पार्टिकल क्या है ?

What Is God Particle In Hindi नमस्कार दोस्तों , और आज मैं आपको God particle के खोज और उसके बारें में कुछ जानकारी आपसे आज के इस article के through ,share कर रहा हूँ, दोस्तों जैसा कि आपने परमाणु के बारें में तो सुना ही होगा ,कि यह पदार्थ का सबसे छोटा कण होता हैं ,वैसे ही बोसॉन यानि कि God particle परमाणु में सबसे छोटे कण होते हैं ,

What Is God Particle In Hindi – गॉड पार्टिकल क्या है ?

What Is God Particle In Hindi विज्ञान अपने अनुसंधानों में सतत प्रयत्नशील रहता है । उसी क्रम में करीब 60 वर्षों से किसी वस्तु में भार होने की वजह जानने की वैज्ञानिक खोज अब अपने मुकाम पर पहुँचती दिख रही है ।

सर्न ( यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च , जिनेवा ) में वैज्ञानिकों का यह दावा कि महाप्रयोग के दौरान उन्हें हिग्स वोसोन या गॉड पार्टिकल से मिलते – जुलते – सब – एटॉमिक कण दिखे हैं ; एक बड़ी उपलब्धि है । इससे उन सवालों के जवाब ढूँढ़ना आसान होगा , जो अब तक अनसुलझे हैं ।

खासकर ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़ा प्रश्न , जिसका वैज्ञानिक उत्तर अब तक नहीं ढूँढ़ा जा सका है । सर्न के वैज्ञानिकों का कहना है कि नया कण 4.9 सिग्मा ( मानक विचलन ) के स्तर के आस – पास का है ; जबकि किसी भी नए कण की खोज के लिए 5 सिग्मा का पैमाना पार करना आवश्यक होता है । इसीलिए यह उम्मीद है कि आवश्यक 5 सिग्मा का स्तर पार कर लिया जाएगा ।

अभी एक कण के आकार की झलक मिली है , पर तकनीकी रूप से उसकी प्रामाणिकता साबित नहीं हुई है ।

इस निष्कर्ष को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि विज्ञान अब ईश्वर के करीब पहुँच गया है । यह एक गलतफहमी है , जो इसके नाम की वजह से उत्पन्न हुई है ।

भौतिकी का एक स्टैंडर्ड मॉडल है , जिसमें यह माना जाता है कि ब्रह्मांड 12 मौलिक कणों ( फंडामेंटल पार्टिकल्स ) और चार मौलिक बलों ( फंडामेंटल फोर्सेस ) से बना है ।

सन् 1964 में एक और कण होने की उम्मीद हिग्स , ब्राउट और इनग्रेल्ट नामक वैज्ञानिकों ने जताई थी । सर्न का यह प्रयोग उसी कण की वास्तविकता जानने के लिए किया जा रहा है । चूंकि एक रोचक घटना के बाद इस कण को ‘ God Particle ‘ कहा जाने लगा , जिससे लोग भ्रमित हुए । किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयोग भी ईश्वर के अस्तित्व को आधार मानकर बढ़ रहे हैं ।

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यह घटना भी गुरुत्वाकर्षण की खोज करने जैसी ही है , जिसमें न्यूटन ने गिरते हुए सेब को देखकर एक ऐसे बल की खोज की , जिसे कोई देख नहीं सकता । हिग्स ने जिस कण की चर्चा की , वह भी अब तक हमारी आँखों से ओझल है । इसलिए लोगों ने उस ढाँचे में : ईश्वर को रखा और इस प्रयोग को ‘ भगवान की खोज ‘ का नाम दे दिया ।

प्रयोग का उद्देश्य क्या था ?

असल में यह प्रयोग ब्रह्मांड के संबंध में हमारी समझ विकसित करता है । यह बताता है कि आखिर ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई ? इस प्रयोग से अब हम बिग बैंग थ्योरी ( महाविस्फोट सिद्धांत ) को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे ।

अब तक माना जाता रहा है कि करीब 14 अरब साल पहले हुए महाविस्फोट ( बिग बैंग ) से ही ब्रह्मांड क्रमशः अस्तित्व में आया । इस तथ्य की पुष्टि के लिए सर्न में एक लार्ज हेड्रॉन कोलाइडर ( एलएचसी ) बनाकर उसमें कृत्रिम तरीके से महाविस्फोट की स्थिति पैदा की ।

एलएचसी में आयनों की टक्कर से उसके भीतर 10 खरब सेल्सियस का तापमान पैदा किया गया , जो सूर्य के केंद्र में मौजूद तापमान से लाखों गुना ज्यादा था । वजह साफ है कि वैज्ञानिक उस स्थिति की पुनरावृत्ति चाहते थे , जिसमें ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई होगी ।

हालाँकि अब यह भी कहा जा रहा है कि इस प्रयोग के आधार पर लाया गया नया निष्कर्ष संचार क्रांति में तेजी लाएगा , नैनो तकनीक में नई इबारत लिखेगा या फिर ऊर्जा का भंडार बढ़ाएगा , पर तत्काल ऐसा होता संभव नहीं दिख रहा ।

संभव है कि आने वाले वर्षों में इस खोज के आधार पर कई अन्य खोजें संभव हों , जिनका इस्तेमाल मानव जीवन को सुगम बनाने के लिए किया जाए । ठीक वैसे ही , : जैसे वर्ल्ड वाइड वेब ( डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू ) की शुरुआत हुई । उसे वैज्ञानिकों ने आपसी संवाद स्थापित करने अथवा जानकारी बाँटने के लिए शुरू किया था और आज यह पूरी दुनिया में इस्तेमाल हो रहा है ।

सत्येंद्र नाथ बोस के नाम पर पड़ा बोसोन पार्टिकल

दिलचस्प है कि उसकी बुनियाद भी सर्न में ही रखी गई थी । यह प्रयोग हम भारतीयों । के लिए गर्व का विषय होना चाहिए । इसके कई कारण हैं । . पहली और मुख्य वजह तो यही है कि यह खोज भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस के नाम से जुड़ी हुई है । . उनके नाम से ही वोसोन शब्द निकला है ।

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इसके अतिरिक्त करीब दस भारतीय संस्थान सर्न से जुड़े हैं । इस महाप्रयोग में इस्तेमाल लाखों इलेक्ट्रॉनिक चिप भी अपने ही देश से भेजे गए थे ।

लिहाजा भारत को इस परियोजना का ऐतिहासिक जनक अगर कहा जा रहा है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है ।

बहरहाल यह परियोजना हमारे धर्मग्रंथों की महत्ता भी स्थापित करती है , जिसमें ब्रह्मांड की उत्पत्ति की झलक मिलती है । शिव के तांडव नृत्य वाली प्रतिमा नटराज इसका स्पष्ट उदाहरण है ।

वजह है कि जब ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर शोध की दिशा में आगे बढ़ा गया , तो भारत सरकार ने नटराज की एक प्रतिमा सर्न को भेंट की थी , जिसे वहाँ : स्थापित किया गया है ।

आज जब सर्न के साथ भारत के दोतरफे रिश्ते मजबूत हुए हैं और दोनों एकदूसरे के वैज्ञानिक अनुसंधानों में खुले हृदय से मदद कर रहे हैं

तब यह उम्मीद बलवती होती है कि यह महाप्रयोग हमारे वैज्ञानिकों को और भी नए – नए अन्वेषणों के लिए प्रेरित करेगा । विज्ञान के नित नए आविष्कारों का लाभ मानवता को मिलना चाहिए ।


friends अभी तक साइंटिस्ट परमाणु की बनावट में न्यूक्लियस के अंदर प्रोटॉन तक पहुंच कर भी इसके रहस्य को भेद नहीं पाए हैं ,इसके बाद प्रोटोन की बनावट को समझने की प्रक्रिया में वैज्ञानिक को एक खास कण का आभास हुआ ,जिसे बोसॉन या God particle नाम दिया गया ,आज मैं इसी के बारें मैं  आपको बताने जा रहा हूँ।  God particle की खोज के बाद उसे बोसॉन पार्टिकल नाम दे दिया गया , दरअसल ग्रेट इंडियन साइंटिस्ट सत्येंद्र नाथ बोस के नाम को भौतिकी विज्ञानं में कभी न मिटने के लिए इसका नाम boson particle रख दिया ,

God Particle की खोज किसने की – पीटर हिग्स ने


आज मुझे आप लोगो से ये बात शेयर कर बहुत ख़ुशी मिल रही हैं ,कि आज मैं अपने देश के इस महान साइंटिस्ट के बारें में आपको बता रहा हूँ , फ्रेंड्स इसी महान साइंटिस्ट जिसका नाम सत्येंद्र नाथ बोस हैं ,इन्होने क्वांटम फिजिक्स यानि आधुनिक भौतिकी को एक नयी दिशा दी। 

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उनके कार्यो की सरहना महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने की। और उनके साथ मिलकर कई सिद्धांत प्रतिपादित किये क्वांटम फिजिक्स में उनके अनुसंधान ने इस subject को एक नया रास्ता दिखाया और उनके खोज पर आधारित कई वैज्ञानिको को आगे जाकर नोबेल पुरस्कार मिला। 


इंडियन साइंटिस्ट थे बोस


फ्रेंड्स सत्येंद्र नाथ बोस एक उत्कृस्ट indian साइंटिस्ट थे ,उन्होंने क्वांटम फिजिक्स में महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं ,क्वांटम फ़िज़िक्स में उनके अनुसन्धान ने bose -Einstein स्टैटिक्स और बोस आइंस्टीन कंडेंसटे थ्योरी की आधारशिला रखी। 


भौतिक विज्ञानं में दो प्रकार के अणु माने जातें हैं। — बोसॉन और फर्मियन ,बोसॉन नाम सत्येंद्र नाथ बोस के नाम पर इसका नाम बोसॉन नाम दिया गया। 

पीटर हिग्स को खोज के लिए मिला नोबेल अवार्ड


वर्ष 1965 में पीटर हिग्स ने हिग्स बोसॉन यानि god पार्टिकल का अपना आईडिया पेश किया ,जिसमे उन्होंने बताया कि God particle एक ऐसा कण हैं ,जो मैटर यानि पदार्थ को mass यानि द्रव्यमान प्रदान करता हैं ,उनकी थ्योरी में हिग्स बोसॉन एक ऐसा कण होता हैं ,जिसका एक फील्ड होता हैं । जो यूनिवर्स यानि ब्रहांड में हर जगह मौजूद हैं

जब कोई दूसरा कण इस फील्ड से गुजरता हैं तो उसे रुकावट का सामना करना पड़ता हैं ,जैसे कोई चीज पानी या हवा में जितना रेजिस्टेंस ,उतना ज्यादा मास ,स्टैण्डर्ड मॉडल हिग्स बोसॉन से मजबूत हो जाता हैं , लेकिन उसके होने के एक्सपेरिमेंटल proove चाहिए था ,बाद में हुए प्रयोगो के जरिये हिग्स ने इस कण को पाया।


पीटर हिग्स कौन हैं ?

पीटर हिग्स का जन्म 1929 में न्यूकासल में हुआ था ,जब हिग्स ब्रिस्टल में रहने लगा तो उन्होंने कई पुरस्कार जीते ,लंदन के किंग्स कॉलेज में भौतिक विज्ञानं की पढ़ाई की। वर्ष 1964 में गॉड पार्टिकल के सिद्धांत ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई दी ,वर्ष 1997 में उन्हें सिद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में शानदार योगदान के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया गया 


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