क्या है ?मोमबत्ती का इतिहास ,हिस्ट्री ऑफ़ कैंडल ,history of candle

मोमबत्ती के इतिहास

helo dosto , और आज मैं  इस article की help से आपको मोमबत्ती के इतिहास (history of candle) और इसके रोचकतथ्य(interesting fact) के बारें में बताऊंगा ,

dosto जब मोमबत्ती का invention हुआ था तब इसका उदेश्य केवल मोम को जलाकर रौशनी करना ही था ,उस समय मोमबतिया cylendrical shape में bnayi jati thi.

माना जाता हैं कि प्राचीन रोम  निवासियो ने ईसा से 500 साल पहले पारम्परिक मोमबत्तियों का निर्माण शुरू किया था। जिसके बाद इसे अलग-अलग तरीके से विकसित किया गया ,

aaj iska istemal decoration ke liye bhi kiya jane lga. साथ ही आजकल मोमबतिया कई तरह के कलर और शेप में मिलने लगी हैं जिनसे केवल घर को सजा नहीं सकते हैं ,balki roushan or sundar mahoul bna sake.

कैसे जलती हैं मोमबत्ती :

मोम hydrogen और carbon atom से बनी होती हैं ,इन मोम को पिघलाकर एक सांचे में ढाल लिया जाता हैं ,और बीचो बीच एक रस्सी डाल दिया जाता हैं जो उसके बत्ती का काम करता हैं। 


जब किसी मोमबत्ती को जलाया जाता हैं ,जब मोमबत्ती को जलाया जाता हैं ,तो इसके धागे के द्वारा मोम ऊपर की तरफ जाता हैं ,और आग की गर्मी से तुरंत गैस के रूप में आ जाता हैं ,यह क्रिया तब तक चलती हैं जब तक की मोम ख़त्म न हो जाये ,इसे सेल्फ ट्रिमिंग बत्ती भी कहा जाता हैं. 


मोमबत्ती की लौ ऊपर ही क्यों जाती हैं : 

मोमबत्ती का अंग्रेजी नाम candle . लैटिन शब्द के कंडेला और कैंडियर शब्द से निकल कर आया हैं,जिसका अर्थ हैं ,प्रकाश(light) और चमकना(bright)। मोमबत्ती से निकलने वाली लौ के पीछे बहुत सारी physics और chemistery छिपी हुई हैं। जिनपर आपने कभी ही गौर किया होगा। 


वर्ष 1990 में nasa ने भी मोमबत्ती से निकलनेवाली लौ के ऊपर काफी research किया था और इसके पीछे के विज्ञानं को समझने की कोशिश की थी। आज भी दुनिया(world) भर के कई छात्र(student) मोमबत्ती के फ्लेम(flame) पर रिसर्च(research) करते हैं। 


आपने कभी जलती मोमबत्ती की लौ को ध्यान से जरूर देखा होगा। यह हमेसा ऊपर की तरफ और एक टपकती हुई पानी की बून्द के आकार में जलती हैं ,लेकिन अगर गुरुत्वाकर्षण(gravity) के नियमो को माने तो इसे नीचे की तरफ जाना चाहिए ,


इसका कारण यह हैं कि जैसे ही मोमबत्ती जलती हैं।,आग की गर्मी से वहा की हवाए गर्म होकर उठने लगती है

और उसकी जगह लेने के लिए ठंडी हवाएं बार -बार लौ के निचे जमा होने लगती हैं ,और उसे ऊपर उठाने लगती हैं। इसे कन्वेक्शन करंट कहते है ,


इसकी वजह से मोमबत्ती(candle) की लौ का आकार पानी की बून्द के जैसा होता हैं ,लेकिन अगर यही मोमबती जब अंतरिक्ष में जलाई जाए तो इसकी लौ का आकार गोल होता हैं ,


आपने देखा होगा कि मोमबत्ती में कई रंग दिखाई देते हैं,असल में मोमबत्ती की लौ तीन भागो में बटी होती हैं ,


लौ के सबसे निचले हिस्से में hydrogen और carbon atom एक दूसरे से अलग होते हैं।
इस वजह से oxygen ज्यादा मात्रा में होता हैं,और यह हिस्सा ब्लू कलर का दिखाई देने लगता हैं ,लौ के बीच वाला हिस्सा गहरे नारंगी और भूरा होता हैं। 

मोमबत्ती से जुड़े रोचक तथ्य :

    मोमबत्ती(candle) बनाने वाले को ‘कैंडलर’ कहते हैं। 

 शुरुवाती दौर में मोमबत्ती समय बताने का काम भी करती  थी ,इसके जलने की गति के अनुसार ,यह पता चलता था कि कितना  समय बीत गया। 

  कैंडल का प्रयोग करने में सबसे आगे अमेरिका (america)हैं 

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