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Immunity Power Kaise Badhaye – इम्युनिटी पावर बढ़ाने के आसान उपाय

Immunity Power Kaise Badhaye

इम्युनिटी पावर से ही संक्रामक रोगों से बचाव होता है । इम्युनिटी पावर को ही इम्युनिटी या रोग प्रतिरोधक शक्ति कहते हैं । यह शक्ति जब तक शरीर में पर्याप्त बनी रहती है , कोई रोग रास्ता भटककर आ भी जाए तो 2-3 दिन में ही उसे खदेड़कर शरीर से बाहर कर देने का काम हमारी जीवनीशक्ति ही करती है ।

प्राकृतिक चिकित्सा का मूल सिद्धांत इम्युनिटी पावर को बढ़ाना ही है , फिर रोग कोई भी क्यों न हो ? आगे का कार्य इम्युनिटी पावर स्वयं ही कर लेती है । रोगों से लड़ने वाली शक्ति ही ‘ इम्युनिटी ‘ है ।

प्रकृति का अनुपम उपहार है – ‘ इम्युनिटी पावर । ‘ हमारे शरीर की रक्षात्मक प्रणाली सक्रिय बनाए रखने के लिए प्राकृतिक जीवनशैली अपनानी पड़ती है ; अन्यथा प्रकृति तो दंड देगी ही ।

‘ कोरोना काल ‘ में इम्युनिटी आम चर्चा का विषय बना । इस दिशा में सोचने को हरेक व्यक्ति मजबूर हो गया । आखिर इम्युनिटी क्या है ? कैसे बढ़ाएँ ? इसके पूर्व इम्युनिटी पुस्तकों तक ही सीमित रही । कुछ लोग जागरूक होकर , प्राकृतिक काढ़ा बनाकर पीने को उत्सुक भी हुए , परंतु वर्तमान जीवनशैली में आमूलचूल परिवर्तन नहीं किया गया तो ऐसी महामारियाँ मानवीय जीवन को ग्रास बनाती रहेंगी । इम्युनिटी हमारे संपूर्ण जीवनक्रम , दिनचर्या , आहार विहार , आचार – विचार को सही करने पर बढ़ती है ।

इन सबमें गड़बड़ी से रोग प्रतिरोधक क्षमता ( इम्युनिटी ) घटती है । शरीर और मन दोनों एकदूसरे से संबंधित हैं । अतः तन के साथ मन भी स्वस्थ रखें ।

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Immunity Power Kaise Badhaye – इम्युनिटी पावर बढ़ाने के आसान उपाय

( 1 ) सुबह उठकर डेढ़ लीटर पानी में नींबू का रस मिलाकर पिएं। सर्दी, खांसी में गर्म पानी पिएं।

( 2 ) प्रात:काल खुली हवा में शुद्ध प्राणवायु का सेवन करें, टहलने जाएं, चहलकदमी करें (क्षमता के अनुसार)। और प्राणायाम, योगासन, ध्यान, जप, प्रार्थना आदि भी करें।

( 3 ) गहरी नींद लेने से अंतःस्रावी ग्रंथियों से हार्मोन का स्राव संतुलित होता है, जिससे वजन भी बढ़ता है। नियंत्रण में रहता है और दिन भर काम करने की शक्ति रखता है।

( 4 )दिन भर में कम से कम 3 लीटर पानी पिएं। केवल ताजे फल, सब्जियों के रस, सूप आदि का प्रयोग करें। हरी जड़ी-बूटी – सब्जियों में सबसे कमैटिन नामक एक फाइटोकेमिकल पाया जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करता है – और हृदय रोग को रोकता है।

( 5 ) सफेद चीनी को पचाना बेहद मुश्किल होता है। इसलिए उसकी जगह देशी मिश्री या गुड़ का सेवन करना चाहिए।

( 6 ) सप्ताह में एक दिन पाचनतंत्र को उपवास के द्वारा विश्राम दें । कड़ी भूख लगने पर ही भोजन करें । हर मौसम में मिलने वाले ताजे फल , हरी सब्जियाँ , सलाद , दही तथा अंकुरित अनाज का सेवन कीजिए । छिलकायुक्त अनाज तथा दाल , चोकर सहित आटा का सेवन करें ।

( 7 ) प्रसन्न रहें , दूसरों को भी प्रसन्न रखिए । अपनी रचनात्मक रुचियों को बनाए रखें । सकारात्मक बने रहिए ।

( 8 ) प्रकृति की निकटता को महसूस करें। नदी, तालाब, बगीचे के फूल – पौधों की सुंदरता, आकाश के तारे, आकाश में उड़ते बादलों की सुंदरता को देखें। नीरस हवा के प्राकृतिक स्पर्श का अनुभव करते हुए आनन्दित हों। तनाव दूर करने के लिए प्रकृति के साथ संबंध बनाए रखें।

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( 9 ) कड़ी मेहनत श्रम जीवन शक्ति को बढ़ाता है। संतुलित श्रम और संतुलित विश्राम दोनों आवश्यक हैं।

जीवनीशक्तिवर्द्धक एवं रोगों से बचाने वाली कुछ प्राकृतिक औषधियाँ एवं खाद्य आँवला , तुलसी , हरड़ , मुलैठी , गिलोय , अश्वगंधा , शतावर , निर्गुडी , अदरक ( सोंठ ) , दालचीनी , हलदी , सौंफ , लौंग , इलायची , काली मिर्च , पिप्पली , अलसी , नीबू , संतरा , मौसमी , अंगूर , अननास , खुबानी , माल्टा , अनार , नाशपाती , सेब , पपीता , अमरूद , गाजर , टमाटर , लौकी , सफेद कद्दू ( पेठा ) का रस , जामुन , चीकू , बादाम , अंजीर , मुनक्का , किसमिस , खजूर तथा अंकुरित अनाज ।

Immunity Power क्यों घटती है ?

( 1 ) नींद की कमी – नींद कम हो तो मेटाबोलिज्म कार्य बिगड़ जाता है । शरीर में स्फूर्ति का अभाव हो जाता है ।

( 2 ) श्रम का अभाव – श्रम का अभाव होने से मांसपेशियाँ , स्नायुओं की कमजोरी बढ़ती है तथा विषैले हानिकारक पदार्थ भी अंदर ही शरीर में जमा होकर रक्त को भी विकारग्रस्त कर देते हैं ।

( 3 ) अम्लीय खाद्य पदार्थों का सेवन फास्टफूड , मैदा , चीनी के खाद्य , तले खाद्य , फाइबररहित , पोषक तत्त्व से हीन खाद्य पदार्थों से जीवनीशक्ति बरबाद होती है ।

( 4 ) नशीले पदार्थों का सेवन – चाय , कॉफी , तंबाकू , बीड़ी , सिगरेट , गुटखा , शराब आदि हानिकारक नशीले पदार्थों का सेवन करने से जीवनीशक्ति नष्ट होने लगती है । रोगों के लिए प्लेटफार्म तैयार हो जाता है । कोल्डड्रिंक्स से भी जीवनीशक्ति कमजोर पड़ती है ।

( 5 ) उद्वेग से बचें – तनाव , चिंता , क्रोध , ईर्ष्या , द्वेष , लोभ , छल – कपट की नकारात्मक भावनाओं से शरीर की आंतरिक रसायनशाला से जहरीले ( विषैले ) रसों का स्राव बढ़ जाने से जीवनीशक्ति कमजोर पड़ जाती है , फलस्वरूप रोगों को आमंत्रण मिल जाता है ।

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अंतिम शब्द

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