ओजोन परत क्या हैं ? ozone protect day kyu mnate hai?



helo dosto aaj ke is post me मैं आपको ozone परत से जुडी जानकारियों से परिचित करा रहा हूँ। और इसके साथ-साथ ozone protect day मनाने की जरूरत क्यों पड़ी ?इसके बारें में मैं आपको उस जानकारी से परिचित कराऊंगा। 

ओजोन परत क्या है ?


दोस्तों ozone परत पृथ्वी का सुरक्षा कवच के रूप में काम करता हैं ,अगर ozone परत नहीं होता हमारे वायुमंडल में तो शायद पृथ्वी भी और ग्रहो की तरह जीवनहीन रहता। क्योकि ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक किरण पराबैंगनी किरणों से हमारी रक्षा करता हैं ,


यह ऐसी हानिकारक किरणों को ऊपर ही सोख लेता हैं ,जिससे कि यह किरण हमारे शरीर तक नहीं पहुंच पाता और हमारे शरीर को नुकशान भी नहीं पहुँचता। 


दोस्तों ozone परत जमीन से 50 किलोमीटर ऊपर ओजोन मंडल में पाया जाता हैं ,जिसका रंग हल्का नीला होता हैं ,और इससे एक विशेष प्रकार की तेजी से गंध आती हैं ,यह परत ऑक्सीजन के तीन अणुओं से बनने वाले ओजोन गैस जिसे (O3 ) के नाम से भी जाना जाता हैं। इन्ही गैसों से मिलकर ओजोन परत का निर्माण हुआ। 

ozone परत का कितना हुआ हानि  :

दोस्तों बीते हुए कुछ दशकों में ozone परत पर researchers द्वारा किये गए रिसर्च द्वारा यह पाया गया कि ozone परत धीरे -धीरे कम होती जा रही हैं , सबसे पहले 1960 में ozone परत में हुए हानि का पता चला। 


साइंटिस्ट ने यह पता लगाया कि अंटार्कटिका के ऊपर पाए जाने वाले ओजोन परत में छेद हो गया ,शुरू में किसी ने भी इस बात पर गंभीरता जताई ,और नहीं किसी ने इसको उतना महत्व दिया ,


लेकिन जैसे – जैसे यह छेद बढ़ता गया तो वैज्ञानिको को यह बात सताने लगी। और वैज्ञानिको के रिसर्च से यह पता चला कि वायुमंडल में हर एक वर्ष के हिसाब से 0.5 % कम हो रही हैं। 


एक रिसर्च के अनुसार यह पता लगा कि अंटार्कटिका में ओजोन परत 20 से 30 % कम हो गयी हैं। इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया जैसे द्वीपीय देश के ऊपर पाए जाने वाले ओजोन परत में भी छेद पाया गया। 

ओजोन परत में हुए हानि का कारण :

दोस्तों ओजोन परत में हुए हानि का मुख्य कारण मानवीय क्रियाएं हैं मानवीय क्रियाकलापों ने अपनी बिना किसी सूझ -बुझ के कुछ ऐसी गैसों की मात्रा बढ़ा दी हैं ,जो पृथ्वी के सुरक्षा कवच ओजोन परत को नष्ट कर रही हैं। 


साइंटिस्ट द्वारा किये गए रिसर्च में यह पता चला कि क्लोरो – फ्लोरो कार्बन नामक गैस ओजोन परत में हुए क्षय का उत्तरदायी हैं ,इसके अलावा और भी रसायन जैसे क्लोरोफार्म ,कार्बन ट्रेटाक्लोरीडे भी इसके क्षय के उतर दायी हैं ,इन रसायन पदार्थो को “ओजोन क्षरण पदार्थ ” कहते हैं। 


और सबसे मुख्य बात ये सब रसायनिक गैस हमारी दैनिक सुविधा में काम आने वाली एयर कंडीशनर ,रेफ्रिजरेटर ,फोम और प्लास्टिक ही ऐसे गैसों के उत्पन होने का कारण बनते हैं 


और इसका एक और कारन यह हैं ,पेड़ो की अंधाधुन कटाई। जैसा कि आप जानते होंगे आज जितने पेड़ लगाए जा रहे हैं। उसके 10 गुना पेड़ो की कटाई कर दी जा रही हैं ,और पेड़ो की कटाई से ऑक्सीजन कम बनता हैं ,

और जैसा कि  मैंने बताया ऑक्सीजन के तीन अनु मिलकर ओजोन गैस का निर्माण करते हैं ,और ओजोन परत का निर्माण करते हैं ,लेकिन ऑक्सीजन न बनने से ओजोन परत नहीं बन पा रहा हैं। इसलिए दोस्तों पेड़ मत काटिये अगर काटते भी हैं तो एक पेड़ जरूर लगाए। 

ozone परत में हुए हानि का दुष्प्रभाव :

दोस्तों ozone परत में हुए छेद का बहुत बड़ा दुष्प्रभाव हो सकता हैं ,जैसे कि सूर्य से आ रही पराबैंगनी किरण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर पृथ्वी के तापमान को बढ़ा सकती हैं ,

जिससे गर्मी बढ़ेगी और इतनी गर्मी बढ़ेगी ,की ग्लेशियर पिघलने लगेंगे और कई सारे तटीय क्षेत्र जल मग्न हो जायेंगे ,कई द्वीप डूब जायेंगे ,कई घातक बीमारी फैलने लगेंगी ,जैसे – कैंसर ,श्वशन रोग ,अल्सर जैसे रोग होने लगेंगे ,फसल नहीं उपजेगी। 

इसे बचाने के लिए विश्वस्तरीय प्रयास  :

दोस्तों ozone परत  में बढ़ते क्षय को देखते हुए विश्व स्तरीय पर कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गए  हैं। 

ओजोन-क्षय विषयों से निबटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समझौते हेतु अंतर-सरकारी बातचीत 1981 में प्रारंभ हुई।

मार्च, 1985 में ओजोन परत के बचाव के लिए वियना में एक विश्वस्तरीय सम्मेलन हुआ, जिसमें ओजोन संरक्षण से संबंधित अनुसंधान पर अंतर-सरकारी सहयोग, ozone परत के सुव्यवस्थित तरीके से निरीक्षण, सीएफसी उत्पादन की निगरानी और सूचनाओं के आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर गंभीरता से वार्ता की गयी। 


सम्मेलन के अनुसार मानव स्वास्थ्य और ओजोन परत में परिवर्तन करने वाली मानवीय गतिविधियों के विरूद्ध वातावरण बनाने जैसे आम उपायों को अपनाने पर देशों ने प्रतिबद्धता व्यक्त की।

1987 में सयुक्त राष्ट्र संघ ने में ozone परत में हुए छेदों से उत्पन्न चिंता के निवारण हेतु कनाडा के मांट्रियाल शहर में 33 देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसे “मांट्रियाल प्रोटोकाल” कहा जाता है। 


इस सम्मेलन में यह तय किया गया कि ozone परत को नष्ट करने वाले पदार्थ जैसे क्लोरो फ्लोरो कार्बन (सी.एफ.सी.) के उत्पादन एवं उपयोग को सीमित किया जाए। भारत ने भी इस प्रोटोकाल पर हस्ताक्षर किए। 

और हर वर्ष पूरे विश्व में ozone संरक्षण दिवस 16 सितम्बर को मनाया जाता हैं। 






तो दोस्तो कैसा लगा आपको ozone परत के बारें में यह जानकारी आप मुझे कमेंट कर बताये ताकि मैं आपके लिए ऐसी ही जानकारिया लाता रहूं। दोस्तों मैं आप सबसे यही कहूंगा ,हमें अपने पर्यावरण की रक्षा खुद ही करनी होगी ,नहीं तो शायद यह पृथ्वी रहने के लायक ही न बचे 

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