kaise hua cycle ka avishkar/साइकिल कब और कैसे बना ?

helo friends  , और आज मैं इस article  के through आपको cycle के बारें में कुछ जानकारिया दूंगा ,दोस्तों cycle ही एक ऐसी सवारी हैं ,जिसे चलाने की न तो कोई उम्र की सीमा होती हैं और न ही ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत। बच्चे ,बूढ़े या बुजुर्ग इसे बड़े शान से चला सकते हैं। साथ ही यह सुरक्षित भी हैं। एक समय ऐसा भी था ,

जब साइकिल को सम्पन्नता की निशानी माना जाता था। आज cycle का जो स्वरुप हमारे सामने आया हैं ,शुरुवात में यह ऐसी नहीं थी। अपनी शुरुआत से लेकर अब तक के समय में cycle ने कई रूप बदले हैं ,तो दोस्तों चलिए इसके बारें में कुछ और जानकारी जानते है। 



cycle को कब,कैसे और कहां बनाया गया ?

दोस्तों ,cycle को सबसे पहले जर्मन आविष्कारक कार्ल फॉन ड्रायस ने आज से 200 साल पहले कर दी थी। वर्ष 1817 में एक ऐसा दो पहिया बनाया था जिसे आज के cycle का प्रोटोटाइप कहा जा सकता हैं 

लकड़ी के इस cycle को ड्रायस ने ड्रायसीन नाम दिया इस प्रोटोबाइक में सवार लोग को जमीन पर पैर घसीट कर cycle चलाना होता था ,

फिर बाद में इसमें सुधार के बाद इसका नाम बायसाइकिल नाम दिया गया, पैरो से  घुमाये जा सकने वाले पैडल का आविष्कार वर्ष 1865 में पेरिस मे हुआ इस पैडल का नाम वेलोसिपीड़ नाम दिया गया। लेकिन इस पर सवारी के बाद होने वाले थकान को लोग ‘हाड़तोड़ या बोनसेकर कहने लगे ‘. 

कैसे बढ़ी cycle की लोकप्रियता ?

इसमें वैज्ञानिको द्वारा लगातार सुधारो ने इसे एक सुन्दर रूप दे दिया जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ने लगी .1872 मे इस साइकिल को एक सुंदर रुप दिया गया .

इसमे आगे का पहिया 30 इंच से लेकर 64 इंच व्यास तक और पीछे का पहिया लगभग 12 इंच व्यास का होता था .इसमे पैडल ,बॉल बेयरिंग और ब्रेक भी लगाए गए थे ,इस तरह साइकिल अपने आज के स्वरुप में आया। 



भारत में साइकिल का चलन ;

भारत में आजादी के बाद से ही साइकिल यातायात का सबसे महत्वपूर्ण साधन बन गया था। वर्ष 1990 तक भारत के लगभग हर घर में साइकिल मौजूद थी। 

डाक विभाग का तो पूरा काम ही साइकिल के जरिये ही हुआ करता था ,आज भी चीन के बाद सबसे ज्यादा साइकिल भारत में ही बनती हैं। जर्मनी समेत यूरोप के कई विकसित देश अपने यहा cycling को बढ़ावा दे रहे हैं 

साइकिल चलाने के फायदे :

बच्चो के लिए cycling एक बेहतर exercise हैं ,एक study के मुताबिक ,साइकिल चलाने वाले बच्चे कार से चलने वाले बच्चो के मुताबिक ज्यादा active रहते हैं और उनके सिखने की क्षमता भी ऐसे बच्चो के मुकाबले ज्यादा होती हैं ,इसकी वजह यह हैं,कि साइकिल चलाने से आपका मेटाबॉलिक रेट बढ़ता हैं और दिमाग हमेसा चुस्त-दुरुस्त रहता हैं। 

आपको वज़न सही बनाये रखने के लिए exercise करने की भी जरुरत नहीं होती हैं,क्योकि इससे पैर और जांघो की कसरत हो जाती हैं cycle आपको उबाऊ ट्रैफिक जैम और प्रदूषण  से बचा लेता हैं 

दुनिया की सबसे महंगी साइकिल : 

ट्रेक बटरफ्लाई मैडोन  नाम की यह cycle दुनिया की सबसे महंगी साइकिल हैं ,जिसे खास तौर पर रेसिंग के लिए डिज़ाइन किया गया हैं।

इसकी खास बात यह हैं कि इसे डिज़ाइन करने के लिए असल तितलियों का इस्तेमाल किया गया जो इसकी और भी ज्यादा खूबसूरत बना देती हैं। 

इसे एक समय cycling की दुनिया के चमकते सितारें रहे लांस आर्मस्ट्रांग के सम्मान में तैयार किया गया था। वे वर्ष 1993 में cycling के विश्व चैंपियन थे।

साथ ही उन्होंने रिकॉर्ड 7 बार ‘टूर डे फ्रांस’ cycling race को जीतने का रिकॉर्ड भी बनाया है ,भारत में विक्रम सिंह ,अमृत सिंह ,

श्रीधर स्वानुर आदि cycling के क्षेत्र में जाने पहचाने नाम हैं इन्होने हमारे देश का नाम रौशन किया हैं 

अब तक अमृत सिंह national और international प्रतियोगताओं में 34 gold ,11 silver और 3 branz मेडल अपने नाम कर चुके हैं। 

  रोचक जानकारी :

  • दुनिया पहली साइकिल केवल दो पहिया की थी जिसे पैरो से घसीट कर चलाया जाता था। 
  • पहले महिलाओ को साइकिल चलाने पर पाबंदी थी। 
  • वर्ष 1903 में सबसे पहले ‘टूर डे ‘फ्रांस का आयोजन किया गया था 

दोस्तों कैसी लगी आपको साइकिल के बारें में यह जानकारी हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे और हो सके तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के पास शेयर कीजिये 

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