Knowledgeable Story In Hindi – ज्ञानवर्धक कहानियाँ

आज के इस लेख में हम कुछ ज्ञानवर्धक कहानियो Knowledgeable Story In Hindi के बारे में जानेंगे , उम्मीद है ये कहानिया आपको पसंद आये

पहली कहानी – Best Hindi Knowledge Story

दक्षिण अफ्रीका में एक अश्वेत परिवार में जन्मे लड़के का नाम बुकर टी. वाशिंगटन था। उन दिनों अश्वेत दासों को सोलह-सोलह घंटे काम करना पड़ता था और उन्हें खाने और पहनने की कोई सुविधा नहीं थी।

बच्चों को 8-10 साल की उम्र में ही काम पर लगा दिया गया था। इन बदकिस्मत लोगों में बुकर भी शामिल था। बच्चे में पढ़ने की इच्छा होती है।

590 मील दूर कंवा नगर में अश्वेत लोगों का स्कूल था। पैसे थे नहीं। इतनी दूर कैसे पहुंचे। उसने कड़ी मेहनत की, रास्ते में काम किया, वहाँ पैदल पहुँचा। उन्हें बड़ी मुश्किल से प्रवेश मिला, लेकिन उन्होंने पढ़ने में उतनी ही मेहनत की, जितनी यहां के मालिकों को करनी पड़ती थी।

स्नातक होने के बाद, उन्हें नौकरी की इच्छा नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपने समुदाय के लिए शिक्षा की व्यवस्था करना शुरू कर दिया। उन्होंने धन इकट्ठा करके धन इकट्ठा किया और एक स्कूल की स्थापना की। आज, उन्होंने जिस स्कूल की स्थापना की, उसमें सैकड़ों छात्र हैं।

दूसरी कहानी – GyanVardhak Kahani

रूस के राजा अलेग्जेंडर अक्सर अपने देश की आंतरिक दशा जानने के लिए वेश बदलकर पैदल घूमने जाया करते थे । एक दिन घूमते – घूमते एक नगर में पहुँचे , वहाँ का रास्ता उन्हें मालूम न था । राजा रास्ता पूछने के लिए किसी व्यक्ति की तलाश में आगे बढ़े । आगे उन्होंने एक हवलदार देखा ।

राजा ने उसके पास जाकर पूछा- ” महाशय ! अमुक स्थान पर जाने का रास्ता बता दीजिए । ” हवलदार ने अकड़कर कहा- ” मूर्ख ! तू देखता नहीं , मैं सरकारी हाकिम हूँ , मेरा काम रास्ता बताना नहीं है । चल हट , किसी दूसरे से पूछ । ” राजा ने नम्रता से पूछा ” यदि सरकारी आदमी भी किसी यात्री को रास्ता बता दे तो कुछ हर्ज थोड़ा ही है ।

मैं किसी दूसरे से पूछ लूँगा , पर इतना तो बता दीजिए कि आप किस पद पर काम करते हैं । ” हवलदार ने और ऐंठते हुए कहा- ” अंधा है क्या , मेरी वर्दी को देखकर पहचानता नहीं कि मैं कौन हूँ ? ” अलेग्जेंडर ने कहा- ” शायद आप पुलिस के सिपाही हैं । ” उसने कहा- ” नहीं , उससे ऊँचा । ” राजा- ” तब क्या नायक हैं ? ” हवलदार हवलदार- ” उससे भी ऊँचा । “

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राजा- ” हवलदार हैं ? ” हवलदार- ” हाँ , अब तू जान गया कि मैं कौन हूँ , पर यह बता कि इतनी पूछताछ करने का तेरा क्या मतलब और तू कौन है ? ”

राजा ने कहा- ” मैं भी सरकारी आदमी हूँ । ” सिपाही की ऐंठ कुछ कम हुई , उसने पूछा- ” क्या तुम नायक हो ?

” राजा ने कहा- [ – ” नहीं , उससे ऊँचा । ” हवलदार- ” तब क्या आप हवलदार हैं ? ” राजा ” उससे भी ऊँचा । ” हवलदार- ” दारोगा ? ” राजा- ” उससे भी ऊँचा । ” हवलदार ” कप्तान ? ” राजा- ” उससे भी ऊँचा । ” हवलदार- ” सूबेदार । “

राजा- ” उससे भी ऊँचा । ” अब तो हवलदार घबराने लगा , उसने पूछा- ” तब आप मंत्री जी हैं ? ” राजा ने कहा- ” भाई ! बस , एक सीढ़ी और बाकी रह गई है । ” सिपाही ने गौर से देखा तो सादा पोशाक में बादशाह अलेग्जेंडर सामने खड़े हैं ।

हवलदार के होश उड़ गए वह गिड़गिड़ाता हुआ बादशाह के पाँवों पर गिर पड़ा और बड़ी दीनता से अपने अपराध की माफी माँगने लगा ।

राजा ने मीठी वाणी में कहा- ” भाई ! तुम पद की दृष्टि से कुछ भी हो , पर व्यवहार की कसौटी पर बहुत नीचे हो ।

यदि ऊँचा बनना चाहते हो तो पहले मनुष्य बनो , सहनशील व नम्र बनो , अपनी ऐंठ कम करो ; क्योंकि तुम जनता के सेवक हो इसलिए तुम्हारी तो यह विशेष जिम्मेदारी है । ” वस्तुतः मानवीय गरिमा की सबसे बड़ी कसौटी है – विनम्रता एवं निरहंकारिता ।

तीसरी कहानी – Best knowledge story in hindi

एक व्यापारी के यहाँ नौका चालन द्वारा व्यापार होता था । एक बार उसके दोनों लड़के नावों में माल भरकर विदेश बेचने गए । लौटते हुए परदेश से दूसरा माल लाने की योजना थी । रास्ते में समुद्री तूफान आया । नावें उलट गईं । उनमें रखे दो तख्तों के सहारे वे किनारे आ गए । जान भर बच गई । उस क्षेत्र में तीन यक्षिणियों का शासन था ।

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एक का नाम था वासना , दूसरी का तृष्णा और तीसरी का अपूर्णा । वे सुंदर युवकों की तलाश में रहतीं । कुछ दिन के भोग – विलास से उन्हें खोखला कर देती और इसके बाद दूर के सिंह – बाघों से भरे जंगल में उन्हें बेमौत मरने के लिए छोड़ देतीं ।

यक्षिणियों ने उन युवकों का भी इसी दृष्टि से उपयोग किया । उन्हें हिदायत दी कि घूमना हो तो महल के इर्द – गिर्द ही घूमें । दक्षिण दिशा में भूलकर भी न आवें ।

दोनों भाई उनके पंजे से छूटकर घर जाने की फिक्र में थे , सो दाँव लगते ही दक्षिण दिशा की ओर तेजी से चल पड़े । दूर जाने पर एक जर्जर अस्थि – कंकाल के रूप में युवक रोता मिला । उ

सने बताया- ” यक्षिणियों ने खोखला करके यहाँ मरने के लिए छोड़ दिया है । रहस्य की बात यह है कि वे पीछा करें , मधुर बातें करें तो भी उनकी ओर मुड़कर न देखना , अन्यथा वे भारी प्रतिशोध लेंगी । ” ऐसा ही हुआ । यक्षिणियाँ पीछे दौड़ती हुई आईं ।

एक भाई उनसे वार्ता करने लगा , उसे ले जाकर कुछ ही दूर पर मार डाला । जिसने मुड़कर नहीं देखा , वह उनके जादू से बच गया और किसी प्रकार घर आ गया । वस्तुतः लिप्साएँ ही यक्षिणियाँ हैं । जो उनके कुचक्र में फँसता है , वह जान गँवाता है ।

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चौथी कहानी

एक न्यायाधीश बड़ा ही धार्मिक स्वभाव का था । एक बार एक चोर उसके न्यायालय में लाया गया । उसे लगा कि न्यायाधीश के सम्मुख धार्मिक बातें करने से उसे सजा नहीं होगी ।

अतः जिरह होने पर वह कहने लगा- ” जज साहब आप जैसे साधुवृत्ति के व्यक्ति के सामने उपस्थित होकर मुझे बड़ा आनंद आ रहा है । मैंने चोरी कोई अपने वश होकर नहीं की ।

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मुझे ऐसी प्रभु – प्रेरणा ही हुई कि चोरी करूँ , अतः मैंने चोरी की । इसमें मेरे हाथों का दोष नहीं । ” चोर का तर्क सुनकर कचहरी वाले विस्मित से रह गए व सोचने लगे कि देखें ऐसे में न्यायाधीश अब कैसा दृष्टिकोण अपनाते हैं ।

परंतु न्यायाधीश पक्के निकले , उन्होंने फैसला सुनाया- ” चोर का कथन पूर्णतः मान्य है । जिस भगवान ने उसे चोरी करने की प्रेरणा दी , उसी भगवान की प्रेरणा से मैं इस चोर को दंड देता हूँ ।

पांचवी कहानी

एक लड़के ने एक धनवान व्यक्ति को देखकर धनवान बनने का निश्चय किया । वह कई दिनों तक कमाई करने में लगा रहा और कुछ पैसे भी कमा लिए । इसी बीच उसकी भेंट एक विद्वान से हुई तो उसने विद्वान बनने का निश्चय किया और कमाना छोड़कर पढ़ने में लग गया ।

थोड़े दिन गंभीरता से अध्ययन किया होगा कि उसकी मुलाकात एक संगीतज्ञ से हो गई । उसे संगीत में अधिक आकर्षण दिखाई दिया तो उसने पढ़ाई छोड़कर संगीत सीखना शुरू कर दिया । काफी उम्र बीत गई , न वह धनवान बन सका और न ही संगीतज्ञ या विद्वान ।

अब उसे बहुत दुःख हुआ । एक दिन उसकी भेंट एक महात्मा से हुई । उसने अपने दुःख का कारण उनको बताया तो वे उसे समझाते हुए बोले- ” बेटा ! इस दुनिया में आकर्षण बिखरे पड़े हैं । जहाँ जाओगे , वहाँ आकर्षण का कोई – न – कोई कारण दिखाई पड़ेगा ।

अनेक जगह भटकने के स्थान पर कोई एक निश्चय कर लो और फिर जीते जी उस पर अमल करते रहो तो तुम्हारी उन्नति अवश्य होगी । बार – बार रुचि बदलने से कोई उन्नति नहीं कर पाओगे । ” युवक उनके कहे का अर्थ समझ गया और एक उद्देश्य को निश्चित कर उसी को प्राप्त करने में जुट गया ।

उम्मीद करते है इस लेख से Knowledgeable Story In Hindi – ज्ञानवर्धक कहानियाँ को काफी अच्छे से समझा होगा।

“आपका दिन शुभ हो “

Update on May 26, 2021 @ 7:51 am

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