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Mothers Day क्यों मनाया जाता है – Mothers Day कब मनाया जाता है

Mothers Day क्यों मनाया जाता है - Mothers Day कब मनाया जाता है

Mothers Day क्यों मनाया जाता है मई महीने के दूसरे रविवार को हर साल इंटरनेशनल मदर्स डे Mothers day मनाया जाता है । यह दिन माँ के प्यार और सम्मान के लिए समर्पित है । वैसे तो माँ को हर दिन प्यार किया जाता है , लेकिन माँ को प्यार और सम्मान देने के लिए कई देशों में अलग – अलग तारीखों पर मातृदिवस मनाया जाता है । मदर्स डे के अवसर पर माँ के लिए खास प्यार और सम्मान जताया जाता है ।

माँ को विशेष महसूस कराया जाता है । इस दिन उन्हें तोहफा दिया जाता है , घुमाया जाता है अर्थात जितने भी तरीकों से आप अपनी माँ से प्यार जता सकते हों , वे सब किए जाते हैं । पूरी जिंदगी भी समर्पित कर दी जाए तो माँ के ऋण से उऋण नहीं हुआ जा सकता है ।

संतान के लालन – पालन के लिए हर दुःख का सामना बिना किसी शिकायत के करने वाली माँ के साथ बिताए दिन सभी के मन में आजीवन सुखद व मधुर स्मृति के रूप में सुरक्षित रहते हैं ।

भारतीय संस्कृति में माँ के प्रति लोगों में अगाध श्रद्धा रही है , लेकिन आज आधुनिक दौर में जिस तरह से मदर्स डे मनाया जा रहा है , उसका इतिहास भारत में बहुत पुराना नहीं है । इसके बावजूद दो – तीन दशक से भी कम समय में भारत में मदर्स डे काफी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है ।

Mothers day क्यों मनाया जाता है ?

मातृदिवस समाज में माँ के प्रभाव व सम्मान का उत्सव है । माँ को सम्मान देने वाले इस दिन की शुरुआत अमेरिका से हुई । अमेरिकन एक्टिविस्ट एना जार्विस अपनी माँ से बहुत प्यार करती थीं । उन्होंने न कभी शादी की और न उनके कोई बच्चा था ।

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वे हमेशा अपनी माँ के साथ रहीं । माँ की मौत होने के बाद प्यार जताने के लिए उन्होंने इस दिन की शुरुआत की । फिर धीरे – धीरे कई देशों में मदर्स डे मनाया जाने लगा ।

Mothers day कब मनाया जाता है ?

9 मई , 1914 को अमेरिकी प्रेसिडेंट वुड्रो विल्सन ने एक कानून पास किया था , जिसमें लिखा था कि मई महीने के हर दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाएगा , जिसके बाद अमेरिका , भारत और कई देशों में मदर्स डे मनाया जाने लगा

वैसे तो माँ को प्यार करने और तोहफे देने के लिए किसी खास दिन की । जरूरत नहीं , लेकिन फिर भी मदर्स डे के दिन को और ज्यादा सम्मान दिया जाता है समूची धरती पर बस यही माँ का एक रिश्ता है , जिसमें कोई छल – कपट नहीं होता । कोई स्वार्थ , कोई अहंकार नहीं होता ।

इस एक रिश्ते में निहित है – अनंत गहराई लिए छलछलाता ममता का सागर । शीतल , मीठी और सुगंधित बयार का कोमल एहसास । इस रिश्ते की गुदगुदाती गोद में ऐसी अनुभूति छिपी है कि मानो नरम – नाजुक हरी , ठंढी दूब की भीनी बगिया में सोए हों ।

माँ ! इस एक शब्द को सुनते ही नारी के संपूर्ण अस्तित्व को तृप्ति प्राप्त हो जाती है । नारी अपनी संतान को एक बार जन्म देती है , लेकिन गर्भ की अबोली आहट से लेकर उसके जन्म लेने तक वह कितने ही रूपों में जन्म लेती है अर्थात एक शिशु के जन्म के साथ ही स्त्री के अनेक खूबसूरत रूपों का भी जन्म होता है । पल – पल उसके हृदय – समुद्र में ममता की उद्दाम लहरें उठती रहती हैं ।

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उसका रोम – रोम अपनी संतान पर निछावर होने को विकल हो उठता है । नारी अपने कुँवारे रूप में जितनी सलोनी होती है , उतनी ही सुहानी वह विवाहिता होकर लगती है , लेकिन उसके नारीत्व में संपूर्णता आती है – माँ बनकर । संपूर्णता के इस पवित्र भाव को जीते हुए वह एक अलौकिक प्रकाश से भर उठती है । उसका चेहरा अपार कष्ट के बावजूद हर्ष से चमकने – लगता है ।

उसकी आँखों में खुशियों के सैकड़ों दीप झिलमिलाने – लगते हैं । लाज और लावण्य से दमदमाते इस चेहरे को किसी । भाषा , किसी शब्द और किसी व्याख्या की आवश्यकता नहीं । होती है ।

‘ माँ ‘ शब्द की पवित्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि हिंदू धर्म में देवियों को माँ कहकर पुकारते हैं । बेटी या बहन के संबोधनों से नहीं । मदर मेरी और बीबी फातिमा का ईसाई और मुसलिम धर्म में विशिष्ट स्थान है । माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक दिवस नहीं , एक सदी भी कम है ।

किसी ने सही कहा है कि सारे सागर की स्याही बना ली जाए और सारी धरती को कागज मानकर लिखा जाए तब भी माँ की महिमा नहीं लिखी जा सकती है । महसूस कर सके व उसके अनंत आनंद को आत्मसात् कर सके । माँ से लगाव व प्रेम की तो कोई सीमा ही नहीं है ।

अंतरराष्ट्रीय मातृदिवस को मनाते हुए मातृ – महिमा पर छा । रहे ऐसे अनेक धब्बों को मिटाना जरूरी है , तभी इस दिवस की सार्थकता है । मातृदिवस पर हर माँ को उसके अनमोल मातृत्व की बहुत – सी शुभकामनाएँ ।

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Mothers Day पर शायरी

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मेरे बुरे वक़्त को देख, मेरे दोस्तों ने भी साथ छोड़ दिया …!!

और वो मेरी माँ की दुआ हैं, जिसने बुरे वक़्त का रुख मोड़ दिया …!!

सारी दुनिया बोलती हैं बड़ा हो गया हैं कमाया कर

 पर माँ बोलती हैं बड़ा कमजोर हैं कुछ खाया कर 

हर रिश्ते में मिलावट देखी कच्चे रंगों की सजावट देखी,

लेकिन सालों साल देखा है माँ को,

उसके चेहरे पर न थकावट देखी,

ना ममता में मिलावट देखी|

ना जाने क्या था “माँ” की उस “फूँक” में,

हर “चोट” ठीक हो जाया करती थी,

“माँ” की हल्की सी एक “चपत” ज़मीन को,

सारा “दर्द” ही “गायब” कर दिया करती थी|

मुझे कोई और जन्‍नत का नहीं पता…
क्‍योंकि हम माँ के कदमों को ही
जन्‍नत कहते हैं।

पूछा था मैंने भगवान से स्‍वर्ग का पता,
तो अपनी गोद से उतारकर भगवान ने
माँ की बाहों में सुला दिया…

ज़िंदगी‬ की पहली ‪Teacher‬ ‎माँ‬,

ज़िंदगी की पहली ‪Friend‬ माँ,

ज़िंदगी‬ भी माँ ‎

क्योँकि‬,ज़िंदगी‬ देने वाली भी माँ 

सीधा साधा भोला भाला मै ही सबसे सच्चा  हूँ,

कितना भी हो जाऊ बड़ा माँ, मै आज भी तेरा बच्चा हूँ। 

इस आर्टिकल से आपने जाना कि Mothers Day क्यों मनाया जाता है – Mothers Day कब मनाया जाता है मातृ दिवस की शुरूआत कब और क्यों हुयी, माँ के लिए इस दिन को खास कैसे बनाये?

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Update on May 24, 2021 @ 2:41 pm

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