Muskmelon Benefits In Hindi – खरबूजा खाने के फायदे

Muskmelon Benefits In Hindi रीजनल एवं सीजनल फूड का सेवन करना लाभप्रद होता है अर्थात ” जिस क्षेत्र में , जिस मौसम में जो फल होते हैं , उस क्षेत्र के लोगों के लिए उसी मौसम में उन्हें सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है । वस्तुतः प्रकृति उस मौसम और उस क्षेत्र के लोगों के लिए उनमें स्वास्थ्यकारक गुण भर देती है ।

” ग्रीष्मकाल में खीरा , ककड़ी , नारियल , संतरा , मौसमी , खरबूजा , तरबूज , लीची , रसीले आम , माल्टा आदि विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले फल एवं प्राकृतिक खाद्य , जिनमें पानी की मात्रा पर्याप्त होती है ; वे सभी ऐसे खाद्य शरीर को गरमी के दुष्प्रभाव से बचाते हैं ।

पानी एवं खनिज – लवण की पूर्ति कर आरोग्य की रक्षा करते हैं । शरीर की हानिकारक तथा अनावश्यक गरमी को दूर कर , मस्तिष्क को शीतलता देकर तरोताजा बनाते हैं । रक्त की शुद्धि करते हैं । हमारे महत्त्वपूर्ण अंग गुरदों को स्वस्थ बनाए रखते हैं ।

गुण –

धर्म – संधिवात , गठिया , सियाटिका आदि वात रोग से बचाता है । पागलपन , जलोदर , पथरी , मूत्रावरोध , तृषा और चर्मरोग मिटाता है । हृदय एवं मस्तिष्क के लिए हितकारक होता है । आम दोष दूर करता है , कब्जनिवारक होता है । वात – पित्त को दूर करता है , बलवर्द्धक होता है । शीतल एवं तृप्तिकारक होता है ।

सावधानी

  1. खरबूजे के सेवन करने के तुरंत बाद दूध का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  2. खरबूजे को ठंढे पानी से अच्छी तरह धोकर ठंढे पानी में रखें , जिससे ठंढा हो जाए । ठंढा होने पर ही सेवन करें
  3. मीठे फल ही खाने चाहिए। देशी खांड से बनी शुद्ध शराब का सेवन करें, जिससे पित्त दोष से बचा जा सके।
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Muskmelon Benefits In Hindi – खरबूजा खाने के फायदे

संधिवात एवं गठिया में –

डॉक्टर की देखरेख में खरबूजे या कल्प की उचित तरीके से खाने से गठिया को नियंत्रित किया जा सकता है। खरबूजे को दिन में चार बार आहार के रूप में लेने से रक्तस्राव होता है और आंतरिक दोषों का शमन होता है। यह जोड़ों को स्वस्थ बनाने में कारगर पाया गया है।

मस्तिष्क की कमजोरी में

गरमी के कारण मानसिक तनाव , मस्तिष्क की गरमी को दूर कर , दिमागी ताकत बढ़ाने के लिए ऋतुपेय ठंढाई बनाने के लिए खरबूजे की मिंगी का उपयोग अलग – अलग तरीकों से किया गया है । इसका प्रभाव शीतल होता है । मस्तिष्क को शीतलता मिलती है ।

मिंगी के 5 ग्राम बीजों को पीसकर गाय के ठंडे दूध में पानी मिलाकर कोल्ड ड्रिंक बना लें। इससे मन शांत और प्रसन्न रहता है।

लू से बचाव में –

मई – जून की गरमी में लू लगने का भय रहता है । उचित उपचार के अभाव में लू जानलेवा भी हो सकती है । नियमित खरबूजा का सेवन करने से लू से बचाव होता है ।

खरबूजा को छीलने पर छिलका के आंतरिक भाग को जो शीतल होता है , उसे त्वचा पर मलने से त्वचा को शीतलता मिलती है ।

खरबूजे के बीजों को पीसकर मस्तक पर लेप भी किया जाता है । बीजों को पीसकर , शरबत बनाकर सेवन कराने से लाभ मिलता है ।

पेट की जलन में –

गुस्सा, तनाव और गरम मसाला, बेसन – तीखा तली हुई चीजें खाने से एसिडिटी बढ़ने से पेट में जलन बढ़ जाती है. खरबूजा एक अच्छा क्षारीय होने के कारण अतिरिक्त अम्लता को दूर करता है।

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माता के दूध में कमी होने पर

छोटे बच्चों को दूध पिलाने वाली माताओं को नियमित खरबूजा देने से दूध पर्याप्त मात्रा में बढ़ने लगता है। शतावरी के चूर्ण को दूध के चूर्ण के साथ लेने से भी लाभ होता है।

कब्ज में

आंतों में कब्ज को दूर करता है, और कब्ज के कारण होने वाले रोगों को ठीक करता है। पके मीठे खरबूजे को छीलकर काट लें और चुटकी भर सेंधानमक और पिसी हुई काली मिर्च के साथ सेवन करने से कब्ज दूर हो जाती है।

त्वचा के स्क्रब और दाग-धब्बों के नीचे खाद्य पदार्थों के सेवन से लीवर की कार्यप्रणाली पर पड़ने वाले प्रभाव और त्वचा की अम्लीयता बढ़ने से त्वचा और चेहरे पर धब्बे पैदा हो जाते हैं।

खरबूजे के गूदे को चेहरे पर लगाने और नियमित खरबूजे का छिड़काव करने से धब्बे और धब्बे दूर हो जाते हैं। त्वचा के रंग में सुधार करता है। त्वचा कांतिमय हो जाती है। पूर्ण लाभ के लिए क्षारीय खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

स्प्रू में –

काली मिर्च, सोंठ, सेंधा नमक और भुना जीरा बराबर मात्रा में लेकर खरबूजे के गूदे पर रखकर दिन में दो बार खाने से पाचन में मदद मिलती है और स्प्रू, अमीबिक और पेचिश से छुटकारा मिलता है।

यकृत की सूजन पर –

खरबूजा का नियमित सेवन करने से लीवर की सूजन दूर होती है। यह लीवर के कार्य को स्वस्थ बनाने के लिए उपयोगी है।

मानसिक अंसतुलन में

मानसिक असंतुलन (पित्त उन्माद) में गर्मी के कारण पित्त विकार के बढ़ने से उत्पन्न होने वाला मानसिक असंतुलन प्रतिदिन खरबूजे से बने देशी खाड़े के सेवन से लाभ होता है। गर्म पेय पदार्थों का सेवन बंद करें, आहार के रूप में दही में चीनी मिलाएं और भोजन के बाद नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।

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पित्त पथरी और हिस्टीरिया में –

खरबूजे को छीलकर थोडा़ सा नींबू निचोड़ कर गूदा कस कर शरबत बना लें और बूरा या पिसी चीनी स्वादानुसार मिला लें. यह सिरप पित्त पथरी, कब्ज, हिस्टीरिया और गैस्ट्रिक विकारों को दूर करता है। मूत्र को साफ करता है, मूत्र संक्रमण को दूर करता है।

सूजाक या मूत्र रोग में-

मूत्राशय की गर्मी, सूजाक और मूत्र संक्रमण या पेशाब में रुकावट होने पर मूत्रवर्धक प्रकृति जैसे रोगों में खरबूजा बहुत फायदेमंद होता है।

5 ग्राम खरबूजे के बीज को मिंगी के पानी में पीसकर, चंदन के तेल (आयुर्वेदिक दवा की दुकान पर उपलब्ध) की 3-4 बूंदे मिक्की के ठंडे दूध में मिलाकर थोड़ा सा पानी मिलाकर अच्छी तरह सेवन करने से शीघ्र आराम मिलता है।

प्रारंभ में इसका सेवन दिन में तीन बार करना चाहिए, जिससे शीघ्र लाभ प्राप्त किया जा सके। सूजाक के रोगी को गर्म पेय और गर्म प्रकृति के खाद्य पदार्थों और गर्म मसालों से बचना चाहिए। पर्याप्त पानी पीने का ध्यान रखना चाहिए।

अंतिम शब्द

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Update on May 25, 2021 @ 1:34 pm

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