पपीता के गुण और फायदे – Papaya Benefits In Hindi

पपीता के गुण और फायदे – Papaya Benefits In Hindi

आज के इस लेख में हम पपीता के गुण और फायदे के बारे में जानेंगे की आपको तरबूज क्यों खाना चाहिए।

आज पूरे देश में पपीते ( Papita )की खेती की जाती है। गांवों में घरों के आसपास पपीते का पौधा लगाया जाता है। इसकी जड़ें गहरी नहीं हैं। पपीते की पैदावार साल में दो बार होती है। पपीता पेट के रोगों में बहुत फायदेमंद पाया गया है। विटामिन ए, बी, सी, डी के साथ एक अच्छा एंटी-ऑक्सीडेंट होने के कारण यह कई बीमारियों से बचाता है।

पपीता त्वचा और बालों के लिए भी बहुत उपयोगी होता है। पपैन नामक एंजाइम भोजन को पचाने में कारगर होता है। यह अपच, प्लेग, कब्ज, लीवर आदि रोगों में बहुत लाभकारी होता है। पपीते के पत्तों का रस कैंसर रोधी होता है। डेंगू जैसे रोग में प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति में पपीते के पत्तों का रस पिलाने से प्लेटलेट्स चमत्कारिक रूप से बढ़ने लगते हैं।

आयुर्वेदिक गुण और दोष

कब्ज, उल्टी-दस्त, अरुचि, पित्ती, गांठ, प्लेग, हैजा, कफयुक्त खांसी, कृमि रोग, जलोदर, दाद, बवासीर, सूजन, गठिया और कफ रोगों में लाभप्रद है। कच्चे पपीते का रस आंतों को नष्ट करता है। गर्भवती महिला के लिए पपीते का सेवन हानिकारक माना जाता है।

कब्ज में उपयोग

पपीता कब्ज का एक अच्छा फल है। 250 ग्राम पका हुआ पपीता और 150 ग्राम पपीता भोजन के बाद नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। पपीता कब्ज को दूर करता है रोगी को हमेशा तली-भुनी चीजों और मिर्च-मसाले से बचना चाहिए। और नियमित पपीते का सेवन करना चाहिए। भोजन के तुरंत बाद छाछ का सेवन करना चाहिए। छाछ में भुना जीरा और सेंधा नमक या काला नमक स्वादानुसार मिला लें।

भूख न लगने पर

भूख न लगने और बदहजमी होने पर – पके पपीते को छीलकर काट लें और नींबू का रस निचोड़ लें और चुटकी भर सेंधा नमक और भुना जीरा पीसकर उसमें थोड़ा सा जीरा पाउडर डालें, फिर पपीता खाएं, तो पाचन ठीक से होगा और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल भी तेज हो जाएगा भूख खुलेगी, पाचन शक्ति भी बढ़ेगी।

दांतों के रोगों में –

दांतों और मसूड़ों की समस्या से बचने के लिए पपीते का सेवन करना चाहिए। यह दांतों के दर्द और मसूड़ों से खून बहने और सूजन से राहत दिलाने में मदद करता है।

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आंखों के लिए-

नियमित पपीते का सेवन करने से आंखों की रोशनी अच्छी रहती है।

प्लेग की स्थिति में –

प्लेग के आक्रमण की स्थिति में पपीते का सेवन 24 घंटे के भीतर संधियों को हटा देता है और प्लेग की गांठ को नरम करने की अद्भुत क्षमता रखता है। पपीते के 125 मिलीग्राम बीज को पानी में पीसकर हर दो से दो घंटे में रोगी को पिलाएं। यह उल्टी करके शरीर के सारे विष को नष्ट कर देता है। रोगी को लाभ मिलता है।

हैजा में –

250 मिलीग्राम पपीते के बीज को गुलाब जल के साथ पीसकर रोगी को दें। इसे दिन में 3 बार दें। अतिसार में – पपीते के आधे दाने पानी के साथ पीसकर पीने से अतिसार में लाभ होता है। विषैले जंतुओं के देश पर – विषैला प्रभाव होने पर पपीते के बीजों को पीसकर त्वचा पर लगाने से लाभ होता है।

गांठ पर –

शरीर पर किसी भी प्रकार की गांठ पर पपीते के बीज को पीसकर नियमित रूप से लगाने से लाभ होता है। 20 ग्राम कच्चे पपीते के रस का सेवन लगातार करने से भी गांठ समाप्त हो जाती है।

पेट के दर्द में-

जब आंतें जम जाती हैं तो आधे पके पपीते के बीजों को पीसकर पानी के साथ पीने से जमाव दूर हो जाता है।

चर्मरोग में

चर्म विकारों में खुजली या शरीर के किसी अंग में सुन्नता होने पर तिल के तेल में पपीता के बीज पीसकर , पकाकर छान लें तथा यह सिद्ध तेल रखें । इस तेल से प्रभावित अंगों की मालिश करने से लाभ होता है । कच्चे पपीते का दूध लगाने से दाद आदि चर्मरोग मिटते हैं ।

हड्डी के नुकसान पर

अस्थियों के क्षरण होने पर संधियों के दरद , अस्थि विकृति आदि व्याधियाँ जन्म लेती हैं । पपीता का नियमित सेवन अस्थियों को मजबूत बनाता है । इसका नित्य सेवन करने से संधियों की विकृति दूर होती है । में – जिन्हें बार – बार सरदी जुकाम , एलर्जी जैसे रोग सताते हैं , उन्हें नित्यप्रति पपीते का सेवन करना चाहिए ; इससे इम्युनिटी बढ़ती है , रोग नष्ट होते हैं ।

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अम्लपित्त में –

पपीता का फल सेवन करने से अम्लपित्त दूर होता है । जठराग्नि प्रदीप्त होती है । खट्टी डकार आनी बंद हो जाती हैं । यकृत एवं तिल्ली की वृद्धि भी मिटती है । पेट के कृमि रोग में पपीता के बीजों को 1

रत्ती की मात्रा में लेकर पीस लें , एक कप गरम पानी में घोलकर खाली पेट 8-10 दिनों तक सेवन करने से आंत्रकृमि नष्ट हो जाते हैं । कच्चे पपीते का रस भी 50 ग्राम नित्य खाली पेट सेवन करने से कृमि नष्ट हो जाते हैं ।

यकृत की कमजोरी में पपीता को लिवर टॉनिक कहा गया है । पीलिया इत्यादि यकृत ( लिवर ) के विकारों में पके हुए पपीता का नियमित सेवन करना चाहिए । पपीता यकृत – विकारों को नष्ट कर यकृत की कार्य – प्रणाली को ठीक करता है ।

बौनापन में

बौनापन में बच्चों की लंबाई बढ़ाने के लिए पपीता का नियमित सेवन करना चाहिए । इससे पोषक तत्त्वों की पूर्ति होती है ।

हृदय रोग में-

  1. पेड़ पर लगे कच्चे पपीते को चाकू से चीरा लगाने पर पपीते का दूध निकलता है । कच्चे पपीते का दूध 10-12 बूंद बताशे पर टपकाकर प्रातः सेवन करने से हृदय के लिए लाभप्रद होता है ।
  2. कच्चे पपीते की खीर बनाकर सेवन करना चाहिए ।
  3. (पपीते के 50 ग्राम हरे पत्तों को पानी में उबालकर बनाए काढ़े में सौंफ , इलायची , काली मिर्च तथा काले नमक को पीसकर बनाया पाउडर 3 ग्राम मिलाकर रात को सोते समय सेवन करना चाहिए । उपरोक्त उपचार हृदय रोगों में लाभप्रद हैं ।

पीरियड्स में

जिन महिलाओं को अनियमित या कष्टप्रद मासिकधर्म होता हो , उन्हें कच्चे पपीते का रस 100 ग्राम नियमित सेवन कराना चाहिए ।

कैंसर में

कैंसर में- कच्चे पपीते को सलाद के रूप में सेवन कराना तथा कच्चे पपीते को कसकर दही के साथ रायता बनाकर सेवन कराना चाहिए ।

मूत्र विकारो में

मूत्र विकारों में- पेशाब में जलन , दरद , संक्रमण , बहुमूत्र इत्यादि में पके पपीता का सेवन लाभकारी होता है ।

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चेहरे के सौंदर्य के लिए-

  • ( 1 ) कच्चे पपीते को काटकर उसका रस चेहरे की त्वचा पर रगड़ने से चेहरे के दाग , कालिमा , धब्बों , कील – मुंहासों पर रस लगाने से लाभ होता है ।
  • ( 2 ) पके पपीते को मसलकर , पेस्ट बनाकर चेहरे पर आधा घंटे तक लगाकर रखें तत्पश्चात स्वच्छ पानी से चेहरा धो लें तथा सूती कपड़े से पोंछकर चेहरे पर नारियल या तिल का तेल लगाएँ । यह प्रयोग नियमित करने पर लाभ होता है ।

डेंगू ज्वर में-

डेंगू ज्वर में रक्त के प्लेटलेट्स घट जाते हैं । 20 ग्राम गिलोय के रस के साथ पपीते के ताजे पत्तों का 20 ग्राम रस निकालकर दिन में दो बार तीन – चार दिनों तक देने से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ने लगते हैं ।

गेहूँ के जवारे का रस , गिलोय का रस तथा गुड़हल के पत्तों का रस एवं ग्वारपाठे ( एलोवेरा ) का रस भी प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए उपयोगी एवं सहायक होता है ।

पित्त की पथरी में-

यह पित्ताशय की पथरी के लिए प्रभावी प्रयोग है । पपीते की ताजी जड़ खोदकर लाएँ तथा गमले में गाड़ दें , ताकि नित्य प्रयोग के लिए ताजी बनी रहे । अब प्रतिदिन 5 ग्राम पपीता की जड़ धोकर साफ कर लें , तत्पश्चात पानी के साथ पीसकर छान लें तथा एक कप पानी के साथ निराहार प्रातः सेवन कराएँ ।

यह प्रयोग 21 दिन तक करें , फिर जाँच करा लें । पथ्य के रूप में मूली , खीरा , गाजर , संतरा , मौसमी का रस पीना लाभदायक होता है । नीबू का रस पानी के साथ प्रातः खाली पेट पीना चाहिए । –

अंतिम शब्द

इस लेख में आपको Papaya Benefits In Hindi  इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारिया मिली हमें यकीन है की आप सभी पाठको को यह काफी पसंद होगा

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Update on May 27, 2021 @ 7:11 am

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