Problem Ko Solve Kaise kare – समस्या का समाधान कैसे करे ?

Problem Ko Solve Kaise kare समस्याएँ हर किसी के जीवन में आती हैं , इनसे सभी को परेशानी भी होती है और कोई भी इनके प्रभाव से अछूता नहीं रह पाता । प्राय : समस्याओं की शुरुआत छोटे रूप में होती है , लेकिन उन्हें अनदेखा करने पर वो अपना बड़ा रूप लेने लगती हैं ।

प्रायः लोग आलस्य , टाल – मटोल या लापरवाही के कारण उन्हें बड़ा बनने का अवसर देते हैं , जैसे – समय पर बिल न भरना , शरीर या मन में पनप रही बीमारी पर ध्यान न देना , सामान की टूट – फूट ठीक न कराना आदि ।

यह सभी जानते हैं कि सिले हुए कपड़े की सिलाई यदि खुल गई है और उसे सिला न जाए तो देर सबेर उसकी सिलाई खुलती ही जाएगी , क्योंकि उसे खुलने का स्थान व कारण मिल गया है । ठीक इसी तरह हमारे जीवन में भी समस्याएँ छोटे रूप में प्रवेश करती हैं , लेकिन सही समय पर उन पर ध्यान न देने से उन्हें बिगड़ने का समय मिल जाता है और फिर वो एक विकराल रूप में हमारे सम्मुख प्रकट हो जाती हैं ।

Problem Ko Solve Kaise kare – समस्या का समाधान कैसे करे ?

एक समस्या अपने से जुड़ी हुई कई अन्य तरह की समस्याओं का कारण भी बन सकती है । कुछ समस्याएँ हमारी गलतियों के कारण पैदा होती हैं तो कुछ समस्याएँ उन गलतियों को बार – बार दोहराने के कारण पैदा होती हैं और कुछ समस्याएँ तो जाने – अनजाने पैदा हो जाती हैं ।

असली समस्या तब आती है , जब हमें उनका उचित समाधान नहीं मिलता और उस एक समस्या के कारण हमारी अनेक समस्याएँ निरंतर बढ़ती जाती हैं ।

अपनी समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए जब हम अपनी गलतियों को सुधारना चाहते हैं , तब उसमें भी हमें समय लगता है ; क्योंकि कई बार गलतियाँ सुधारने के बावजूद परिस्थितियाँ नहीं सँभलतीं ।

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ऐसी स्थिति में पछतावा करने के सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं रह जाता और फिर ऐसा लगता है कि काश , इसके बारे में पहले सोच लिया होता , तो ऐसी स्थिति नहीं आती ।

तनाव , डर और चिंता को कम करने की कोशिश करे

व्यक्ति जब तनाव में होता है , तब उस दौरान वह स्वयं पर नियंत्रण खोने लगता है । जैसे ही व्यक्ति अपने मन को स्वतंत्रता देता है यानी उसे कुछ भी करने का अवसर देता है , तो वह समस्याओं की भूमिका तैयार करने लगता है । ऐसी स्थिति में कभी अहंकार तो कभी असुरक्षा की भावना उसके विचारों में आती है । इस तरह व्यक्ति डर , तनाव और चिंता के चक्र से स्वयं को घेर लेता है ।

समस्या से जुडी घटना को सोचना बंद करे

जीवन में चिंताओं का वास्तविक कारण तो 10 प्रतिशत ही होता है , पर बाकी का 90 प्रतिशत हम अपनी कल्पनाओं के कारण खड़ा कर लेते हैं । इसलिए जीवन के परिदृश्य में हमारे नजरिये का बहुत असर पड़ता है । यदि हमारा मन चिंतित है , तो वह न तो ठीक ढंग से सोच पाता है और न ही दूसरों को ठीक ढंग से सुन व समझ पाता है । ऐसी स्थिति में वह एक बात को दूसरी बात से जोड़ने लगता है और अपनी ही पिछली बातें , घटनाएँ , कहानियाँ और पूर्वाग्रह दोहराने लगता है । इस तरह हमारा गलत नजरिया हमारी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने लगता है ।

दुसरो को दोष देना बंद करे

किसी भी समस्या के आने पर जो लोग केवल दूसरों को या अपने हालात को दोष देते हैं , वे भावनाओं में बहकर गलत निर्णय लेने लगते हैं । इसके विपरीत जो मौजूदा हालात की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हैं , वे बुरे हालातों से बाहर निकलने के लिए अपना मार्ग बना लेते हैं और विकल्पों की राह खोल इस तरह समस्या का स्वरूप क्या है ? यह देखने वाले के नजरिये पर निर्भर करता है ।

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अपने दोस्तों या अनुभवी लोगो से सलाह ले

किसी के लिए वह समस्या बड़ी हो सकती है तो किसी के लिए वह छोटी हो सकती है तो किसी के लिए वह निरर्थक हो सकती है । इसलिए किसी भी तरह की समस्या आने पर उसके लिए अन्य लोगों से सलाह लेना फायदेमंद होता है ; क्योंकि अन्य लोगों का उसी समस्या को देखने का नजरिया भिन्न हो सकता है और समाधान का तरीका भी कुछ नया हो सकता है , जिसे हम समस्या से घिरे होने पर सोच नहीं पाते ।

समय रिश्ते निभाने में जो समस्याएँ आती हैं , उनके लिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि दूसरों के प्रति कृतज्ञता का भाव अपने विश्वास और प्यार को बनाए रखता है । हमारी प्रतिक्रियाएँ प्रायः तभी गलत होती हैं , जब हमारा खुद पर या दूसरों पर भरोसा कम होने लगता है और ऐसे में कृतज्ञता का भाव हमारे इस भरोसे को बनाए रखता है ।

गुस्सा पर नियंत्रण करे

लोग अपना गुस्सा दूसरों पर उतारते हैं । यह भी एक तरह की प्रतिक्रिया है , जो किसी क्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न होती है । सामने वाला व्यक्ति जो दे • रहा होता है , वह उसकी समस्या है , पर यह विकल्प व्यक्ति के पास सदैव होता है कि वह उसे किस रूप में ले । हमेशा परिस्थिति एक जैसी नहीं रहती , गुस्सा आता भी है , तो वह एक सीमित समय के लिए होता है , पूरे दिन कोई भी व्यक्ति गुस्से के आवेश में नहीं रह सकता । परिस्थितियाँ बदलते ही मनःस्थिति को भी बदलना पड़ता है ,

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शांत रहने की कोशिश करे

जहाँ तक संभव हो अपनी प्रतिक्रियाएँ तुरंत देने से बचें , क्योंकि जल्दबाजी में दी गई प्रतिक्रियाएँ प्रायः बाद में पछतावा देती हैं । यदि बात बिगड़ती है , तो उसे कभी भी आवेश में आकर सुलझाया नहीं जा सकता , बल्कि उसे शांति के साथ ही सुलझाया जा सकता है , इसलिए माहौल को बिगाड़ने के बजाय उसे सँभालने पर ध्यान देना चाहिए । हर किसी की बात सुननी चाहिए और तभी निर्णय लेना चाहिए । जीवन में समस्याएँ अनेकों हो सकती हैं , पर यदि मन शांत रखा जाए तो प्रत्येक का समाधान संभव है ।

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