जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का वर्णन करें ।

उत्तर – जर्मनी के एकीकरण में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका बिस्मार्क की रही उसने सुधार एवं कूटनीति के अंतर्गत जर्मनी के क्षेत्रों का प्रशाकरण अथवा प्रशा का एकीकरण करने का प्रयास किया । वह प्रशा का चांसलर था । वह मुख्य रूप से युद्ध के माध्यम से एकीकरण में विश्वास रखता था । इसके लिए उसने रक्त और लौह की नीति का पालन किया । इस नीति से तात्पर्य था कि सैन्य उपायों द्वारा ही जर्मनी का एकीकरण करना । उसने जर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा लागू कर दी । जर्मनी के एकीकरण के लिए बिस्मार्क के तीन उद्देश्य थे

  1. पहला उद्देश्य प्रशा को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाकर उसके नेतृत्व में जर्मनी के एकीकरण को पूरा करना ।
  2. दूसरा उद्देश्य आस्ट्रिया को परास्त कर उसे जर्मन परिसंघ बाहर निकालना था ।
  3. तीसरा उद्देश्य जर्मनी को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाना था ।

जर्मनी के एकीकरण मे बिस्मार्क द्वरा किये गये कार्य

  1. सर्वप्रथम उसने फ्रांस एवं आस्ट्रिया से संधि कर डेनमार्क पर अंकुश लगाया
  2. बिस्मार्क ने आस्ट्रिया के साथ मिलकर 1864 में श्लेसविंग और हाल्सटाइन राज्यों के मुद्दे लेकर डेनमार्क पर आक्रमण कर दिया ।
  3. जीत के बाद श्लेसविंग प्रशा के तथा हाल्सटाइन आस्ट्रिया के अधीन हो गया । डेनमार्क को पराजित करने के बाद उसका मुख्य शत्रु आस्ट्रिया था ।
  4. बिस्मार्क ने यहाँ भी कूटनीति के अंतर्गत फ्रांस से संधि कर 1866 में सेडोवा के युद्ध में आस्ट्रिया को पराजित किया और पोप के अधिकार वाले सारे क्षेत्र को जर्मनी में मिला लिया ।
  5. अंततः , 1870 में सेडान के युद्ध में फ्रांस को पराजित कर फ्रैंकफर्ट की संधि की गई और फ्रांस की अधीनता वाले सारे राज्यों को जर्मनी में मिलाकर जर्मनी का एकीकरण पूरा हुआ ।