यूनानी स्वतंत्रता आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण दें ।

यूनान में राष्ट्रीयता का उदय यूनान का अपना गौरवमय अतीत रहा है जिसके कारण उसे पाश्चात्य राष्ट्रों का मुख्य स्रोत माना जाता था ।

                         यूनानी सभ्यता की साहित्यिक प्रगति , विचार , दर्शन , कला , चिकित्सा , विज्ञान आदि क्षेत्रों में उपलब्धियाँ पाश्चात्य देशों के लिए प्रेरणास्रोत थीं । पुनर्जागरण काल से ही पाश्चात्य देशों ने यूनान से प्रेरणा लेकर काफी विकास किया था , परन्तु इसके बावजूद यूनान अभी भी तुर्की साम्राज्य के अधीन था ।

                     फ्रांसीसी क्रांति से प्रभावित होकर यूनानियों में राष्ट्रवाद की भावना का विकास हुआ । धर्म , जाति और संस्कृति के आधार पर यूनानियों की पहचान एक थी , फलतः यूनान में तुर्की शासन से अपने को अलग करने के लिए कई आंदोलन चलाये जाने लगे । इसके लिए वहाँ हितेरिया फिलाइक ( Hetairia Philike ) नामक संस्था की स्थापना ओडेसा नामक स्थान पर की गई ।

                        यूनान की स्वतंत्रता का सम्मान समस्त यूरोप के नागरिक करते थे । इंगलैण्ड का महान कवि लॉर्ड बायरन यूनानियों की स्वतंत्रता के लिए यूनान में ही शहीद हो गया । इस घटना से संपूर्ण यूरोप की सहानुभूति यूनान के प्रति बढ़ चुकी थी । रूस जैसा साम्राज्यवादी राष्ट्र भी यूनान की स्वतंत्रता का समर्थक था । रूस तथा यूनान के लोग ग्रीक अर्थोडॉक्स चर्च को मानने वाले थे