लेखक किस विडंबना की बात करते हैं ? विडंबना का स्वरूप क्या है ?

उत्तर- लेखक आधुनिक भारतीय समाज की नींव को दीमक की तरह चाट रही जातिप्रथा की बात करते हैं जो हमारे राष्ट्र की उन्नति की सबसे बड़ी बाधा और विडंबना है । हमारे राष्ट्र की विडंबना का सबसे बड़ा स्वरूप है जाति – प्रथा ।