0

वामपंथी शब्द का प्रथम प्रयोग . फ्रांसीसी क्रांति में हुआ । 20 वीं शताब्दी के प्रारंभ से ही भारत में साम्यवादी एवं समाजवादी विचारधाराएँ फैलने लगीं । इन विचारों से जुड़े लोगों में श्रीपाद अमृत डांगे , मुजफ्फर अहमद , गुलाम हुसैन , मौलवी बरकतुल्ला प्रमुख थे । इन्होंने अपने पत्रों के द्वारा साम्यवादी विचारों का प्रसार किया । रूसी क्रांति के बाद साम्यवादी विचार भारत में तेजी से फैलने लगा ।

1920 में मानवेन्द्र नाथ राय ( एम ० एन ० राय ) ने ताशकंद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की । परन्तु भारत में अभी तक ये गुप्त रूप से काम कर रहे थे । असहयोग आन्दोलन के समय में पत्र – पत्रिकाओं के माध्यम से अपने विचारों का प्रसार किया तथा उग्रवादी राष्ट्रवादी आंदोलनों से भी अपना संबंध स्थापित किया ,

यही कारण था कि असहयोग आंदोलन के बाद सरकार ने इन लोगों का दमन करना शुरू किया तथा पेशावर षड्यंत्र केस ( 1922-23 ) , कानपुर षड्यंत्र केस ( 1924 ) , मेरठ षड्यंत्र केस ( 1929-33 ) के द्वारा 8 लोगों पर मुकदमा चलाया । आगे साम्यवादियों को कांग्रेस का समर्थन भी मिला , क्योंकि सरकार द्वारा चलाए गए ‘ पब्लिक सेफ्टी बिलं ‘ को काँग्रेस ने पारित नहीं होने दिया । यह कानून कम्युनिस्टों के विरोध में था । दिसम्बर , 1925 में सत्यभक्त ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की ।

मजदूर संघों के गठन के बाद 1920 में ‘ ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ( AITUC ) की स्थापना हुई लेकिन 1926 में इसमें विभाजन हो गया तथा 1929 में एम ० एन ० जोशी ने ‘ ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन फेडरेशन ‘ ( AITUF ) का गठन कर लिया । इस तरह वामपंथ का प्रसार मजदूर संघों पर बढ़ने लगा । किसान – मजदूर पार्टी की स्थापना करके किसानों को भी साम्यवाद से जोड़ने का प्रयास किया गया ।

लेबर स्वराज्य पार्टी भारत की प्रथम किसान – मजदूर पार्टी थी । दिसम्बर , 1928 में अखिल भारतीय मजदूर किसान पार्टी बनी । आगे कांग्रेसियों पर भी साम्यवादी प्रभाव पड़ने लगा । इनमें जवाहरलाल नेहरू , सुभाषचन्द्र बोस , राम मनोहर लोहिया , नरेन्द्र देव , जयप्रकाश नारायण , अच्युत पटवर्धन प्रमुख थे । अक्टूबर , 1934 में बंबई में कांग्रेस समाजवादी दल की स्थापना की गई । इससे पूर्व बिहार में 1931 में बिहार समाजवादी दल की स्थापना जयप्रकाश नारायण द्वारा किया जा चुका था ।

Changed status to publish