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घन :—

एक ऐसी त्रिआयामी आकृति को कहा जाता है जिसकी लम्बाई, चौड़ाई एवं ऊँचाई सामान होती हैं। एक घन में छः फलक, बारह किनारे एवं आठ कोने होते हैं।

घन के गुणधर्म :

  1. शीर्ष : शीर्ष वह कोना होता है जहां तीन रेखाएं जो कि एक घन के किनारे होते हैं वे आकर मिलते हैं। एक घन में आठ किनारे होते हैं।
  2. किनारे : एक घन में बारह किनारे होते हैं। ये किनारे फलकों की भुजाएं होती हैं। एक घन के बारह के बारह  किनारे समान लम्बाई के होते हैं।
  3. फलक विकर्ण : फलक विकर्ण वे रेखा खंड होते हैं जो विपरीत शीर्षों को जोड़ते हैं। हर एक फलक के किनारे के दो विकर्ण होते हैं तो कुल 12 विकर्ण होते हैं।

घनाभ :–

एक ऐसी त्रिआयामी आकृति है जिसके 6 आयताकार फलक होते हैं। इसी वजह से ऐसी आकृतियों को बहुफलक भी कहा जाता है

 घनाभ के गुणधर्म 

  1. एक घनाभ के छः फलक होते हैं।
  2. एक घनाभ के सभी कोण समकोण होते हैं।
  3. इसके सभी फलक आयताकार होते हैं।
  4. सभी फलकों का आयताकार होने से तात्पर्य हैं कि हर फलक के जो चार आयाम होते हैं उनमे से एक एक युगल बराबर होना चाहिए। जैसा अगर हम एक ऊपर वाला फलक लेते हैं जिसके आयाम चौड़ाई एवं लम्बाई होंगे। अब आयताकार होने से मतलब है कि उस फलक की 2 चौड़ाई बराबर एवं 2 लम्बाई बराबर होनी चाहिए।
  5. अगर चौड़ाई एवं लम्बाई  बराबर हो जाए तब यह ये एक वर्ग हो जाएगा लेकिन तब भी यह एक घनाभ भी कहलायेगा। क्योंकि यह घनाभ होने की शर्तें पूरी कर रहा है।
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