उत्तर – लेखक विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए जाति – प्रथा को एक हानिकारक प्रथा के रूप में चित्रित किया है । उदाहरणतः जाति प्रथा समाज को विभिन्न स्तरों पर विभाजित करती है , बेरोजगारी बढ़ाती है , ऊँच – नीच के भाव पैदा होते हैं , व्यक्तिगत क्षमता प्रभावित होती है , साथ ही आचरण के प्रतिकूल पेशे से आजीवन यह बांध देती है ।