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लेखक आधुनिक भारतीय समाज की नींव को दीमक की तरह चाट रही जातिप्रथा की बात करते हैं जो हमारे राष्ट्र की उन्नति की सबसे बड़ी बाधा और विडंबना है । हमारे राष्ट्र की विडंबना का सबसे बड़ा स्वरूप जाति – प्रथा

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