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जातिवाद के पोषकों का उसके पक्ष में तर्क है कि आधुनिक सभ्य समाज कार्य कुशलता के लिए श्रम विभाजन आवश्यक मानता है । इसमें कोई बुराई नहीं है कि जाति – प्रथा श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है ।

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