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लेखक आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या यह मानता है कि- ” बहुत से लोग ‘ निर्धारित ‘ कार्य को ‘ अरुचि ‘ के साथ केवल विवशतावश करते हैं । क्योंकि ऐसी स्थिति स्वभावतः मनुष्य को दुर्भावना से ग्रस्त रहकर टालु काम करने और कम काम करने के लिए प्रेरित करती है । ” फलतः यह गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या है ।

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