Safalta Kaise Milti Hai – लाइफ में सक्सेस होने के उपाय

Safalta Kaise Milti Hai – लाइफ में सक्सेस होने के उपाय

Safalta Kaise Milti Hai जीवन में हर व्यक्ति सफलता प्राप्त करना चाहता है , लेकिन सफलता उसी को मिलती है ; जो इसके लिए पूरी लगन व कौशल के साथ भरपूर मेहनत करता है । सफलता प्राप्ति के लिए केवल कड़ी मेहनत करना ही पर्याप्त नहीं होता । इसके लिए लगन और कौशल भी चाहिए । लगन ऐसी होनी चाहिए कि व्यक्ति का ध्यान अपने लक्ष्य से कभी भी ओझल न हो ।

कड़ी मेहनत और लगन से

कौशल का संपुट कार्य की खूबसूरती व अभिव्यक्ति को निखारने के लिए आवश्यक होता है । इसके अलावा कड़ी मेहनत ही व्यक्ति के लिए वह मार्ग बनाती है , जिस पर चलकर व्यक्ति सफलता तक पहुँचता है । इस तरह लगन , कौशल व कड़ी मेहनत तीनों के द्वारा ही व्यक्ति अपनी सफलता की राह में आगे बढ़ पाता है । जो व्यक्ति इन तीनों में से किसी एक को अपनाकर सफलता प्राप्ति का प्रयास करते हैं , उन्हें अधूरी सफलता ही हाथ लगती है ।

उदाहरण के लिए यदि व्यक्ति के पास लगन है तो वह कार्य करता रहता है व कार्य करने में पूरी तरह से जुटा रहता है , लेकिन उसके लिए कड़ी मेहनत नहीं करता । कुशलता की भी उसमें कमी है तो कार्य में सफलता भी उसे पूरी तरह नहीं मिल पाती ।

कौशलता से

यदि व्यक्ति के अंदर किसी भी कार्य को करने का कौशल है और उसे यह पता है कि कार्य को अच्छी तरह से कैसे करना है , लेकिन उसके अंदर न तो कार्य के प्रति लगन है और न ही वह इसके लिए कड़ी मेहनत करता है तो ऐसे व्यक्ति को भी सफलता नहीं मिल पाएगी । इसके अलावा यदि व्यक्ति बहुत कड़ी मेहनत करता है ,

लेकिन उसके पास लगन व कौशल की कमी है तो वह अपने कार्य को लंबे समय तक नहीं कर पाएगा । लगन न होने के साथ वह पूरे मन से कार्य नहीं कर पाएगा और बस , आधे – अधूरे मन से मेहनत करेगा । अतः उसे भी अपने कार्य में पूरी तरह सफलता नहीं मिल पाएगी ।

ध्यान भी है जरुरी

कभी – कभी सफलता प्राप्ति के लिए कड़ी मेहनत करने की भी जरूरत नहीं होती । कड़ी मेहनत करने की जरूरत उन्हें होती है , जिनके लिए सफलता प्राप्ति का कार्यक्षेत्र नया है । जो अपने कार्य से पहले से परिचित हैं । उसमें कुशलता प्राप्त कर चुके हैं । उन्हें केवल ध्यान के साथ मेहनत करने की जरूरत होती है , कड़ी मेहनत करने की जरूरत नहीं ।

सही दिशा में कार्य करे

हम यदि किसी कार्य को करने में कड़ी मेहनत करें , परंतु वह मेहनत सही दिशा में न हो तो उस मेहनत का कोई अर्थ नहीं रह जाता । उदाहरण के लिए यदि हमें पानी निकालने हेतु कुआँ खोदना है तो हमें एक ही स्थान पर गहराई में कुआँ खोदना होगा ।

इसमें कुआँ खोदना कड़ी मेहनत का काम है , लेकिन यदि किसी व्यक्ति को इस बात का पता नहीं है और उसे बस यह पता है कि पानी निकालने के लिए उसे मिट्टी खोदना है और वह जमीन को गहराई में खोदने के बजाय उसकी लंबाई में मिट्टी खोदता चला जाए तो उससे कुआँ नहीं खुदेगा , बल्कि ऐसा करने से नाली जरूर खुद जाएगी , इसलिए सफलता के लिए की गई मेहनत सही दिशा में होनी चाहिए ; अन्यथा हमें इसके सुपरिणाम नहीं मिलते ।

हर जाने की चिंता से दूर रहे

कई बार लोग जब सफलता प्राप्ति के लिए किसी कार्य को करते हैं तो इस बात की चिंता भी करते रहते हैं कि उन्हें अपने कार्य में सफलता मिलेगी भी या नहीं । सफलताप्राप्ति की यह चिंता तब और भी बढ़ जाती है , जब कोई खेल खेला जाता है । प्रतिपक्ष में कोई और होता है या टीम होती है ।

फिर उस खेल में हार या जीत का प्रश्न होता है । लाखों लोगों की नजरें उस खेल के प्रति होती हैं । हर कोई जीत के लिए ही खेलता है , लेकिन खेल में जीत किसी एक टीम को या किसी एक व्यक्ति को ही मिलती है । खेल खेलते समय यदि किसी का ध्यान केवल सफलता की ओर होता है तो वह एक तरह से मन में तनाव रखकर खेलता है और ऐसी स्थिति में वह न तो खेल का आनंद ले पाता है और न ही अपनी जीत की दिशा में सही प्रयास कर पाता है ; क्योंकि खेल का आनंद लेते हुए कुशलता के साथ खेलने वालों की ही खेल में जीत होती है । इसलिए सफलता के बारे में चिंता करना छोड़कर मन को शांत रखना जरूरी है ।

इस शांत मन में ही शरीर अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करता है । अक्सर देखा यह जाता है कि लोग प्रायः कार्य के दौरान अपने मन से अस्थिर व चंचल रहते हैं । ऐसे में शरीर पूरी एकाग्रता के साथ कार्य नहीं कर पाता और परिणाम यह होता है कि व्यक्ति पूरी तरह से अपने कार्य में सफल नहीं हो पाता ।

हमेसा जीतने की भावना न रखे

जीत या सफलता पर व्यक्ति का ध्यान लगातार बना रहने पर उसके मन पर एक दबाव – सा बना रहता है । उसके मन में यह द्वंद्व रहता है कि उसकी मेहनत रंग लाएगी या नहीं । वह सफल होगा कि नहीं । वह जीतेगा या नहीं । इस तरह मन में दबाव रखकर कार्य करने या खेल खेलने से व्यक्ति उन्मुक्त होकर अपनी कार्यकुशलता का प्रदर्शन नहीं कर पाता ।

फलतः उसे असफलता या हार का सामना करना पड़ता है । विद्यार्थीगण प्रायः परीक्षा के समय तनाव में आते हैं ; क्योंकि उनकी परीक्षा ही यह निर्धारित करती है कि उनके द्वारा साल भर की गई पढ़ाई में वो सफल हुए हैं या असफल और इसलिए उनकी चिंता परीक्षा व परीक्षा के परिणाम के समय बढ़ जाती है ।

मेहनत कभी बेकार नहीं जाता

विद्यार्थियों को तो साल भर पढ़ने के बाद या सत्रांत परीक्षाओं में छह महीने पढ़ने के बाद परीक्षा देनी होती है और उसमें सफल होने की प्रतीक्षा करनी होती है , लेकिन जो लोग मैच खेलते हैं और उस खेल में बड़ा पुरस्कार मिलने वाला होता है तो पुरस्कार जीतने के लिए खेलने वाली टीम में और टीम लीडर के मन में तनाव व दबाव होता है ।

खेल खेलने वाली टीम के लोग खेल को मात्र आनंद के लिए नहीं खेलते , बल्कि पुरस्कार जीतने के लिए भी खेलते हैं ।

यदि जीत जाते हैं तो पुरस्कार मिलने के कारण खुश होते हैं और यदि हार जाते हैं तो पुरस्कार न मिलने के कारण दुःखी होते हैं और यह सोचकर भी दुःखी होते हैं कि खेल के दौरान उनके द्वारा की गई मेहनत व्यर्थ चली गई , लेकिन गौर से देखा जाए तो व्यक्ति द्वारा की गई मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती ,

बल्कि उसे कुछ – न – कुछ सिखाकर ही जाती है । उसकी कमियों व गलतियों को भी उजागर करती है , जिन्हें यदि दूर किया जा सके तो सफलता मिलना संभव है ।

अतः सफलता के लिए यह जरूरी है कि व्यक्ति अपने मन को एकाग्र कर उसे शांत करके परिणाम की चिंता किए बगैर अपनी कमियों व गलतियों को दूर करते हुए पूरी लगन व कुशलता के साथ कार्य करे तो ऐसे में सफलता अवश्य मिलती है ।

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