Self Confidence Kaise badhaye – आत्मविश्वास बढ़ाने के उपाय

Self Confidence Kaise badhaye जीवन के किसी भी क्षेत्र में आत्मविश्वास सफलता प्राप्ति का प्रमुख आधार है । यह आत्मविश्वास प्रारंभ से ही हमारे साथ हो यह आवश्यक नहीं । इसका होना कई कारकों पर निर्भर करता है । सबके आत्मविश्वास के अपने – अपने दायरे होते हैं ।

यह व्यक्ति की प्रकृति , स्वभाव , उसके परिवेश , पारिवारिक – सामाजिक पृष्ठभूमि आदि पर निर्भर करता है , लेकिन इतना सुनिश्चित है कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में यदि कोई चाहे तो आत्मविश्वास को बढ़ा सकता है एवं एक मनचाहा सफल जीवन जी सकता है ।

Self Confidence Kaise badhaye – आत्मविश्वास बढ़ाने के उपाय

आत्मविश्वास का अभाव हमारे विचार , भाव , व्यवहार एवं शरीर को प्रभावित करता है तथा इनके माध्यम से प्रकट भी होता रहता है ।ऐसे में हमारी सोच रहती है कि यह काम बहुत कठिन है , हम इसे नहीं कर सकते ।

मुझे नहीं मालूम कि यह कैसे होगा , शायद मैं इसे नहीं कर पाऊँगा या दूसरे मुझसे बेहतर कर लेंगे आदि । इसके साथ उद्विग्नता , चिंता , भय , स्वयं के प्रति आक्रोश एवं कुंठा , परिस्थिति से अज्ञात सा भय , असंतोष , हतोत्साहित अनुभव करना आदि भावनाएँ पनपती हैं ।

इसके साथ कार्य में कम सक्रियता , कोई सुझाव देने में कठिनाई , धीमी शुरुआत , जीवन में परिवर्तन के लिए कुछ भी नया करने से बचना , जवाब जानते हुए भी दूसरों से सहायता या सलाह माँगना , दुविधा एवं सतत प्रोत्साहन की आवश्यकता अनुभव करना , पिछलग्गू बने रहना , दूसरों से आश्वासन की आशा रखना आदि इसके व्यावहारिक लक्षण रहते हैं ।

इसके साथ संकुचित एवं सिमटी हुई भावमुद्रा , लोगों से आँख न मिला पाना , सकपकाना , तनाव , उद्धिग्नता , ढीलापन , आलस्य आदि इसके शारीरिक लक्षण रहते हैं ।

यदि व्यक्ति चाहे तो इस स्थिति से ऊपर उठ सकता है । जब व्यक्ति आत्मविश्वास की कमी अनुभव करता है और इसके पार होने की इच्छा जागती है तो इसके बारे में विचार करता है ।

स्वयं व दूसरों को गौर से देखता है , इस पर लोगों से चर्चा करता है , इससे संबंधित प्रेरक पुस्तकों का अध्ययन करता है । उनके उदाहरण से यह समझने का प्रयास करता है कि किस तरह लोगों ने इसका सामना किया , इससे संघर्ष किया और इसके पार होकर एक सफल और आत्मविश्वासपूर्ण जीवन जिया ।

अपने रूचि वाले क्षेत्र का अनुभव करे

आत्मविश्वास पर विचार करने पर स्पष्ट होता है कि आत्मविश्वास कोई ऐसा तथ्य नहीं , जो किसी एक क्षेत्र से जुड़ा हो । सबके आत्मविश्वास का अपना – अपना क्षेत्र होता है ।

कोई हाथ में कलम – कागज के साथ तो कोई मंच पर , कोई एकांत में तो कोई भीड़ में , कोई पर्वत शिखर पर तो कोई सागर की लहरों के बीच आत्मविश्वास से लबरेज अनुभव करता है । सबके भिन्न – भिन्न क्षेत्र होते हैं , जहाँ वह अधिक आत्मविश्वासी अनुभव करता हो।

अत : आत्मविश्वास पर समग्र मूल्यांकन की आवश्यकता है । किसी भी व्यक्ति को पूरी तरह से आत्मविश्वासहीन नहीं कह सकते । यह समझ हीनता से बाहर निकलने का रास्ता खोलती है ।

लोग जितना बाहर से आत्मविश्वास से भरे दिखते हैं , जरूरी नहीं कि वो अंदर से भी उतना हों । प्रायः वे अंदर से कम ही होते हैं ।

अधिकांशतः वे अपना पूरा साहस बटोरकर परिस्थिति का सामना कर रहे होते हैं । यह समझ भी आत्मविश्वास – निर्माण का आधार बनती है । जहाँ खड़े हैं , वहीं से साहस व समझ के साथ आगे बढ़ना इसका राजमार्ग समझ आता है ।

अभ्यास करना सीखे

वस्तुतः आत्मविश्वास अभ्यास से अर्जित होता है , जो कहीं आसमान से नहीं टपकता । मात्र सोचने , कल्पना करने , स्वप्न देखने भर से आत्मविश्वास नहीं आ जाता । जिस भी क्षेत्र में हम आत्मविश्वास की कमी अनुभव करते हैं , उस क्षेत्र में छोटी – छोटी सफलताओं को अर्जित करने के साथ यह विश्वास पनपता है , विकसित होता है और अंततः बुलंदियों को छूता है ।

अपेक्षाएं रखना बंद करे

व्यक्ति स्वयं को जैसा मानता है , जितना मूल्य देता है , लोग भी उसी के अनुरूप व्यवहार करते हैं । प्रायः आत्मविश्वास की कमी में हमारी स्वयं से कुछ ज्यादा ही आशा – अपेक्षा और स्वयं की कमियों व गलतियों को माफ : न करने की प्रवृत्ति रहती है ।

खुद को हमेशा गलत न समझे

हर गलती के लिए स्वयं को : जिम्मेदार मानना उचित नहीं रहता ; जबकि स्वयं को समग्रता : में समझते हुए , स्वयं की त्रुटियों के प्रति थोड़ा उदार व्यवहार : बरतते हुए इनको अधिक सहजता से लेते हुए आगे बढ़ा जा सकता था कहने की आवश्यकता नहीं कि आत्मविश्वास अभ्यास के साथ बढ़ता है ।

जैसे शरीर की मांसपेशियाँ नियमित निरंतर कसरत करने से विकसित होती हैं तथा एक गठीले शरीर के रूप में परिणाम देती हैं ऐसे ही जहाँ हम विश्वास की कमी से जूझ रहे हों , वहाँ धीरे – धीरे अभ्यास के साथ इसमें सुधार किया जा सकता है ।

बचपन में चलने से लेकर कोई वाहन चलाना व तैराकी आदि व्यक्ति इसी तरह सीखता है । अपनी क्षमता के अनुरूप हम परिस्थिति का सामना करते हैं , बोझ को उठाते हैं , स्वयं को कसते हैं और आगे बढ़ते हैं ।

इसी क्रम में आत्मविश्वास से युक्त व्यवहार का अभ्यास किया जा सकता है । परिस्थिति विशेष में जहाँ हम विचलित होते हैं , वहाँ विचार कर सकते हैं कि यदि हम विश्वासयुक्त होते तो कैसा व्यवहार करते ।

इसी के साथ यह भी कल्पना कर सकते हैं कि कोई आत्मविश्वासपूर्ण व्यक्ति अमुक परिस्थिति में कैसा व्यवहार करता । अपनी सोच के साथ अपने व्यवहार एवं हाव – भाव में ऐसा ही होने का प्रयास करें ।

धीरे – धीरे आत्मविश्वास हमारे जीवन का अंग बनने लगेगा । इस प्रयास में सब कुछ अनुकूल ही होगा , आवश्यक नहीं । इसमें उतार – चढ़ाव भरे दौर भी आएँगे , जिनके लिए तैयार रहें । एक प्रयोगधर्मी साधक के रूप में देखें कि क्या काम करता है और क्या नहीं । परिस्थिति के अनुरूप स्वयं को आजमाने का प्रयास करते रहें । साहस के साथ नए कदमों को बढ़ाते रहें , जोखिम लेते रहें और लचीलेपन एवं विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहें । इसमें बहुत कट्टर होने की आवश्यकता नहीं ।

गलतियों से सीखे

सफलता व असफलता मिलकर आत्मविश्वास के विकास को अंजाम देती हैं – दोनों को स्वीकार करें व आगे बढ़ें । इस रास्ते में गलतियाँ होंगी , लेकिन गलती तब तक गुनाह नहीं , जब तक आप इनसे सीखकर आगे बढ़ रहे हों । बार – बार एक ही गलती करना और इससे कुछ नहीं सीखना , यह तो उचित नहीं । हमारा सूत्रवाक्य होना चाहिए – पुनः कोशिश करो , फिर असफल हो , लेकिन बेहतरीन तरीके से । ऐसे में हर असफलता के साथ आप आगे बढ़ते रहें ।

गलतियाँ वास्तव में सीखने के लिए होती हैं । जो कोई गलती नहीं करता , वह या तो एक सिद्ध है या उसका विकास अवरुद्ध हो चुका है । प्रगति- – पथ पर व्यक्ति गलतियों के साथ ही आगे बढ़ता है ।

असफलताओ के कारण अपने आप को कमजोर न करे

अपनी पुरानी गलतियों , असफलताओं और बेवकूफियों के लिए स्वयं को दंडित करना व्यक्ति को आंतरिक रूप से कमजोर करता है । ऐसा करना स्वयं के : प्रति हीनता के भाव को बल देता है । इस तरह हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाने वाले प्रयास को आवश्यक पोषण नहीं मिल पाता ।

अतः स्वयं को कोसना बंद करें । इसके विपरीत सदा ही स्वयं को आशा – उत्साहपूर्ण संदेशों को सुनाते रहें , अपने कानों में विश्वासपूर्ण बातों को फुसफुसाते रहें , जैसे कि अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना हो । ऐसे संदेशों को तीव्र कर दें , ताकि आप इन्हें स्पष्ट रूप से सुन सकें । इसके साथ ही अपने प्रति उदारभाव रखें ।

स्वयं को कोसना बंद करे

यह आत्मविश्वास बढ़ाने का एक महत्त्वपूर्ण अभ्यास है । स्वयं को हमेशा कोसते रहना एक बहुत बुरी आदत है , जो अच्छे कार्यों के लिए स्वयं को पुरस्कृत करने से वंचित करती है । अतः अपने प्रति अनावश्यक रूप से कठोरता को त्यागें व अपने हर अच्छे कार्य को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करें । आप पाएँगे कि अपने साथ सही व्यवहार आत्मविश्वास को बढ़ाने में आश्चर्यजनक रूप से सहायक सिद्ध हो रहा है ।

उम्मीद करते है इस लेख से Self Confidence Kaise badhaye – आत्मविश्वास बढ़ाने के उपाय  को काफी अच्छे से समझा होगा , आशा करते है , आपकी मनोकामना पूर्ण हो

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