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Swasthya Kaise Rahe – हमेशा स्वस्थ रहने के घरेलू उपाय

Swasthya Kaise Rahe

Swasthya Kaise Rahe हमारे शरीर का स्वस्थ्य होना हमारे जीवन में काफी महत्वपूर्ण है , यदि हम स्वास्थ्य रहते है , तो हम कोई भी काम काफी जल्दी और कम समय में कर पाते है ,

और यही यदि हमारी तबियत अकसर बिगड़ती है , तो हम बने बनाये काम को भी बिगाड़ सकते है , इसलिए हमारा स्वस्थ होना हमारे दैनिक जीवन में अत्यंत ही मत्वपूर्ण है।

आपने कई बार यह कहावत जरूर ही सुना होगा की स्वस्थ ही सबसे बड़ा धन है , लेकिन कई लोग इस दुनिया में ये बातो को अनदेखी कर देते है , और जिसके कारण वश वो कई अलग अलग तरह की बीमारियों की चपेट में आ जाते है ,

हम आपको आज कुछ ऐसे दैनिक जीवन में लागू होने वाले घरेलु उपायों के बारे में आपको बताएंगे , जिसकी मदद से आप अपने दैनिक जीवन में कैसे स्वस्थ रह सकते है , इसके बारे में जान पाएंगे।

Swasthya Kaise Rahe – हम स्वस्थ कैसे रह सकते हैं

हम स्वस्थ कैसे रह सकते हैं आपके माता – पिता अक्सर आप को इस बात की सलाह देते हैं कि आप अपने शरीर को किस प्रकार स्वस्थ तथा रोगमुक्त रख सकते हैं ।

स्वास्थ्य ( स्व = स्वयं , स्थ = स्थित होना ) का अर्थ है अपने आप में शारीरिक और मानसिक रूप में इस प्रकार स्थित होना कि बाहरी वातावरण का कुप्रभाव शरीर पर न पड़े ।

किसी व्यक्ति के अच्छे स्वास्थ्य का अर्थ है कि वह सभी प्रकार के बीमारियों से मुक्त हो तथा शारीरिक और मानसिक , सभी कार्यों को ठीक ढंग से करता हो ।

एक स्वस्थ मनुष्य ही अपने शरीर को सभी मौसमों और परिस्थितियों में सुरक्षित रख सकता है । वह मानसिक तनाव को भी अच्छी तरह झेल सकता है ।

पौष्टिक आहार का सेवन करे।

पौष्टिक आहार – शरीर को स्वस्थ बनाए रखने का मूल शर्त पौष्टिक आहार है । पौष्टिक आहार का अर्थ वैसे भोजन से है जिसमें शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक सभी तत्त्व उपस्थित हों ।

जैसे किसी व्यक्ति के भोजन में चावल , दाल , रोटी , सलाद , दही या मट्ठा , दूध , सब्जियाँ तथा घी , तेल की उचित मात्रा सम्मिलित है तो उस व्यक्ति का भोजन आवश्यक पोषक तत्त्वों का एक अच्छा मिश्रण है ।

इस भोजन में चावल और रोटी कार्बोहाइड्रेट है ; दाल , दूध , दही , प्रोटीन है एवं घी , तेल वसा है । सलाद , सब्जियाँ विटामिन और खनिज हैं । इनसे शरीर को सभी पोषक तत्त्व मिल जाते हैं एवं भोजन संतुलित बन जाता है ।

संतुलित आहार का अर्थ बढ़िया और स्वादिष्ट भोजन नहीं है , बल्कि ऐसा भोजन है जिसका सेवन कर मनुष्य सभी आवश्यक पोषक तत्त्व प्राप्त करता है । साथ ही , अपने भूख को भी संतुष्ट कर लेता है ।

संतुलित आहार में उचित अनुपात में कार्बोहाइड्रेट , प्रोटीन , वसा , विटामिन तथा खनिज लवण होना चाहिए । इनके अतिरिक्त आहारनाल के ठीक प्रकार से कार्य करने के लिए आहार में कुछ रेशेदार खाद्य पदार्थ , जिसे रुक्षांश कहते हैं , होना चाहिए ।

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अच्छे से बैठकर आराम से भोजन करे

ऐसा माना जाता है कि बैठकर दोनों पैरों को एक – दूसरे के विपरीत मोड़कर भोजन करने की मुद्रा , खड़े होकर भोजन करने की अपेक्षा ज्यादा स्वास्थ्यकर है । उसी प्रकार जल्दी – जल्दी बगैर अच्छी तरह से चबाए भोजन निगलना भी स्वास्थ्यकर नहीं है ।

व्यायाम करे

इन दिनों बच्चों में कुछ भोजन जो ‘ फास्ट – फूड ‘ के नाम से जाने जाते हैं , जैसे नूडल , पिज्जा , आलूचिप्स आदि , बहुत प्रचलित है । साथ ही चॉकलेट , आइसक्रीम तथा कृत्रिम सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन धड़ल्ले से किया जा रहा है ।

ऐसे भोजन असंतुलित होते हैं , क्योंकि इनमें प्रोटीन तथा खनिज नहीं होते हैं । इनके अधिक सेवन से शरीर स्थूल हो जाता है । इस स्थिति में शरीर के लिए व्यायाम अति आवश्यक हो जाता है ।

व्यायाम शरीर को स्वस्थ रखने में शारीरिक श्रम तथा व्यायाम का महत्वपूर्ण योगदान होता है । व्यायाम से शरीर में रक्त संचार तथा साँस की गति बढ़ जाती है । इससे शरीर के सभी अंगों को शुद्ध रक्त तेजी से पहुँचता है । व्यायाम से फेफड़े , हृदय , मांसपेशियाँ जैसे नाजुक अंग स्वस्थ रहते हैं ।

खेलकूद के अलावा दौड़ना , तेज गति से टहलना , साइकिल चलाना , तैरना , रस्सी कूदना इत्यादि शारीरिक व्यायाम के कुछ प्रचलित तरीके हैं । नृत्य से भी शरीर का अच्छा व्यायाम होता है ।

आधुनिक व्यायामशाला में व्यायाम के लिए कई प्रकार के उपकरण होते हैं , जो संपूर्ण शरीर का वैज्ञानिक ढंग से व्यायाम कराते हैं । स्वास्थ्य के लिए योगासन अत्यंत लाभकारी है ।

नियमित रूप से योगासन करने से शरीर की सारी क्रियाएँ सुचारु ढंग से चलती हैं । परंतु , योगासन का अभ्यास प्रारंभ में किसी योग्य प्रशिक्षक के देखभाल में करना चाहिए , क्योंकि योगासन की सही विधि न अपनाने से शरीर को कई प्रकार से नुकसान होता है और शरीर में विकृतियाँ आ जाती हैं ।

अधिक पानी पिए

पेयजल -स्वस्थ शरीर के लिए पेयजल का भी विशेष महत्त्व है । शरीर में जल सबसे अधिक मात्रा में विद्यमान होता है एवं आवश्यक जल की पूर्ति पेयजल से ही होती है ।

एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन औसतन 2-3 लीटर ( करीब 8-10 गिलास ) जल पीना चाहिए ।

शारीरिक श्रम करनेवाले तथा शुष्क वातावरण वाले स्थानों में रहने वाले मनुष्यों को और अधिक पेयजल की आवश्यकता होती है । आवश्यकता से कम जल पीने वाले व्यक्ति को बहुत जल्दी थकान महसूस होने लगती है । ऐसे व्यक्ति को मानसिक कमजोरी भी हो जाती है । किडनी ( वृक्क ) तथा पित्त की थैली में पत्थर बन जाते हैं तथा मूत्र त्याग करने में भी कठिनाई होने लगती है ।

साबुन से हाथ अच्छे से धोये

1. हम सभी कार्यों के लिए हाथ का ही इस्तेमाल करते हैं । अतः , हमारा हाथ हमेशा गंदा होता रहता है । सूक्ष्म रोगाणु भी हमारे हाथों को अकसर संक्रमित करते रहते हैं । अतः , स्वच्छ पानी और साबुन से हाथों की सफाई आवश्यक है । भोजन करने के पहले और बाद तथा शौच के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से साफ करना आवश्यक है ।

नाख़ून को समय पर काटते रहे

2. हाथों के साथ – साथ नाखून भी साफ होना चाहिए । इन्हें समय – समय पर काटते रहना चाहिए । ऐसा न करने पर लंबे नाखूनों के नीचे गंदगी जम जाती है , जो अस्वास्थ्यकर है । दाँतों से नाखून काटने की आदत से भी बचना चाहिए । पैरों के नाखूनों को भी समय – समय पर काटना अनिवार्य है ।

आँखों को साफ़ और ठन्डे पानी से धोये

आँखें शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग हैं । अतः , इनकी उचित देखभाल बहुत जरूरी है । आँखों को साफ तथा ठंडे जल से हमें प्रतिदिन कम – से – कम एक बार अवश्य धोना चाहिए । आँखों को धूल या इन जैसे बाहरी पदार्थों से बचाना चाहिए । यदि आँख में धूलकण या छोटा कीड़ा घुस जाए तो आँख को हाथ या किसी कपड़े से रगड़ना नहीं चाहिए , बल्कि इसे साफ एवं ठंडे पानी से साफ करना चाहिए । बहुत तेज या कम रोशनी तथा चलते वाहन , जैसे रेल , बस , मोटरगाड़ी में नहीं पढ़ना चाहिए ।

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कान की सफाई उचित तरह से करे

4. कानों की उचित देखभाल स्वास्थ्यकर जीवन के लिए आवश्यक है । कान के मैल की सफाई दियासलाई की तीली या पिन जैसे नुकीले वस्तु से कभी नहीं करनी चाहिए । इससे कान का पर्दा के फटने का भय बना रहता है , जिससे बहरापन भी हो सकता है । इसके लिए रूई या बहुत ही कोमल कपड़े का व्यवहार करना चाहिए । कान के बहने पर तुरंत अनुभवी चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए ।

नक् की नियमित सफाई करे

5. हमें अपने नाक की नियमित सफाई करनी चाहिए । नाक के अंदर किसी बाहरी वस्तु को कभी नहीं डालना चाहिए ।

रोजाना दांतो को साफ़ करे

6. दाँतों को भलीभाँति साफ नहीं करने पर भोजन के अंश अकसर दाँतों के बीच फँसे रह जाते हैं या दाँतों से चिपके रहते हैं । इनकी सफाई न करने पर वहाँ सूक्ष्म जीवाणु पनपने लगते हैं , जिससे दाँतों में अस्थिक्षय ( caries ) तथा मसूड़ों में सूजन हो जाता है । दाँतों को साफ करने के लिए अच्छे दंतमंजन या दातुन का व्यवहार करना चाहिए । साफ ऊँगली से मसूड़ों के मालिश से दाँत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं ।

बालो को नियमित साफ़ करे

बालों की उचित देखभाल भी स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है । बालों को नियमित रूप से अच्छे साबुन या शैम्पू से धोना चाहिए । बालों को संवारने वाले कंघी या ब्रश को भी नियमित रूप से साफ करना चाहिए । बालों को उपयुक्त तेल या क्रीम लगाकर , ऊँगलियों से मालिश करना भी स्वास्थ्यकर है ।

रोजाना स्नान करे

8. शरीर की त्वचा बाहरी वातावरण के सीधे संपर्क में होती है , जिससे त्वचा पर धूलकण इकट्ठे होते रहते हैं । इनके कारण त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं । धूलकण में स्थित सूक्ष्म रोगाणु के कारण कई तरह के चर्मरोग भी होते हैं । अतः , त्वचा की नियमित सफाई अच्छे साबुन तथा साफ जल से करनी चाहिए । बहुत ठंडे या बहुत गर्म जल से स्नान करना स्वास्थ्यकर नहीं है । स्नान के बाद त्वचा को सुखाने में व्यवहार होने वाला तौलिया साफ और सूखा होना चाहिए ।

पैरो में चपल लगाकर चले

9. हमारे पैरों की उचित देखभाल और सुरक्षा अति आवश्यक है । अतः , नंगे पाँव चलना श्रेयस्कर नहीं है । जूते और चप्पल बिलकुल सही माप के तथा आरामदायक होने चाहिए । उपयोग में आनेवाला मोजा साफ होना चाहिए ।

आरामदायक वस्त्र पहने

10. स्वास्थ्यकर जीवन के लिए उचित वस्त्र का चुनाव भी आवश्यक है । वस्त्रों का चुनाव मौसम के अनुसार करना चाहिए । बहुत कसे हुए वस्त्र आरामदायक नहीं होते हैं तथा इनका कुप्रभाव रक्त संचालन तथा अंगों के स्वतंत्र गति पर पड़ता है । विशेषकर आंतरिक वस्त्र प्रतिदिन बदले जाने चाहिए ।

भोजन संतुलित और पौष्टिक करे

11. स्वस्थ शरीर के रखरखाव में भोजन का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है । भोजन संतुलित , पौष्टिक , ताजा तथा आवश्यकतानुसार गर्म होना चाहिए । भोजन पकाने , रखने और खाने वाले बरतनों की नियमित सफाई होनी चाहिए । भोजन को मक्खियों तथा ऐसे अन्य कीटों से सुरक्षित रखना चाहिए । घर के अंदर और बाहर समुचित सफाई रहनी चाहिए । मक्खी या अन्य कीट सामान्यतः गंदे स्थानों पर ही पनपते हैं । भोजन तथा रसोईघर की गंदगियों को सुरक्षित स्थान , जैसे ढक्कनबंद कूड़ेदानों में ही फेंकना चाहिए ।

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खुले में शौच न करे

12. नियमित शौच की आदत स्वस्थ जीवन का मूल आधार है । हरेक व्यक्ति को एक दिन में कम – से – कम एक बार मल का पूर्ण त्याग करना अनिवार्य है । शौचालय साफ – सुथरा होना चाहिए तथा उसमें पानी की व्यवस्था होनी चाहिए ।

खुले स्थानों में शौच करना अपने साथ – साथ दूसरों के लिए भी हानिकारक है । जहाँ पक्के प शौचालय की व्यवस्था नहीं हो , वहाँ मिट्टी खोदकर लि अस्थायी शौचालय बनाए जा सकते हैं । परंतु , ऐसे शौचालय में शौच के तुरंत बाद मल को मिट्टी या बालू से ढंक देना चाहिए ।

शौच के बाद हाथ और पैर को साबुन से अवश्य धोना चाहिए ।

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना अनिवार्य है ।

1. शरीर की स्नान द्वारा नियमित सफाई

2. आवश्यकतानुसार संतुलित आहार का सेवन

3. भूख महसूस होने पर ही भोजन करना

4. भोजन को अच्छी प्रकार से चबाकर खाना

5. अत्यधिक तली और भूनी हुई भोजन से परहेज रखना

6. ताजा और गर्म भोजन करना

7. अत्यधिक गर्म या ठंडा भोजन नहीं करना

8. सलाद , हरी पत्तेदार सब्जी तथा फल नियमित रूप से खाना

9. दिन के समय अत्यधिक जल पीना

10. शरीर के आवश्यकतानुसार नियमित आहार लेना तथा सही समय पर सोना और जागना

11. खाद्य सामग्रियों , जैसे सब्जियाँ , फल , विभिन्न अनाज ( जैसे – चावल , गेहूँ , दालें , मकई इत्यादि ) की सुरक्षा के लिए खेतों में तथा उनके भंडारण के समय अकसर उनपर कीटनाशी रसायनों का छिड़काव किया जाता है । ऐसे खाद्य पदार्थों पर अकसर कीटनाशी रसायनों के अवशेष रहते हैं ।

अतः , इनको पकाने के पहले इन्हें अच्छी प्रकार से साफ कर लेना आवश्यक है । ऐसा नहीं करने पर उन खाद्य पदार्थों के साथ हानिकारक रसायन हमारे शरीर में प्रवेशकर हमें नुकसान पहुंचाते हैं ।

खाद्य पदार्थों को साफ करना जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक उन्हें पकड़ने तथा पकाने वाले हाथों का स्वच्छ होना । अतः , भोजन पकाने तथा भोजन करने के पहले हाथों को अच्छी प्रकार साफ कर लेना अति आवश्यक है ।

12. कच्चे तथा पके हुए वैसे खाद्य पदार्थ जिन्हें ढंककर नहीं रखा गया है , अकसर मक्खियाँ बैठती रहती हैं । उनपर कभी – कभी तिलचट्टे तथा अन्य कीड़े – मकोड़े भी बैठते रहते हैं । इन कीटों के शरीर से चिपके हानिकारक रोगाणु उनके शरीर से खाद्य पदार्थों पर स्थानांतरित हो जाते हैं ।

अगर भोजन करने से पहले वैसे कच्चे खाद्य पदार्थों को साफ नहीं कर लिया जाए तो रोगाणु हमारे शरीर में पहुँचकर हमें हानि पहुँचाएँगे । पके हुए भोजन अनिवार्य रूप से ढंककर रखे जाने चाहिए ।

उम्मीद करते है इस लेख से Swasthya Kaise Rahe – हमेशा स्वस्थ रहने के घरेलू उपाय  को काफी अच्छे से समझा होगा , आशा करते है , आपकी मनोकामना पूर्ण हो

Update on May 22, 2021 @ 7:49 am

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