Chanakya Niti In Hindi – चाणक्य नीति तीसरा अध्याय Third Chapter

Chanakya Niti In Hind

Chanakya Niti In Hindi – चाणक्य नीति तीसरा अध्याय Third Chapter जहां मूर्खा की पूजा नहीं होती , जहां अन्न आदि काफी मात्रा में इकट्ठे रहते हैं , जहां पति – पत्नी में किसी प्रकार का कलह , लड़ाई – झगड़ा नहीं , ऐसे स्थान पर लक्ष्मी स्वयं आकर निवास करने लगती है । कस्य …

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Chanakya Niti In Hindi – चाणक्य नीति : द्वितीय अध्याय

Chanakya Niti In Hindi - चाणक्य नीति : द्वितीय अध्याय

चाणक्य नीति : द्वितीय अध्याय – Chanakya Niti In Hindi ‘ मनसा चिंतित कार्य ‘ अर्थात मन से सोचे हुए कार्य को वाणी द्वारा प्रकट नहीं करना चाहिए , परंतु मननपूर्वक भली प्रकार सोचते हुए उसकी रक्षा करनी चाहिए और स्वयं चुप रहते हुए उस सोची हुई बात को कार्यरूप में बदलना चाहिए । अनृतं …

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चाणक्य नीति : प्रथम अध्याय – Chanakya Niti In Hindi

चाणक्य नीति : प्रथम अध्याय

चाणक्य नीति : प्रथम अध्याय – Chanakya Niti In Hindi किसी कष्ट अथवा आपत्तिकाल से बचाव के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए । धन खर्च करके भी स्त्रियों की रक्षा करनी चाहिए , परंतु स्त्रियों और धन से भी आवश्यक है कि व्यक्ति स्वयं की रक्षा करे । प्रणम्य शिरसा विष्णुं त्रैलोक्याधिपतिं प्रभुम् । …

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संपूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में – Chanakya Niti In Hindi

संपूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में - Chanakya Niti In Hindi

Chanakya लगभग दो हजार वर्ष पूर्व भारत के इतिहास को जिस बालक ने एक स्वर्णिम मोड़ दिया , वही बालक बड़ा होकर चाणक्य बना । उसका असली नाम था विष्णुगुप्त । उसकी कूटनीतिक विलक्षणता की वजह से लोग उसे कौटिल्य भी कहते थे । यह घटना तब की है , जब विश्व के मानचित्र पर …

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