तुलसी खाने के फायदे – Tulsi Benefits In Hindi

Tulsi Benefits In Hindi तुलसी एक सुरक्षित एंटीबायोटिक दवा है। इसे सर्वरोगहरी कहते हैं। यह औषधि शारीरिक और मानसिक रोगों का शमन करती है। आयुर्वेद ने भी इसे कई बीमारियों में कारगर पाया है।

तुलसी खाने के फायदे – tulsi khane ke fayde

तुलसी का पौधा पीपल की तरह निरंतर ऑक्सीजन प्रदान कर मानव जाति के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

तुलसी में विकिरण के दुष्प्रभाव को दूर करने का गुण होता है। तुलसी दो प्रकार की होती है- रमा तुलसी, जिसके पत्ते हरे होते हैं और श्यामा, जिनके पत्ते काले होते हैं। आयुर्वेद ने दोनों को समान गुण दिए हैं।

तुलसी को वैष्णवी, वृंदा, तुलसी, विष्णुपाटनी, सुगंधा, पावनी आदि नामों से जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार तुलसी ज्वरनाशक, ज्वरनाशक, मधुमेह रोधी, मूत्रल (मूत्रवर्धक), कोलेसिस्टाइटिस, हृदय के लिए लाभकारी, ज्वरनाशक जिल्द की सूजन, हिस्टीरिया, बेहोशी।

सावन के महीने में तुलसी के पौधे लगाए जाते हैं। इसे एक अभियान के रूप में भी चलाया जा सकता है। इसके पौधों का वितरण पुण्यकारी माना गया है। कई बीमारियों को ठीक करने के लिए इसकी आसान उपलब्धता और गुणवत्ता के कारण तुलसी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

तुलसी के गुण

गाउट और कफ से संबंधित सभी प्रकार के रोगों में इसका प्रभाव बहुत प्रभावी पाया गया है। तुलसी का कैंसर रोधी प्रभाव भी होता है। स्थानीय लेप के रूप में इसका उपयोग घाव, फोड़े, जोड़ों की सूजन, दर्द, मोच आदि में प्रभावी होता है।

मानसिक अवसाद और निम्न रक्तचाप की स्थिति में इसे त्वचा पर मलने से तंत्रिका तंत्र तुरंत सक्रिय हो जाता है। यह शरीर के बाहरी कीड़ों को नष्ट करने के लिए भी लगाया जाता है। यह पेट के कीड़ों और पेट के कीड़ों को नष्ट करने में भी उपयोगी है।

तुलसी सभी प्रकार के ज्वरों का चक्र तुरंत तोड़ देती है । क्षयरोग नष्ट करने में भी प्रभावी है जीवनीशक्ति बढ़ाती है तथा हानिकारक जीवाणुओं को पलने नहीं देती है । जहाँ तुलसी के पौधे होते हैं , वहाँ की वायु विषाणुरहित तथा सुगंधित होती है ।

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खाँसी मे

अखरोट के पत्तों का रस और तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर खाने से खांसी में बहुत लाभ होता है। चार-पांच लौंग को भूनकर तुलसी के पत्तों के साथ लेने से हर प्रकार की खांसी में आराम मिलता है।

तुलसी के पत्तों के रस में शहद के साथ अदरक का रस मिलाकर चाटने से भी लाभ होता है। काली तुलसी के पत्तों का रस काली मिर्च के साथ लेने से खांसी में आराम मिलता है।

दाँतों के दरद में

तुलसी के पत्ते काली मिर्च के साथ पीसकर छोटी – छोटी – सी गोली बनाकर दरद वाले दाँतों के बीच दबाकर रखने से दाँत का दरद बंद होता है ।

साइनस रोग में

तुलसी के पत्ते या मंजरी को पीसकर कपड़छन कर चूर्ण बना लेना चाहिए तथा इसे नस्य के रूप में सुँघाना चाहिए । इससे नाक से बदबू आना बंद हो जाता है । मस्तिष्क के कृमि नष्ट हो जाते हैं ।

कान की पीड़ा –

तुलसी के पत्तों का रस निकालकर हलका गरम करके 2-3 बूँद कान में टपकाएँ । इससे कान का दरद बंद हो तुलसी के पत्तों का रस दो भाग तथा सरसों का तेल एक भाग मंद आग पर गरम कर सिद्ध तेल बना लें । यह तेल जब भी कान में दरद हो , 1-2 बूंद डालने से कान की पीड़ा दूर होती है ।

दाद में –

चर्मरोगों में तुलसी को बड़ी प्रभावी औषधि माना गया है । तुलसी के पत्तों को पीसकर जाता । उसमें नीबू का रस मिलाकर कुछ दिन तक दाद पर लगाने से ( लेप करने से ) दाद समाप्त हो जाता है । अन्य चर्मरोगों में तुलसी के पत्तों को गंगाजल में पीसकर नित्य लगाने से सफेद दाग मिट जाते हैं । तुलसी के पत्तों का रस दो भाग तथा तिल का तेल एक भाग लेकर मंद आँच में पकाएँ । ठीक पक जाने पर छान लें । यह तेल खुजली इत्यादि चर्मरोगों में भी लाभकारी है । चेहरे के सौंदर्य के लिए तुलसी के पत्तों को पीसकर उबटन लगाएँ ।

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मलेरिया में

एक गिलास पानी में 21 तुलसी के पत्ते एवं 2 काली मिर्च पीसकर डालें तथा इस पानी को उबालें जब आधा पानी शेष रहे , तब उतारकर ठंढा करें । चाय की तरह यह काढ़ा रोगी को पिला दें , इससे पसीना आकर ज्वर दूर होगा ।

सर्प विष में

तुलसी विषनाशक है । सर्पदंश की स्थिति में तुलसी के पत्तों का रस अधिक – से अधिक मात्रा में मिलाएँ तथा तुलसी की जड़ को घिसकर शरीर में दंशस्थल पर लेप करें । सर्पदंश से पीड़ित रोगी यदि बेहोशी में हो तो उसके कान एवं नाक में तुलसी के पत्तों का रस डालना चाहिए । इससे बेहोशी दूर होगी एवं सर्पविष का प्रभाव दूर होगा । केले के तने का रस भी तुलसी के पत्तों के रस के साथ देने से बड़ा प्रभावकारी होता है ।

दस्त में

तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ी मात्रा में जायफल पीसकर मिला दें और रोगी को पिला दें , इससे लाभ होता है । 200 ग्राम दही में तुलसी के पत्ते 1 ग्राम पीसकर मिला दें तथा 3 ग्राम ईसबगोल , 5 ग्राम बिल्व चूर्ण ( बेल चूर्ण ) भी मिला दें , इससे पतले दस्तों में लाभ होगा ।

उलटी में –

उलटी की स्थिति में तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ चटाते हैं । अदरक का रस , तुलसी के पत्तों का रस , छोटी इलायची के साथ पीसकर देने से उलटी बंद हो जाती है ।

गठिया रोग में

तुलसी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। तुलसी के काढ़े के सेवन से नाड़ी की दर्द बंद हो जाती है। जोड़ों में दर्द हो तो तुलसी के पत्तों का रस पीने से लाभ होता है। मोच और चोट के निशान पर पत्तियों के रस की मालिश की जाती है। तुलसी के पंचांग को पानी में उबालकर भाप लेने से भी जोड़ों के दर्द, लकवा, गठिया आदि में आराम मिलता है।

मुँह की दुर्गंध में –

प्रातः स्नान के पश्चात पाँच पत्ते जल के साथ निगल लेने से मुँह की दुर्गंध एवं मस्तिष्क की निर्बलता दूर होती है । स्मरणशक्ति तथा मेधा की वृद्धि होती है ।

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सिरदरद में –

आधासीसी के दरद में तुलसी की छाया में सुखाई मंजरी 2 ग्राम लेकर शहद के साथ सेवन कराने से लाभ होता है । काली तुलसी की जड़ को चंदन की तरह घिसकर लेप करने से सिरदरद मिटता है ।

तुलसी के सूखे पत्तों का चूर्ण या बीजों का चूर्ण पीसकर कपड़े से छान लें तथा सूंघनी की तरह सूंघने से सिरदरद में लाभ होता है । बालतोड़ में तुलसी के पत्ते तथा पीपल की कोमल पत्तियों को पीसकर दिन में दो बार लेप करने से लाभ होता है ।

बच्चों के पेट फूलने पर –

अवस्थानुसार 1-2 ग्राम तुलसी के पत्तों का रस पिलाने से लाभ होता है । पेट के कीड़े – तुलसी के 11 पत्ते पीसकर 1 ग्राम बायबिडंग चूर्ण तथा ताजे जल के साथ सुबह शाम देने से पेट के कीड़े मर जाते हैं । धातु दौर्बल्य में तुलसी के बीज 1 ग्राम लेकर गाय के दूध के साथ प्रातः एवं रात्रि में सेवन कराने से लाभ होता है ।

प्रदर रोग में

अशोक के पत्तों और तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर कुछ दिन देने से लाभ होता है ।

हिचकी एवं अस्थमा में –

10 ग्राम तुलसी के रस को 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी एवं अस्थमा में लाभ होता है ।

अंतिम शब्द

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