WaterMelon Benefits In Hindi – तरबूज खाने के फायदे

आज के इस लेख में हम तरबूज खाने के फायदे के बारे में जानेंगे की आपको तरबूज क्यों खाना चाहिए।

मौसमी, क्षेत्रीय और मूल भोजन करने से हम स्वस्थ रहते हैं। प्रकृति ने मानव स्वास्थ्य के लिए अपने सभी गुणों को फलों और सब्जियों में भर दिया है।

स्वस्थ रहने के लिए 80 प्रतिशत क्षारीयता और 20 प्रतिशत अम्लता होनी चाहिए। इस संतुलन को बनाए रखने के लिए ताजे फल-सब्जियों का सेवन करना चाहिए। गर्मी के दुष्प्रभाव से लड़ने के लिए प्रकृति ने तरबूज के रूप में एक अनमोल उपहार दिया है।

WaterMelon Benefits In Hindi – तरबूज खाने के फायदे

तरबूज में सिट्रोलिन नामक तत्व पाया जाता है। यह सिट्रोलिन शरीर में मौजूद एंजाइमों के साथ परस्पर क्रिया करता है और इसे आर्जिनिन नामक अमीनो एसिड में बदल देता है।

यह रोग प्रतिरोधक क्षमता, हृदय और रक्त प्रवाह के लिए लाभकारी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अम्निन शारीरिक और मानसिक समस्याओं के कारण होने वाली नपुंसकता को दूर करने में मदद करता है।

एनजाइना, उच्च रक्तचाप और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं के उपचार में भी मदद करता है। शरीर से हानिकारक और घातक पदार्थों को निकालकर शरीर को स्वस्थ रखने में आर्जिनिन फायदेमंद होता है।

तरबूज के उपयोग

तरबूज में 8 प्रतिशत लाइकोपीन पाया जाता है; जो हृदय, प्रोस्टेट और त्वचा संबंधी समस्याओं के इलाज में मददगार है। खनिज – लवण और अच्छे क्षारीय फलों के भंडारण के कारण, इसके उपयोगकर्ता कब्ज, अल्सर, पथरी, गठिया, गठिया, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा आदि कई बीमारियों से बचाते हैं। इससे गुर्दे स्वस्थ रहते हैं।

ध्यान रखे : तरबूज को ठंढा होने के बाद ठीक से खाना फायदेमंद होता है। तरबूज को ज्यादा देर तक काट कर न रखें। हवा के संपर्क में आने पर ऑक्सीकरण होता है।

तरबूज का शरबत बनाने की विधि – तरबूज के गूदे का रस 200 ग्राम , 1 ग्राम अदरक का रस , 20 ग्राम संतरे का रस और 1 चुटकी नमक स्वादानुसार मिसरी डालकर ठंढा शरबत बनाकर नियमित सेवन करने से लाभ होता है । मस्तिष्क तरोताजा बना रहता है ।

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सुजाक में

सुजाक – यह यौनांग की गरमी का एक रोग है । तरबूज के एक गिलास रस में 2 ग्राम कलमी शोरा तथा स्वादानुसार जीरा चूर्ण तथा मिसरी मिलाकर दिन में 2 या 3 बार सेवन करने से सुजाक रोग दूर होता है ।

सुजाक के रोगी को गरम प्रकृति के खाद्य एवं चाय , काफी आदि गरम पेय पदार्थों से परहेज रखना चाहिए । पर्याप्त पानी का सेवन दिनभर करते रहना आवश्यक होता है । तेज मिर्च एवं गरम मसालों तथा तले खाद्यों का * सेवन नहीं करना चाहिए ।

एसिडिटी , उलटी , पेट जलन में

एसिडिटी , उलटी – पेट में जलन , उलटी , खट्टी डकार इत्यादि विकारों में तरबूज का रस स्वादानुसार मिसरी के साथ सेवन करने से लाभ होता है ।

पाचन एवं भूख की कमी

तरबूज काटकर उसके गूदे पर नमक , काला जीरा एवं काली मिर्च पीसकर स्वाद के अनुसार डालकर सेवन करने से पाचन ठीक से होता है तथा जठराग्नि तेज होने से भूख खुलकर लगती है । पेट साफ रहता है ।

पेशाब में जलन एवं रुकावट

कम पानी पीने अम्लीय एवं गरम खाद्यों का सेवन , शारीरिक उष्णता बढ़ जाने या धूप के प्रकोप से पेशाब में जलन , संक्रमण , रुकावट , घबराहट , बेचैनी दूर करने के लिए तरबूज का शरबत निम्नानुसार बनाकर प्रतिदिन सेवन करना हितकारक होता है ।

हृदय रोग –

तरबूज में ‘ लाइकोपेन ‘ पाया जाता है , जो हृदय को स्वस्थ रखने के लिए लाभप्रद होता है । दोपहर भोजन के 2 घंटे बाद नियमित तरबूज का सेवन करना चाहिए । इससे हृदय रोग होने की आशंका दूर होती है ।

प्रोस्टेट की वृद्धि –

वृद्धावस्था में होने वाला रोग है । प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने पर मूत्र में रुकावट होती है । तरबूज के नियमित सेवन करने से प्रोस्टेट की वृद्धि रुकती है ।

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त्वचा रोग

तरबूज का प्रतिदिन सेवन करने से त्वचा संबंधी दोषों का निवारण होता है । त्वचा के सौंदर्य में निखार आता है । एक्जिमा , उकवत / छाजन , दाद आदि में तरबूज के छिलकों को सुखाकर , भस्म बनाकर सरसों के तेल में मिलाकर लगाएँ ।

सूखी खाँसी

तरबूज के गूदे पर चुटकीभर काला नमक छिड़ककर खाने से सूखी – खाँसी के रोगी को लाभ मिलता है ।

मस्तिष्क की कमजोरी

दिमागी ताकत बढ़ाने के लिए प्रतिदिन प्रात : निराहार तरबूज के बीजों की मिंगी 5 ग्राम लेकर समभाग मात्रा में मिसरी के साथ चबा – चबाकर सेवन करने से लाभ होता है ।

सिरदरद

गरमी के कारण होने वाले सिरदरद में प्रातः तरबूज के गूदे का रस निकालकर , मिसरी मिलाकर , शरबत बनाकर पीने से लाभ होता है ।

पागलपन में

( 1 ) तरबूज के बीजों की मिंगी 10 ग्राम , 10 ग्राम मक्खन , 15 ग्राम मिसरी तथा 1 छोटी इलाय चूर्ण मिलाकर सेवन कराना चाहिए । उपचार लंबे समय तक नियमित जारी रखना चाहिए । ( 2 ) तरबूज के रस का मिसरी मिलाकर शरबत भी नियमित सेवन करना चाहिए । *

उच्च रक्तचाप में

10 ग्राम तरबूज के बीजों की मिंगी को पीसकर एक गिलास उबलते गरम पानी में डाल दें , ठंढा होने पर 2 घंटे बाद सेवन करें । यह एक मात्रा है । इस प्रकार दिन में तीन बार सेवन करने से बढ़ा हुआ रक्तचाप कम हो जाता है अथवा 10 ग्राम बीजों को भूनकर , मिसरी या शहद के साथ सेवन करें ।

मोटापा में

मोटापा आधुनिक जीवनशैली का रोग भी कहा जाता है । तनावजन्य भूख एवं हारमोनों के असंतुलन एवं पैतृक कारणों से भी मोटापा होता है । चायनीजफूड , बोतलबंद सभी पेय , कोल्ड ड्रिंक्स , फास्टफूड , जंकफूड , चाय , कॉफी तथा तले खाद्य और अति – आहार से एवं श्रमविहीन जीवन से चयापचय में गड़बड़ी होने से विजातीय तत्त्वों का जमाव शरीर में होने लगता है ।

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तरबूज से खनिज – लवणों की मात्रा की आपूर्ति शरीर में होती रहती है । कम कैलोरी का खाद्य होने से वजन भी नहीं बढ़ाता तथा आसानी से पचकर गुरदे एवं बड़ी आंत की सफाई भी करता है ।

दोषों को बाहर निकालकर शरीर में स्फूर्ति भरता है । सुबह – शाम एक – एक घंटा शक्ति के अनुसार तेजगति से अवश्य टहलना चाहिए ।

संधिवात – गठिया

तरबूज एक अच्छा क्षारीय फल है , जो रक्त की शुद्धि करता है । जोड़ों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आवश्यक मिनरल्स इसमें विद्यमान होते हैं । तरबूज के पोषक तत्त्व जोड़ों में जमा विषाक्त तत्त्वों को बाहर निकाल देते हैं । जोड़ लचीले एवं सशक्त बनते हैं ।

गरमी का ज्वर

गरमी के दिनों के ज्वर में तरबूज का सेवन कराने से ज्वर दूर होता है ।

कब्ज में

तरबूज में पोटैशियम होता है । मांसपेशियों और ऊतकों के लिए पोटैशियम आवश्यक खनिज लवण है । कब्ज पोटैशियम की कमी का द्योतक है । तरबूज का सेवन प्रतिदिन करने से प्राकृतिक रूप से पोटैशियम उपलब्ध होता है । टमाटर , खरबूजा , खीरा , ककड़ी , नारियल पानी भी पोटैशियम के अच्छे स्रोत हैं ।

मुँह सुखना

बार – बार मुँह सूखता है और तीव्र प्यास लगती है । तरबूज का रस निकालकर , मिसरी मिलाकर , ठंढा शरबत बनाकर सेवन करने से बार मुँह सुखना दूर होता है ।

अंतिम शब्द

इस लेख में आपको WaterMelon Benefits In Hindi – तरबूज खाने के फायदे इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारिया मिली हमें यकीन है की आप सभी पाठको को यह काफी पसंद होगा

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Update on May 25, 2021 @ 9:06 am

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